अमेरिका में मिडटर्म चुनाव की वोटिंग जारी, तीन सर्वे में ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी पीछे; 470 सीटों पर मुकाबला

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अमेरिका में मिडटर्म चुनाव की वोटिंग जारी, तीन सर्वे में ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी पीछे; 470 सीटों पर मुकाबला

अमेरिका में 3 नवंबर को मिडटर्म चुनाव के लिए मतदान जारी है। ये चुनाव राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के शुरुआती दो वर्षों के बाद देश की राजनीतिक दिशा का महत्वपूर्ण संकेत माने जा रहे हैं। हालांकि राष्ट्रपति का नाम इस चुनाव में सीधे मतपत्र पर नहीं है, लेकिन उनकी लोकप्रियता, सरकार की नीतियां और आर्थिक मुद्दे चुनावी बहस के केंद्र में बने हुए हैं। मतदाता अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों के साथ-साथ कई राज्यों में गवर्नर और स्थानीय प्रतिनिधियों का भी चुनाव कर रहे हैं।

इस चुनाव को केवल सीटों की लड़ाई के तौर पर नहीं देखा जा रहा। इसके नतीजे यह तय कर सकते हैं कि ट्रंप प्रशासन अपने शेष कार्यकाल में कितनी आसानी से कानून पारित करा पाएगा, कांग्रेस में उसे कितना राजनीतिक समर्थन मिलेगा और विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी को सरकार की नीतियों पर निगरानी रखने का कितना अवसर मिलेगा। यही वजह है कि अमेरिका के भीतर ही नहीं, बल्कि दुनिया भर में इस चुनाव पर नजर रखी जा रही है।

470 सीटों पर मुकाबला, कांग्रेस के दोनों सदनों का भविष्य दांव पर

अमेरिकी कांग्रेस के दो सदन हैं: प्रतिनिधि सभा यानी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स और सीनेट। इस मिडटर्म चुनाव में प्रतिनिधि सभा की सभी 435 सीटों पर मतदान हो रहा है। इसके अलावा सीनेट की 100 सीटों में से 35 सीटों के लिए चुनाव है। इस तरह कांग्रेस के दोनों सदनों की कुल 470 सीटों पर मुकाबला हो रहा है।

प्रतिनिधि सभा में बहुमत हासिल करने के लिए किसी पार्टी को कम से कम 218 सीटों की जरूरत होती है। मौजूदा राजनीतिक समीकरण में डेमोक्रेटिक पार्टी को बहुमत हासिल करने के लिए कुछ सीटों का शुद्ध लाभ चाहिए। दूसरी ओर, रिपब्लिकन पार्टी के लिए चुनौती अपने मौजूदा बहुमत को बचाए रखने की है।

सीनेट का गणित प्रतिनिधि सभा से अलग है। यहां कुल 100 सीटें हैं और बहुमत के लिए 51 सीटों की जरूरत होती है। रिपब्लिकन पार्टी के पास फिलहाल बढ़त है, जबकि डेमोक्रेट्स को नियंत्रण हासिल करने के लिए कई महत्वपूर्ण सीटों पर जीत दर्ज करनी होगी। कुछ मुकाबले इतने करीबी हैं कि चुनावी नतीजों से पहले किसी एक पार्टी की जीत को निश्चित नहीं माना जा सकता।

इन चुनावों में 36 राज्यों में गवर्नर पद के लिए भी मतदान हो रहा है। इसके साथ ही राज्य विधानसभाओं और स्थानीय स्तर पर हजारों पदों के लिए चुनाव आयोजित किए जा रहे हैं। कई राज्यों में मतदाता जनमत-संग्रह और स्थानीय नीतियों से जुड़े प्रस्तावों पर भी फैसला करेंगे।

तीन सर्वेक्षणों में रिपब्लिकन पार्टी पिछड़ती दिखाई दे रही है

चुनाव से पहले सामने आए कई सर्वेक्षणों में डेमोक्रेटिक पार्टी को प्रतिनिधि सभा में बढ़त मिलने का अनुमान जताया गया है। कुछ चुनावी मॉडल डेमोक्रेट्स को बहुमत के करीब या उससे आगे दिखा रहे हैं। हालांकि अलग-अलग सर्वेक्षणों के आंकड़े और अनुमान एक जैसे नहीं हैं। इसलिए इन नतीजों को अंतिम चुनावी परिणाम नहीं समझना चाहिए।

सर्वेक्षणों में डेमोक्रेट्स की बढ़त के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं। इनमें महंगाई, रोजमर्रा की चीजों की कीमतें, ईंधन की लागत, राष्ट्रपति ट्रंप की लोकप्रियता और सरकार की विदेश नीति को लेकर मतदाताओं की चिंताएं शामिल हैं। चुनावी विश्लेषकों के अनुसार, कई मतदाता इस चुनाव को ट्रंप प्रशासन के कामकाज पर अपनी राय जाहिर करने के अवसर के रूप में देख रहे हैं।

फिर भी रिपब्लिकन पार्टी के लिए चुनाव पूरी तरह निराशाजनक नहीं माना जा रहा। कुछ सर्वेक्षणों में मुकाबले को करीबी बताया गया है और कई सीटों पर अनिर्णीत मतदाताओं की संख्या काफी है। यदि ये मतदाता बड़ी संख्या में मतदान करते हैं, तो चुनावी तस्वीर बदल सकती है।

सर्वेक्षणों का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि मतदाताओं की नाराजगी किसी एक पार्टी के प्रति समर्थन में स्वतः नहीं बदलती। कुछ मतदाता रिपब्लिकन पार्टी के खिलाफ वोट देने की बात कह रहे हैं, लेकिन वे डेमोक्रेट्स की नीतियों से भी पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं। इस कारण मतदान प्रतिशत और अंतिम समय में मतदाताओं का फैसला निर्णायक हो सकता है।

ट्रंप के लिए जनमत संग्रह जैसा चुनाव

मिडटर्म चुनाव राष्ट्रपति के कार्यकाल के बीच में होते हैं। आम तौर पर इन्हें राष्ट्रपति की लोकप्रियता और उनकी पार्टी के प्रदर्शन की परीक्षा माना जाता है। अमेरिका के राजनीतिक इतिहास में राष्ट्रपति की पार्टी को मिडटर्म चुनावों में अक्सर नुकसान उठाना पड़ा है। इस बार भी यही ऐतिहासिक प्रवृत्ति रिपब्लिकन पार्टी के लिए चुनौती मानी जा रही है।

ट्रंप ने चुनाव प्रचार के दौरान रिपब्लिकन उम्मीदवारों के समर्थन में कई रैलियां कीं। उन्होंने अपनी सरकार की नीतियों का बचाव किया और डेमोक्रेटिक पार्टी पर देश की समस्याओं के लिए जिम्मेदार होने का आरोप लगाया। दूसरी ओर, डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों ने महंगाई, स्वास्थ्य सेवाओं, रोजगार और प्रशासनिक जवाबदेही जैसे मुद्दों को उठाया।

ट्रंप की भूमिका इस चुनाव में इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि रिपब्लिकन उम्मीदवारों के लिए उनका समर्थन एक ओर पार्टी के मजबूत समर्थकों को उत्साहित कर सकता है, तो दूसरी ओर कुछ स्वतंत्र और मध्यमार्गी मतदाताओं को प्रभावित भी कर सकता है। चुनावी विश्लेषकों का कहना है कि राष्ट्रपति के प्रति समर्थन और विरोध दोनों ही मतदान के पीछे बड़ी प्रेरणा बन सकते हैं।

यदि रिपब्लिकन पार्टी दोनों सदनों में अपना बहुमत बनाए रखती है, तो ट्रंप प्रशासन को अपने विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाने में अपेक्षाकृत आसानी होगी। लेकिन यदि डेमोक्रेट्स किसी एक सदन या दोनों सदनों में बहुमत हासिल कर लेते हैं, तो प्रशासन को कानून पारित कराने, बजट और नियुक्तियों से जुड़े फैसलों में अधिक राजनीतिक बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है।

महंगाई और अर्थव्यवस्था बने चुनाव के बड़े मुद्दे

अमेरिकी मतदाताओं के लिए अर्थव्यवस्था इस चुनाव के सबसे अहम मुद्दों में से एक है। रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतें, घरों का खर्च, स्वास्थ्य सेवाएं, ईंधन और परिवारों की आर्थिक स्थिति चुनावी चर्चा में प्रमुखता से शामिल हैं।

कई मतदाताओं को चिंता है कि महंगाई के कारण उनकी आमदनी का बड़ा हिस्सा आवश्यक खर्चों में चला जाता है। कुछ मतदाता यह भी मानते हैं कि सरकार की नीतियों का असर उनकी आर्थिक स्थिति पर पड़ सकता है। डेमोक्रेटिक पार्टी ने इन चिंताओं को उठाते हुए रिपब्लिकन प्रशासन की आर्थिक नीतियों पर सवाल किए हैं।

रिपब्लिकन पार्टी की ओर से आर्थिक विकास, कर नीति और रोजगार को लेकर अपने पक्ष में तर्क दिए जा रहे हैं। पार्टी का कहना है कि उसकी नीतियां व्यवसायों और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा दे सकती हैं। हालांकि मतदाताओं के लिए सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या उन्हें अपने दैनिक जीवन में आर्थिक राहत महसूस हो रही है।

चुनावी सर्वेक्षणों में अर्थव्यवस्था को लेकर मतदाताओं की चिंता डेमोक्रेट्स के पक्ष में दिखाई देने वाले रुझानों से जुड़ी बताई गई है। लेकिन यह भी स्पष्ट है कि सभी मतदाता एक ही मुद्दे के आधार पर वोट नहीं कर रहे। कुछ के लिए अर्थव्यवस्था प्राथमिक मुद्दा है, जबकि अन्य मतदाता आव्रजन, सुरक्षा, गर्भपात अधिकार, विदेश नीति और लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्थिति को महत्व दे रहे हैं।

सीनेट की लड़ाई क्यों है अधिक कठिन?

डेमोक्रेटिक पार्टी के लिए प्रतिनिधि सभा में बहुमत हासिल करने की संभावना सीनेट की तुलना में अधिक अनुकूल बताई जा रही है। सीनेट में पार्टी को बहुमत तक पहुंचने के लिए कई सीटों पर जीत दर्ज करनी होगी। कुछ सीटें ऐसे राज्यों में हैं जहां रिपब्लिकन पार्टी को पहले से मजबूत समर्थन प्राप्त रहा है।

इस बार सीनेट की 35 सीटों पर मतदान हो रहा है। इनमें अधिकांश सीटें रिपब्लिकन पार्टी के पास हैं, इसलिए डेमोक्रेट्स को बहुमत हासिल करने के लिए कुछ रिपब्लिकन सीटें जीतनी होंगी। दूसरी ओर, रिपब्लिकन पार्टी को अपनी मौजूदा सीटें बचाने के साथ-साथ उन राज्यों में भी प्रदर्शन करना होगा जहां मुकाबला करीबी है।

सीनेट में किसी पार्टी का नियंत्रण केवल कानून पारित करने तक सीमित नहीं होता। यहां न्यायाधीशों और वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों की नियुक्तियों की पुष्टि जैसे महत्वपूर्ण फैसले भी होते हैं। इसलिए सीनेट का नियंत्रण राष्ट्रपति के प्रशासनिक और न्यायिक एजेंडे पर गहरा प्रभाव डाल सकता है।

सीनेट के कुछ मुकाबलों में चुनावी नतीजे देर से स्पष्ट हो सकते हैं। यदि किसी राज्य में मतों का अंतर बहुत कम रहता है, तो मतगणना, डाक मतपत्रों और कानूनी प्रक्रियाओं के कारण अंतिम परिणाम घोषित होने में समय लग सकता है।

कांग्रेस में बहुमत बदलने से क्या होगा?

यदि डेमोक्रेटिक पार्टी प्रतिनिधि सभा में बहुमत हासिल करती है, तो वह कई संसदीय समितियों का नियंत्रण अपने हाथ में ले सकती है। इससे ट्रंप प्रशासन की नीतियों, सरकारी खर्च और विभिन्न विभागों के कामकाज की जांच के लिए अधिक अवसर मिल सकते हैं।

कांग्रेस की समितियां सरकारी अधिकारियों से सवाल पूछ सकती हैं, दस्तावेज मांग सकती हैं और सार्वजनिक सुनवाई आयोजित कर सकती हैं। ऐसे मामलों में प्रशासन को राजनीतिक और सार्वजनिक दबाव का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि जांच या सुनवाई का होना अपने आप में किसी आरोप के सही साबित होने का प्रमाण नहीं होता।

कानून बनाने की प्रक्रिया में भी बदलाव आ सकता है। डेमोक्रेट्स यदि किसी सदन में बहुमत हासिल करते हैं, तो वे अपनी प्राथमिकताओं के अनुसार विधेयकों को आगे बढ़ाने की कोशिश कर सकते हैं। लेकिन राष्ट्रपति के पास विधेयकों पर वीटो का अधिकार है और सीनेट में बहुमत का गणित अलग है। इसलिए किसी एक सदन में जीत का अर्थ यह नहीं होगा कि डेमोक्रेट्स अपनी सभी नीतियां लागू कर पाएंगे।

इसके उलट, यदि रिपब्लिकन पार्टी दोनों सदनों में नियंत्रण बनाए रखती है, तो ट्रंप प्रशासन को अपने प्रस्तावों के लिए अधिक समर्थन मिल सकता है। पार्टी इसे राष्ट्रपति की नीतियों के प्रति मतदाताओं के समर्थन के रूप में प्रस्तुत कर सकती है।

विदेश नीति पर भी पड़ सकता है असर

मिडटर्म चुनाव के नतीजों का प्रभाव अमेरिका की विदेश नीति पर भी पड़ सकता है। कांग्रेस बजट, सैन्य सहायता, प्रतिबंधों और विभिन्न अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों से जुड़े फैसलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसलिए सदनों में बहुमत बदलने से विदेश नीति पर बहस का स्वर और प्राथमिकताएं प्रभावित हो सकती हैं।

यूक्रेन, ईरान, व्यापार शुल्क और अमेरिका के अंतरराष्ट्रीय संबंध जैसे मुद्दे चुनावी चर्चा का हिस्सा रहे हैं। हालांकि विदेश नीति पर राष्ट्रपति की भूमिका महत्वपूर्ण होती है, कांग्रेस के समर्थन या विरोध से प्रशासन की योजनाओं को आगे बढ़ाने की गति प्रभावित हो सकती है।

चुनाव के बाद यदि कांग्रेस में राजनीतिक विभाजन बढ़ता है, तो कई बड़े प्रस्तावों पर सहमति बनाना कठिन हो सकता है। इससे बजट और विदेश नीति से जुड़े फैसलों में देरी या समझौते की आवश्यकता बढ़ सकती है।

मतदान प्रतिशत और स्वतंत्र मतदाताओं की भूमिका

इस चुनाव में मतदान प्रतिशत को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। चुनाव से पहले लाखों मतदाता पहले ही शुरुआती मतदान या डाक मतपत्रों के माध्यम से अपना वोट डाल चुके थे। अब मतदान दिवस पर यह देखना अहम होगा कि कौन-सी पार्टी अपने समर्थकों को बड़ी संख्या में मतदान केंद्रों तक ला पाती है।

स्वतंत्र मतदाता और ऐसे लोग जो किसी पार्टी के साथ स्थायी रूप से नहीं जुड़े हैं, करीबी मुकाबलों में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। उनके फैसले स्थानीय उम्मीदवारों, आर्थिक मुद्दों और राष्ट्रपति के प्रदर्शन से प्रभावित हो सकते हैं।

कई राज्यों में मतदान केंद्रों पर चुनावी निगरानी और सुरक्षा को लेकर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। चुनाव अधिकारियों, पर्यवेक्षकों और नागरिक संगठनों की भूमिका मतदान प्रक्रिया की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

क्या सर्वेक्षण चुनावी नतीजों की सही तस्वीर दिखाते हैं?

चुनाव से पहले सर्वेक्षण मतदाताओं की पसंद का अनुमान देते हैं, लेकिन वे वास्तविक मतगणना का विकल्प नहीं हैं। सर्वेक्षणों में नमूने का आकार, मतदाताओं की भागीदारी, अनिर्णीत मतदाताओं का व्यवहार और अलग-अलग राज्यों की राजनीतिक परिस्थितियां परिणामों को प्रभावित कर सकती हैं।

राष्ट्रीय स्तर पर किसी पार्टी को बढ़त मिलने का अर्थ यह भी नहीं है कि वह हर राज्य या जिले में जीत हासिल करेगी। अमेरिकी चुनाव प्रणाली में उम्मीदवारों की जीत अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्रों और राज्यों के परिणामों पर निर्भर करती है। इसलिए राष्ट्रीय सर्वेक्षणों के साथ-साथ स्थानीय मुकाबलों के आंकड़े भी महत्वपूर्ण होते हैं।

इस बार कई सीटों पर मुकाबला करीबी बताया गया है। ऐसे में कुछ हजार वोटों का अंतर भी प्रतिनिधि सभा या सीनेट में बहुमत के समीकरण को बदल सकता है। चुनावी मॉडल संभावनाएं बताते हैं, लेकिन मतदान के बाद ही वास्तविक तस्वीर सामने आएगी।

नतीजे तय करेंगे ट्रंप के शेष कार्यकाल की राजनीतिक दिशा

अमेरिकी मिडटर्म चुनाव के नतीजे केवल यह तय नहीं करेंगे कि कांग्रेस में किस पार्टी के पास कितनी सीटें होंगी। वे ट्रंप प्रशासन के शेष कार्यकाल की राजनीतिक दिशा, विपक्ष की रणनीति और 2028 के राष्ट्रपति चुनाव की तैयारी को भी प्रभावित कर सकते हैं।

रिपब्लिकन पार्टी के लिए यह चुनाव अपने बहुमत और राष्ट्रपति के एजेंडे को बचाने की परीक्षा है। डेमोक्रेटिक पार्टी इसे कांग्रेस में वापसी और प्रशासन पर नियंत्रण बढ़ाने के अवसर के रूप में देख रही है। दोनों पार्टियों के लिए मतदान प्रतिशत, करीबी सीटें और अंतिम समय में मतदाताओं का रुख निर्णायक साबित हो सकता है।

फिलहाल मतदान जारी है और सर्वेक्षणों में डेमोक्रेट्स को कुछ बढ़त दिखाई दे रही है। लेकिन जब तक मतगणना पूरी नहीं होती, किसी भी पार्टी की जीत या हार को निश्चित नहीं माना जा सकता। आने वाले घंटों में अमेरिकी मतदाताओं का फैसला स्पष्ट करेगा कि कांग्रेस में सत्ता का संतुलन किस ओर जाता है और ट्रंप प्रशासन को अपने शेष कार्यकाल में किस तरह की राजनीतिक परिस्थितियों का सामना करना पड़ेगा।

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