
अनुराग सुजानिया से पहले अभिषेक तिवारी ने भी छोड़ी थी IPS की नौकरी, दोनों रह चुके हैं सागर के पुलिस कप्तान
मध्य प्रदेश पुलिस महकमे में आईपीएस अधिकारी अनुराग सुजानिया के इस्तीफे की खबर के बाद एक पुराने मामले की चर्चा फिर तेज हो गई है। सुजानिया से पहले सागर जिले के पुलिस अधीक्षक रह चुके अभिषेक तिवारी ने भी पुलिस सेवा छोड़ने का फैसला किया था। दोनों अधिकारियों का सागर जिले से जुड़ाव रहा और दोनों के कार्यकाल के दौरान गंभीर घटनाओं के बाद प्रशासनिक स्तर पर बदलाव हुए। हालांकि, दोनों मामलों की परिस्थितियां और सेवा छोड़ने की प्रक्रिया एक जैसी नहीं थीं।
अनुराग सुजानिया ने सागर के पुलिस अधीक्षक पद से हटाए जाने के कुछ ही दिनों बाद 2 नवंबर 2026 को इस्तीफा सौंपा। उन्हें 27 अक्टूबर को सागर से हटाकर भोपाल पुलिस मुख्यालय में सहायक पुलिस महानिरीक्षक यानी AIG के पद पर पदस्थ किया गया था। यह तबादला सागर जिले के बंडा क्षेत्र में जहरीली शराब से हुई मौतों के बाद हुआ। सुजानिया ने अपने इस्तीफे में व्यक्तिगत कारणों का उल्लेख किया है। उनका त्यागपत्र अभी अंतिम रूप से स्वीकार किए जाने की प्रक्रिया में है।
दूसरी ओर, अभिषेक तिवारी 2024 में सागर के एसपी थे। शाहपुर क्षेत्र में एक धार्मिक आयोजन के दौरान दीवार गिरने से कई बच्चों की मौत के बाद उन्हें पद से हटाया गया था। इसके बाद वे राष्ट्रीय तकनीकी अनुसंधान संगठन यानी NTRO में प्रतिनियुक्ति पर गए और बाद में जनवरी 2026 में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली। इस तरह दोनों अधिकारियों के सागर से जुड़े कार्यकाल और सेवा छोड़ने की खबरों ने पुलिस प्रशासन, जवाबदेही और वरिष्ठ अधिकारियों के करियर को लेकर चर्चा शुरू कर दी है।
अनुराग सुजानिया ने 2 नवंबर को सौंपा इस्तीफा
2014 बैच के मध्य प्रदेश कैडर के आईपीएस अधिकारी अनुराग सुजानिया ने 2 नवंबर 2026 को पुलिस सेवा से इस्तीफा देने का आवेदन सौंपा। यह कदम सागर जिले के एसपी पद से हटाए जाने के कुछ ही दिनों बाद सामने आया। 27 अक्टूबर को राज्य सरकार ने प्रशासनिक फेरबदल के तहत सागर के पुलिस अधीक्षक और कलेक्टर सहित कुछ अधिकारियों के पदस्थापन में बदलाव किया था।
सुजानिया को सागर से हटाकर भोपाल स्थित पुलिस मुख्यालय में AIG की जिम्मेदारी दी गई थी। वे सागर में लगभग छह महीने तक एसपी रहे थे। इससे पहले वे टीकमगढ़, मंदसौर और मुरैना जैसे जिलों में भी पुलिस अधीक्षक के रूप में काम कर चुके थे।
उनके इस्तीफे की खबर सामने आने के बाद कई तरह की चर्चाएं शुरू हुईं। कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया कि सागर से अचानक तबादला होने से वे असंतुष्ट थे। हालांकि, उनके इस्तीफे में व्यक्तिगत कारणों का उल्लेख किए जाने की जानकारी दी गई है। इसलिए तबादले को इस्तीफे की निश्चित वजह बताना उचित नहीं होगा।
पुलिस महकमे के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, सुजानिया का इस्तीफा नियमानुसार राज्य सरकार को भेजा जाना था। अंतिम निर्णय संबंधित प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही लिया जाएगा। इस्तीफा सौंपना और उसका स्वीकार होना दो अलग-अलग चरण हैं, इसलिए फिलहाल उन्हें सेवा से औपचारिक रूप से मुक्त मानना सही नहीं होगा।
सागर के जहरीली शराब मामले के बाद हुआ था तबादला
अनुराग सुजानिया का तबादला सागर जिले के बंडा क्षेत्र में जहरीली शराब पीने से हुई मौतों के बाद हुआ। सितंबर 2026 में सामने आए इस मामले ने पूरे प्रदेश में चिंता पैदा कर दी थी। अवैध रूप से तैयार या बेची गई शराब के सेवन से कई लोगों की मौत हुई और अनेक लोगों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।
इस घटना के बाद अवैध शराब के निर्माण और वितरण के कथित नेटवर्क को लेकर पुलिस जांच शुरू हुई। साथ ही, कानून-व्यवस्था और निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठे। राज्य सरकार ने प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई करते हुए सागर के एसपी और जिला कलेक्टर का तबादला किया।
सुजानिया उस समय मामले की जांच की निगरानी कर रहे थे। उनके तबादले के बाद उन्हें पुलिस मुख्यालय भोपाल में AIG के पद पर पदस्थ किया गया। इसके चार दिन बाद इस्तीफा सौंपे जाने की खबर आई, जिसके चलते घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज हो गई।
हालांकि, जहरीली शराब मामले में हुई मौतों की संख्या को लेकर विभिन्न रिपोर्टों में अलग-अलग आंकड़े सामने आए। आधिकारिक रूप से पुष्टि किए गए आंकड़े और अन्य अनुमान अलग हो सकते हैं। इसलिए मौतों की संख्या या जिम्मेदारी के बारे में अंतिम निष्कर्ष जांच और सरकारी रिकॉर्ड के आधार पर ही निकाला जाना चाहिए।
मुरैना में भी जहरीली शराब की घटना के बाद हटाए गए थे सुजानिया
अनुराग सुजानिया के करियर में जहरीली शराब से जुड़ी घटना के बाद पद से हटाए जाने का यह पहला मामला नहीं था। जनवरी 2021 में जब वे मुरैना जिले के एसपी थे, तब जहरीली शराब पीने से कई लोगों की मौत हुई थी। उस घटना के बाद भी पुलिस और प्रशासन की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठे थे।
मुरैना की घटना के बाद सुजानिया को एसपी पद से हटाया गया था। कुछ रिपोर्टों में अवैध शराब की बिक्री और पुलिस संरक्षण के आरोपों का उल्लेख किया गया था। इन आरोपों को उस समय की जांच और प्रशासनिक कार्रवाई के संदर्भ में देखा गया था।
सागर की घटना के बाद उनके तबादले और फिर इस्तीफे ने पुराने मामले को भी चर्चा में ला दिया। हालांकि, दोनों घटनाओं की परिस्थितियां, जांच की स्थिति और प्रशासनिक निर्णय अलग-अलग थे। किसी अधिकारी के तबादले को अपने आप में दोष सिद्ध होने का प्रमाण नहीं माना जा सकता।
अभिषेक तिवारी ने भी सागर के एसपी पद से हटने के बाद सेवा छोड़ी
अनुराग सुजानिया से पहले अभिषेक तिवारी भी सागर जिले के पुलिस अधीक्षक रह चुके थे। 2013 बैच के आईपीएस अधिकारी तिवारी ने 2024 में सागर में पदस्थ रहते हुए एक गंभीर हादसे के बाद प्रशासनिक बदलाव का सामना किया था।
अगस्त 2024 में सागर जिले के शाहपुर क्षेत्र में एक धार्मिक आयोजन के दौरान दीवार गिरने से कई बच्चों की मौत हो गई थी। इस घटना ने स्थानीय प्रशासन और आयोजन स्थल की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए। हादसे के बाद अभिषेक तिवारी को सागर के एसपी पद से हटाया गया।
इसके बाद वे दिल्ली में राष्ट्रीय तकनीकी अनुसंधान संगठन यानी NTRO में प्रतिनियुक्ति पर चले गए। यह एक अलग प्रशासनिक व्यवस्था थी, जिसमें अधिकारी पुलिस कैडर से जुड़े रहते हुए दूसरे केंद्रीय संगठन में कार्य करते हैं।
बाद में अभिषेक तिवारी ने जनवरी 2026 में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली। इस प्रक्रिया को सामान्य इस्तीफे से अलग समझना जरूरी है। इस्तीफा और स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति दोनों सेवा छोड़ने के तरीके हैं, लेकिन इनके नियम, प्रक्रिया और प्रशासनिक प्रभाव अलग हो सकते हैं।
शाहपुर हादसे में बच्चों की मौत के बाद उठे थे सवाल
अभिषेक तिवारी के सागर एसपी रहते हुए शाहपुर में धार्मिक आयोजन के दौरान दीवार गिरने की घटना हुई थी। इस हादसे में कई बच्चों की मौत हुई और अन्य लोग घायल हुए थे। घटना के बाद आयोजन स्थल की सुरक्षा, निर्माण की स्थिति और प्रशासनिक निगरानी पर सवाल उठे।
ऐसे हादसों में पुलिस और जिला प्रशासन की भूमिका की समीक्षा की जाती है, लेकिन किसी अधिकारी की जिम्मेदारी का निर्धारण जांच और संबंधित नियमों के आधार पर ही किया जाना चाहिए। प्रशासनिक तबादला एक विभागीय निर्णय हो सकता है, जबकि कानूनी या विभागीय दोष तय करने की प्रक्रिया अलग होती है।
अभिषेक तिवारी को पद से हटाए जाने के बाद उनकी अगली तैनाती NTRO में हुई। कुछ समय बाद उन्होंने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति का विकल्प चुना। उपलब्ध रिपोर्टों में यह नहीं कहा गया कि उन्होंने केवल सागर हादसे के कारण सेवा छोड़ी थी। इसलिए उनके करियर के इन घटनाक्रमों को एक ही कारण से जोड़ना सही नहीं होगा।
दोनों अधिकारियों के बीच क्या समानताएं हैं?
अनुराग सुजानिया और अभिषेक तिवारी के मामलों में कुछ समानताएं जरूर हैं। दोनों मध्य प्रदेश कैडर के आईपीएस अधिकारी रहे, दोनों सागर जिले के एसपी पद पर तैनात रहे और दोनों के कार्यकाल के दौरान गंभीर घटनाओं के बाद पदस्थापन में बदलाव हुआ। दोनों ने बाद में पुलिस सेवा से अलग होने का निर्णय लिया।
लेकिन दोनों की सेवा छोड़ने की प्रक्रिया अलग थी। सुजानिया ने नवंबर 2026 में इस्तीफा सौंपा, जिसकी स्वीकृति की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई थी। अभिषेक तिवारी ने पहले NTRO में प्रतिनियुक्ति पर काम किया और फिर जनवरी 2026 में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ली।
दोनों अधिकारियों की शैक्षणिक पृष्ठभूमि भी तकनीकी शिक्षा से जुड़ी बताई गई है। सुजानिया के पास M.Tech की डिग्री है, जबकि अभिषेक तिवारी ने इलेक्ट्रॉनिक्स में B.Tech किया था और IIM इंदौर में भी अध्ययन किया था।
अभिषेक तिवारी को बालाघाट में नक्सल विरोधी अभियानों के लिए राष्ट्रपति वीरता पदक से सम्मानित किए जाने की जानकारी भी रिपोर्टों में दी गई है। इससे स्पष्ट होता है कि दोनों अधिकारियों के करियर में विभिन्न जिलों और जिम्मेदारियों से जुड़े कई अलग-अलग अध्याय रहे हैं।
इस्तीफा, स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति और तबादले में अंतर
इन दोनों घटनाओं की चर्चा के बीच प्रशासनिक प्रक्रिया को समझना भी महत्वपूर्ण है। किसी आईपीएस अधिकारी का इस्तीफा देना, स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेना और तबादला होना अलग-अलग स्थितियां हैं।
इस्तीफा: अधिकारी सेवा छोड़ने का औपचारिक अनुरोध करता है। इसे संबंधित नियमों और सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी के अनुसार स्वीकार किया जाता है। आवेदन सौंपने मात्र से अधिकारी तुरंत सेवा से मुक्त नहीं हो जाता।
स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति: अधिकारी निर्धारित सेवा अवधि और नियमों के तहत सेवानिवृत्ति का विकल्प चुन सकता है। इसके लिए आवश्यक प्रक्रिया और मंजूरी लागू होती है।
तबादला: यह प्रशासनिक पदस्थापन में बदलाव होता है। अधिकारी सेवा में बना रहता है, लेकिन उसे एक पद या जिले से दूसरे पद या स्थान पर भेजा जाता है।
अनुराग सुजानिया के मामले में फिलहाल इस्तीफा सौंपे जाने की खबर है। वहीं अभिषेक तिवारी के मामले में प्रतिनियुक्ति के बाद स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति की प्रक्रिया सामने आई थी। इसलिए दोनों को एक ही तरह से “इस्तीफा देने वाले अधिकारी” कहना व्यापक अर्थ में तो समझा जा सकता है, लेकिन तकनीकी रूप से दोनों की प्रक्रिया अलग रही।
पुलिस प्रशासन और जवाबदेही पर बहस
सागर जिले से जुड़े दोनों मामलों ने पुलिस प्रशासन की जवाबदेही को लेकर चर्चा को फिर सामने ला दिया है। जहरीली शराब से मौतों और सार्वजनिक आयोजन के दौरान बच्चों की मौत जैसे गंभीर मामलों में पुलिस और जिला प्रशासन की भूमिका की समीक्षा होना स्वाभाविक है।
ऐसी घटनाओं के बाद प्रशासनिक तबादले किए जा सकते हैं, लेकिन तबादले का अर्थ यह नहीं होता कि किसी अधिकारी को कानूनी रूप से दोषी घोषित कर दिया गया है। इसी तरह, किसी अधिकारी का इस्तीफा या स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेना भी अपने आप में किसी मामले की जिम्मेदारी स्वीकार करने के बराबर नहीं है।
इन घटनाओं में पीड़ित परिवारों के लिए न्याय, जांच की पारदर्शिता और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के उपाय सबसे महत्वपूर्ण हैं। अवैध शराब के नेटवर्क पर कार्रवाई, स्कूलों और सार्वजनिक आयोजनों की सुरक्षा व्यवस्था, तथा प्रशासनिक निगरानी को मजबूत करना व्यापक सार्वजनिक हित के मुद्दे हैं।
अनुराग सुजानिया के इस्तीफे पर अंतिम निर्णय बाकी
अनुराग सुजानिया के इस्तीफे को लेकर अब राज्य सरकार के निर्णय पर नजर है। उनका आवेदन पुलिस मुख्यालय के माध्यम से संबंधित विभागों को भेजे जाने की जानकारी सामने आई है। अंतिम स्वीकृति के बाद ही उनकी सेवा स्थिति स्पष्ट होगी।
फिलहाल उनके इस्तीफे की वजह के रूप में व्यक्तिगत कारणों का उल्लेख किया गया है। सागर से तबादले के समय और इस्तीफे के बीच कम अंतर होने के कारण राजनीतिक और प्रशासनिक चर्चा जरूर हो रही है, लेकिन किसी अन्य कारण को आधिकारिक रूप से स्थापित नहीं किया गया है।
अभिषेक तिवारी का मामला भी इस चर्चा में इसलिए शामिल हुआ है क्योंकि वे पहले सागर के एसपी रहे और बाद में पुलिस सेवा से अलग हुए। हालांकि उनके मामले में प्रतिनियुक्ति और स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति की प्रक्रिया हुई थी।
दोनों घटनाक्रम यह दिखाते हैं कि गंभीर घटनाओं के बाद प्रशासनिक बदलाव और वरिष्ठ अधिकारियों के करियर से जुड़े निर्णय सार्वजनिक चर्चा का विषय बन जाते हैं। लेकिन किसी अधिकारी की भूमिका, जिम्मेदारी या सेवा छोड़ने के पीछे की वजह को लेकर अंतिम निष्कर्ष संबंधित आधिकारिक दस्तावेजों और जांच के आधार पर ही निकाला जाना चाहिए।