मध्य प्रदेश में छात्रसंघ चुनाव का रास्ता साफ? हाईकोर्ट ने DAVV को 75 दिन में चुनाव कराने का निर्देश

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मध्य प्रदेश में छात्रसंघ चुनाव का रास्ता साफ? हाईकोर्ट ने DAVV को 75 दिन में चुनाव कराने का निर्देश

मध्य प्रदेश के इंदौर स्थित देवी अहिल्या विश्वविद्यालय (DAVV) में लंबे समय से छात्रसंघ चुनाव का इंतजार कर रहे विद्यार्थियों के लिए बड़ी खबर सामने आई है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने विश्वविद्यालय प्रशासन को 75 दिनों के भीतर छात्रसंघ चुनाव संपन्न कराने के निर्देश दिए हैं। अदालत के इस आदेश के बाद DAVV में चुनाव कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।

यह आदेश 5 नवंबर 2026 को न्यायमूर्ति पवन कुमार द्विवेदी की एकलपीठ ने पारित किया। मामला विश्वविद्यालय में चुनाव नहीं कराए जाने और पहले दिए गए न्यायालय के आदेश का पालन नहीं होने से जुड़ी अवमानना याचिका से संबंधित था।

75 दिनों में चुनाव कराने की जिम्मेदारी DAVV प्रशासन की

हाईकोर्ट ने देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार को निर्देश दिया है कि वह पहले दिए गए आदेश का पालन सुनिश्चित करते हुए निर्धारित 75 दिनों के भीतर छात्रसंघ चुनाव संपन्न कराएं। इस निर्देश के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने चुनाव की प्रक्रिया, कार्यक्रम और अन्य जरूरी व्यवस्थाएं तय करने की जिम्मेदारी है।

अदालत का आदेश ऐसे समय आया है, जब प्रदेश के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में छात्रसंघ चुनाव लंबे समय से नहीं हुए हैं। विद्यार्थियों और छात्र संगठनों की ओर से चुनाव बहाल कराने की मांग लगातार उठती रही है।

हालांकि, अदालत के आदेश के बाद भी चुनाव की सटीक तारीख, नामांकन प्रक्रिया और मतदान कार्यक्रम विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से घोषित किए जाने बाकी हैं। इसलिए फिलहाल इसे चुनाव कराने की दिशा में महत्वपूर्ण न्यायिक निर्देश माना जा रहा है।

अवमानना याचिका के बाद हुई सुनवाई

DAVV में छात्रसंघ चुनाव नहीं होने को लेकर कानून के विद्यार्थी और NSUI कार्यकर्ता अरुणेश मिश्रा ने हाईकोर्ट का रुख किया था। उन्होंने अनुपम राजन और अन्य के खिलाफ अवमानना याचिका दायर की थी।

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता जयेश गुरनानी ने अदालत में पक्ष रखा। याचिका में कहा गया कि हाईकोर्ट पहले ही मध्य प्रदेश के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में छात्रसंघ चुनाव कराने के निर्देश दे चुका है, लेकिन DAVV में चुनाव नहीं कराए गए।

याचिकाकर्ता ने अदालत के सामने यह सवाल उठाया कि जब प्रदेश के सभी उच्च शिक्षण संस्थानों में चुनाव कराने का निर्देश दिया गया था, तो देवी अहिल्या विश्वविद्यालय में निर्धारित समय पर प्रक्रिया क्यों पूरी नहीं हुई।

3 अगस्त के आदेश के बावजूद नहीं हुए थे चुनाव

छात्रसंघ चुनाव को लेकर पहले मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की प्रधानपीठ जबलपुर में रिट याचिका दायर की गई थी। इस याचिका में प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में छात्रसंघ चुनाव कराने की मांग की गई थी।

3 अगस्त 2026 को मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की खंडपीठ ने इस मामले में आदेश दिया था। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 का अकादमिक कैलेंडर अदालत के सामने प्रस्तुत किया था।

इस कैलेंडर में सितंबर 2026 में छात्रसंघ चुनाव कराने का प्रावधान शामिल था। इसी आधार पर प्रदेश के सभी कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में चुनाव कराने के निर्देश दिए गए थे।

लेकिन सितंबर में निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार DAVV में चुनाव नहीं हुए। इसके बाद याचिकाकर्ता ने पहले आदेश के पालन को लेकर अवमानना याचिका दाखिल की।

अकादमिक कैलेंडर में सितंबर का था चुनाव कार्यक्रम

राज्य सरकार की ओर से अदालत में पेश किए गए अकादमिक कैलेंडर में सितंबर 2026 को छात्रसंघ चुनाव के लिए निर्धारित किया गया था। चुनाव से जुड़ी प्रक्रिया को सीमित अवधि में पूरा करने की योजना भी बताई गई थी।

अकादमिक कैलेंडर में चुनाव का उल्लेख होने के बावजूद DAVV में मतदान नहीं कराया गया। इसी बात को लेकर अदालत में सवाल उठाए गए कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने पहले के निर्देशों का पालन क्यों नहीं किया।

हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने मामले के तथ्यों पर विचार करने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन को 75 दिनों के भीतर चुनाव कराने का निर्देश दिया। अब विश्वविद्यालय को इस समय-सीमा के भीतर चुनाव की पूरी प्रक्रिया संपन्न करनी होगी।

2017 के बाद से चुनाव नहीं होने का मुद्दा

मध्य प्रदेश के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में छात्रसंघ चुनाव लंबे समय से बंद रहे हैं। विभिन्न रिपोर्टों और याचिकाओं के अनुसार, प्रदेश में आखिरी बार 2017 में छात्रसंघ चुनाव कराए गए थे।

इसके बाद कई विद्यार्थी अपनी पढ़ाई पूरी कर चुके हैं, लेकिन उन्हें अपने कॉलेज या विश्वविद्यालय में छात्र प्रतिनिधि चुनने का अवसर नहीं मिला। छात्र संगठनों का कहना है कि चुनाव नहीं होने से विद्यार्थियों की संस्थागत भागीदारी प्रभावित होती है।

छात्रसंघ के निर्वाचित प्रतिनिधि विद्यार्थियों की समस्याओं और मांगों को विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने उठाने में भूमिका निभाते हैं। इनमें शैक्षणिक सुविधाएं, परीक्षा, छात्रावास, परिवहन, पुस्तकालय और परिसर से जुड़ी व्यवस्थाएं शामिल हो सकती हैं।

छात्रसंघ चुनाव क्यों महत्वपूर्ण माने जाते हैं?

छात्रसंघ चुनाव विद्यार्थियों को अपने प्रतिनिधि चुनने का अवसर देते हैं। इसके माध्यम से छात्र अपने कॉलेज या विश्वविद्यालय में लोकतांत्रिक प्रक्रिया का अनुभव प्राप्त करते हैं।

छात्र प्रतिनिधि विद्यार्थियों और प्रशासन के बीच संवाद का माध्यम बन सकते हैं। वे छात्रों की समस्याओं को संगठित तरीके से सामने रखने, प्रशासन से चर्चा करने और समाधान की मांग करने में मदद करते हैं।

चुनाव के जरिए विद्यार्थियों को नेतृत्व, सार्वजनिक संवाद और जिम्मेदारी निभाने का अवसर भी मिलता है। इसी कारण छात्र संगठनों ने लंबे समय से चुनाव बहाल कराने की मांग की है।

लिंगदोह समिति की सिफारिशों का भी है महत्व

छात्रसंघ चुनावों को लेकर लिंगदोह समिति की सिफारिशें अक्सर चर्चा में रहती हैं। समिति ने छात्रसंघ चुनावों को व्यवस्थित और निष्पक्ष बनाने के लिए कई दिशा-निर्देश दिए थे।

इन सिफारिशों में चुनाव प्रक्रिया, उम्मीदवारों की पात्रता, खर्च और चुनावी आचरण जैसे विषय शामिल हैं। छात्रसंघ चुनाव कराने की मांग करने वाले याचिकाकर्ताओं ने भी इन दिशानिर्देशों के अनुसार चुनाव कराने की बात उठाई है।

मध्य प्रदेश में चुनाव बहाल करने की मांग के साथ यह मुद्दा भी जुड़ा रहा है कि चुनाव केवल एक बार आयोजित न हों, बल्कि नियमित रूप से कराए जाएं।

अब विश्वविद्यालय प्रशासन की अगली कार्रवाई पर नजर

हाईकोर्ट के निर्देश के बाद अब DAVV प्रशासन को चुनाव की तैयारी करनी होगी। इसमें चुनाव कार्यक्रम तय करना, पात्र मतदाताओं की सूची तैयार करना, उम्मीदवारों के लिए नियम स्पष्ट करना और मतदान की व्यवस्था करना शामिल हो सकता है।

विश्वविद्यालय को निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूरी प्रक्रिया संपन्न करनी होगी। चुनाव की तारीख और अन्य विवरण सामने आने के बाद विद्यार्थियों को यह स्पष्ट होगा कि नामांकन, प्रचार और मतदान कब होंगे।

छात्र संगठनों की नजर अब विश्वविद्यालय प्रशासन की घोषणा पर रहेगी। लंबे समय से चुनाव की मांग कर रहे विद्यार्थियों के लिए अदालत का आदेश एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

क्या मध्य प्रदेश के सभी कॉलेजों में चुनाव होंगे?

ताजा आदेश विशेष रूप से DAVV में छात्रसंघ चुनाव कराने से जुड़ा है। इससे पहले हाईकोर्ट की प्रधानपीठ ने प्रदेश के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में चुनाव कराने के निर्देश दिए थे।

DAVV के मामले में 75 दिनों की समय-सीमा तय किए जाने से विश्वविद्यालय में चुनाव कराने की जिम्मेदारी स्पष्ट हुई है। हालांकि, प्रदेश के अन्य संस्थानों में चुनाव की स्थिति और कार्यक्रम संबंधित आदेशों तथा प्रशासनिक कार्रवाई पर निर्भर करेंगे।

इसलिए यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि सभी कॉलेजों में एक ही तारीख पर चुनाव होंगे। फिलहाल DAVV के लिए अदालत का निर्देश स्पष्ट है कि निर्धारित समय में चुनाव संपन्न कराए जाएं।

विद्यार्थियों को प्रतिनिधि चुनने का मिल सकता है अवसर

हाईकोर्ट के आदेश से DAVV के विद्यार्थियों को अपने प्रतिनिधि चुनने का अवसर मिलने की उम्मीद बढ़ी है। यदि विश्वविद्यालय प्रशासन समय-सीमा के भीतर चुनाव कराता है, तो परिसर में छात्र राजनीति और प्रतिनिधित्व की प्रक्रिया फिर सक्रिय हो सकती है।

अब सबसे अहम सवाल यह है कि विश्वविद्यालय चुनाव कार्यक्रम कब जारी करता है और निर्धारित 75 दिनों में सभी औपचारिकताएं किस तरह पूरी की जाती हैं।

अदालत के निर्देश ने चुनाव कराने की समय-सीमा तय कर दी है। आगे की स्थिति विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्रवाई और चुनाव प्रक्रिया की घोषणा से स्पष्ट होगी।

FAQ

1. DAVV में छात्रसंघ चुनाव कराने के लिए हाईकोर्ट ने क्या आदेश दिया है?
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने DAVV प्रशासन को 75 दिनों के भीतर छात्रसंघ चुनाव संपन्न कराने के निर्देश दिए हैं।

2. यह आदेश कब दिया गया?
यह आदेश 5 नवंबर 2026 को न्यायमूर्ति पवन कुमार द्विवेदी की एकलपीठ ने पारित किया।

3. DAVV में चुनाव नहीं होने का मामला हाईकोर्ट क्यों पहुंचा?
पहले प्रदेश के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में चुनाव कराने के निर्देश दिए गए थे। DAVV में चुनाव नहीं होने पर अरुणेश मिश्रा ने अवमानना याचिका दायर की।

4. मध्य प्रदेश में आखिरी बार छात्रसंघ चुनाव कब हुए थे?
रिपोर्टों और याचिकाओं के अनुसार, प्रदेश में आखिरी बार 2017 में छात्रसंघ चुनाव हुए थे।

5. क्या चुनाव की तारीख घोषित हो गई है?
हाईकोर्ट ने 75 दिनों के भीतर चुनाव कराने का निर्देश दिया है। चुनाव की सटीक तारीख और कार्यक्रम विश्वविद्यालय प्रशासन की घोषणा के बाद स्पष्ट होंगे।

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