भारत के नए कानून से ऐपल पर 3 लाख 20 हज़ार करोड़ रुपये का खतरा, पूरी जांच कहानी चौंकाने वाली

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भारत में टेक इंडस्ट्री से जुड़ा नया प्रतिस्पर्धा कानून अब बड़ी कंपनियों पर कड़ी नजर रखने लगा है, और इसी निगरानी के केंद्र में है दुनिया की दिग्गज टेक कंपनी — ऐपल। रिपोर्टों के अनुसार, भारत सरकार द्वारा लागू किए गए नए कानून और हाल ही में शुरू हुई जांच की वजह से ऐपल पर लगभग 3 लाख 20 हज़ार करोड़ रुपये (यानी 38 बिलियन अमेरिकी डॉलर) तक की पेनाल्टी का खतरा मंडरा रहा है। यह मामला जितना बड़ा है, उतना ही चौंकाने वाला भी, क्योंकि पहली बार किसी टेक कंपनी पर भारत में इतना भारी जुर्माना लग सकता है।

क्या है पूरा मामला?

भारत में हाल ही में डिजिटल मार्केट्स के लिए नया प्रतिस्पर्धा कानून (Digital Competition Bill) लागू किया गया है, जिसका उद्देश्य बड़ी टेक कंपनियों के ‘एकाधिकार’ को रोकना है। यह कानून उन कंपनियों पर सख्त होता है जिनका यूज़र बेस करोड़ों में होता है और जो डिजिटल मार्केट के बड़े हिस्से पर कब्ज़ा रखती हैं।

ऐपल इसी श्रेणी में आती है क्योंकि वह न सिर्फ प्रीमियम मोबाइल मार्केट में एक बड़ी कंपनी है बल्कि उसका ऐप स्टोर भारतीय डेवलपर्स की कमाई को भी काफी प्रभावित करता है।

आखिर जांच क्यों?

भारत की प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) को ऐपल के खिलाफ कई शिकायतें मिली हैं। शिकायतों के अनुसार—

  • ऐपल अपने App Store पर आने वाले ऐप्स से 15% से लेकर 30% तक कमीशन लेता है।

  • कोई भी ऐप ऐप स्टोर के बाहर से डाउनलोड नहीं किया जा सकता।

  • भुगतान सिस्टम के लिए भी ऐपल अपने ही इन-ऐप पर्चेज सिस्टम को अनिवार्य करता है।

इन आरोपों का मतलब है कि ऐपल भारतीय डेवलपर्स को विकल्प नहीं देता, और बाजार में अपनी पकड़ बनाए रखने के लिए प्रतिबंधात्मक नीतियां अपनाता है।

CCI इसे प्रतिस्पर्धा विरोधी व्यवहार (Anti-competitive Practices) मानती है।

इतना बड़ा जुर्माना क्यों लग सकता है?

नए कानून के अनुसार, यदि किसी कंपनी को दोषी पाया गया तो उस पर उसकी ग्लोबल टर्नओवर का 10% तक जुर्माना लगाया जा सकता है।

अब ऐपल की वार्षिक ग्लोबल कमाई लगभग $380 बिलियन है।
इसका 10% = $38 बिलियन (भारतीय रुपये में लगभग 3.2 लाख करोड़)।

यही वजह है कि यह जांच ऐपल के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती बन गई है।

भारत में ऐपल की स्थिति पर क्या असर पड़ेगा?

अगर ऐपल को दोषी पाया गया और पेनाल्टी व वॉर्निंग्स लागू हुईं, तो:

  • ऐप स्टोर की नीतियों में भारी बदलाव करने पड़ सकते हैं।

  • भारत डेवलपर्स को अधिक स्वतंत्रता मिल सकती है।

  • ऐपल को वैकल्पिक ऐप मार्केट या साइडलोडिंग की अनुमति देनी पड़ सकती है।

  • इन-ऐप पेमेंट सिस्टम पर ऐपल का नियंत्रण कम हो सकता है।

यह स्थिति भारत में ऐपल के पूरे इकोसिस्टम को बदल सकती है।

क्या कहा ऐपल ने?

ऐपल ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए कहा है कि:

  • उनकी नीतियां यूज़र सेफ्टी के लिए हैं।

  • ऐप स्टोर को सुरक्षित और मैलवेयर से मुक्त रखना उनकी प्राथमिकता है।

  • किसी भी नियम को कमज़ोर करने से सुरक्षा जोखिम बढ़ेगा।

ऐपल का यह भी दावा है कि डेवलपर्स को ऐप स्टोर के जरिए अच्छा प्लेटफॉर्म मिलता है और वह खुद भी भारतीय बाजार में निवेश बढ़ा रहा है।

भारत में क्यों बढ़ रही है जांच की रफ्तार?

भारत सरकार डिजिटल दुनिया में लेवल प्लेइंग फिल्ड बनाने के लिए इन कंपनियों से स्पष्ट जवाब चाहती है।
गूगल, मेटा और अमेज़न जैसी कंपनियों पर भी पहले कार्रवाई हो चुकी है।

ऐपल के खिलाफ चल रही जांच अब भारत के टेक उद्योग की सबसे बड़ी एंटी-ट्रस्ट जांच में से एक बन गई है।

आगे क्या हो सकता है?

आने वाले महीनों में तीन संभावनाएं हो सकती हैं:

  1. ऐपल को नियम बदलने पड़ें — जैसे यूरोप में हुआ।

  2. भारी जुर्माना लग सकता है — यह विश्व का सबसे बड़ा जुर्माना होगा।

  3. ऐपल कानूनी मुकाबला कर सकता है — जो महीनों या सालों तक खिंच सकता है।

भारत फिलहाल इस मामले को लेकर बेहद गंभीर है और सरकार किसी भी कंपनी को बाजार पर अत्यधिक नियंत्रण रखने की अनुमति नहीं देना चाहती।

निष्कर्ष

भारत के नए डिजिटल प्रतिस्पर्धा कानून ने टेक कंपनियों के लिए नई चुनौती खड़ी कर दी है। ऐपल पर 3.2 लाख करोड़ रुपये का संभावित जुर्माना सिर्फ एक नंबर नहीं, बल्कि यह संदेश है कि भारत अब डिजिटल मार्केट में पारदर्शिता और समान अवसर चाहता है।

इस जांच का अंतिम फैसला भारत के डिजिटल भविष्य और ऐपल जैसी बड़ी कंपनियों की रणनीति, दोनों को बदल सकता है।

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