अविमुक्तेश्वरानंद मामला: दो पीड़ित, दो बाबा आमने-सामने और जांच की दिशा—क्या है पूरा अपडेट?

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धार्मिक जगत में चर्चित संत अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े मामले ने नया मोड़ ले लिया है। इस प्रकरण में नाबालिगों से जुड़े आरोपों की चर्चा के बीच अब कई सवाल खड़े हो रहे हैं—कौन हैं पीड़ित? आरोप क्या हैं? जांच कौन करेगा? और दो साधु आमने-सामने क्यों हैं?


कौन हैं दो पीड़ित?

मामले में 14 और 17 वर्ष की दो किशोरियों का जिक्र सामने आया है। दोनों कथित तौर पर धार्मिक गतिविधियों से जुड़े परिवेश में थीं। आरोप है कि उनके साथ अनुचित व्यवहार हुआ। हालांकि, पुलिस जांच पूरी होने तक आधिकारिक तौर पर आरोप सिद्ध नहीं माने जा सकते।

परिजनों की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया गया है। नाबालिग होने के कारण पहचान गोपनीय रखी गई है।


क्या हैं मुख्य आरोप?

शिकायत में कथित दुराचार और अनुचित आचरण के आरोप लगाए गए हैं। आरोपों के तहत संबंधित धाराओं में केस दर्ज किया गया है।

पुलिस सूत्रों के अनुसार:

  • पीड़ितों के बयान दर्ज किए गए हैं

  • मेडिकल जांच की प्रक्रिया अपनाई गई है

  • इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य और अन्य सबूत जुटाए जा रहे हैं

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जांच सावधानीपूर्वक की जा रही है।


जांच कौन करेगा?

जांच की जिम्मेदारी स्थानीय पुलिस और वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में है। इस पूरे मामले पर संबंधित जिले के पुलिस अधीक्षक अजय शर्मा नजर रखे हुए हैं।

जरूरत पड़ने पर विशेष जांच दल (SIT) गठित किए जाने की भी चर्चा है, ताकि निष्पक्ष और पारदर्शी जांच सुनिश्चित की जा सके।


दो बाबा आमने-सामने क्यों?

इस विवाद में एक अन्य साधु ने खुलकर आरोप लगाए हैं, जिससे धार्मिक जगत में मतभेद उभरकर सामने आए हैं। दोनों संतों के समर्थक अलग-अलग पक्ष में बयान दे रहे हैं।

एक पक्ष इसे साजिश करार दे रहा है, जबकि दूसरा पक्ष निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है। यही वजह है कि मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि धार्मिक और सामाजिक बहस का विषय भी बन गया है।


आगे क्या?

  • पीड़ितों के विस्तृत बयान दर्ज होंगे

  • फॉरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार

  • आरोपित से पूछताछ

  • जरूरत पड़ने पर गिरफ्तारी की कार्रवाई

कानूनी प्रक्रिया के तहत ही अगला कदम उठाया जाएगा। फिलहाल जांच जारी है और अंतिम निष्कर्ष अभी बाकी है।


निष्कर्ष

अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़ा यह मामला कई स्तरों पर चर्चा में है—कानूनी, धार्मिक और सामाजिक। दो नाबालिग पीड़ितों के आरोप, पुलिस की जांच और दो संतों के बीच टकराव ने इसे जटिल बना दिया है।

अब सभी की नजर जांच के निष्कर्ष पर है, जिससे सच्चाई सामने आ सके।

 

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