बांदा में दहेज के लिए पति का उत्पीड़न: ‘दांत अच्छे नहीं, यहां से भागो’ कह कर पत्नी को तड़पाता रहा मैनेजर, 4 के खिलाफ FIR

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उत्तर प्रदेश के बांदा जिले से दहेज उत्पीड़न का एक बेहद परेशान करने वाला मामला सामने आया है। यहां एक महिला ने अपने पति और ससुराल पक्ष पर शारीरिक, मानसिक और आर्थिक प्रताड़ना का गंभीर आरोप लगाया है। महिला का कहना है कि शादी के कुछ समय बाद से ही उसके पति ने उस पर तरह-तरह के ताने कसने शुरू कर दिए, मारपीट की, अपमान किया और दहेज में महंगी गाड़ी की मांग की। इतना ही नहीं, पति ने उसे उसके शारीरिक रूप पर टिप्पणियां करके भी नीचा दिखाया। इस पूरे मामले में पति सहित कुल चार लोगों के खिलाफ पुलिस ने FIR दर्ज कर ली है।


शादी के बाद बदल गया पति का व्यवहार

पीड़िता के अनुसार शुरुआत में सब कुछ सामान्य था लेकिन शादी के कुछ महीने बाद ही पति और उसके परिवार का रवैया पूरी तरह बदलने लगा। महिला ने बताया कि उसका पति, जो कि एक मैनेजर के पद पर तैनात है, अक्सर उसके दांतों का मजाक उड़ाता था। वह उसे ताने मारता—“तेरे दांत अच्छे नहीं हैं, यहां से भाग जाओ, नहीं तो अच्छा नहीं होगा।” यह सुनकर महिला गहरे मानसिक तनाव में चली जाती थी। दहेज में कार न मिलने का आरोप लगाते हुए पति और घरवालों ने उसे कई बार प्रताड़ित किया।


स्कॉर्पियो की मांग को लेकर बढ़ता तनाव

महिला ने अपनी शिकायत में बताया कि उसके पति और ससुराल पक्ष की मुख्य मांग एक महंगी स्कॉर्पियो कार थी। जब उसने बताया कि उसके मायके वाले इतनी बड़ी रकम नहीं जुटा सकते, तो उत्पीड़न और बढ़ गया। पति ने न केवल उसे खाना देने से मना किया बल्कि कई बार धक्का देकर घर से निकालने की कोशिश भी की।

हर बार महिला किसी तरह मायके वालों से मदद मांगकर वापस ससुराल जाती, उम्मीद करती कि हालात सुधरेंगे, लेकिन उसकी स्थिति और बिगड़ती चली गई।


शारीरिक और मानसिक हिंसा के आरोप

महिला ने अपनी FIR में आरोप लगाया कि पति उसे अक्सर पीटता था और मामूली बातों पर भी गाली-गलौज करता था। कभी उसके रंग-रूप पर तंज कसता, कभी घर के काम-काज को लेकर अपमानित करता। पीड़िता के अनुसार, पति और ससुराल पक्ष बार-बार दहेज की मांग पूरी न होने पर उसे प्रताड़ित करते थे। महिला ने यह भी आरोप लगाया कि एक दिन पति ने उसे धमकाया—“दहेज नहीं मिला, तो तुम्हें यहां रहने का कोई हक नहीं है, भाग जाओ।”


ससुराल पक्ष के तीन अन्य सदस्य भी शक के घेरे में

पीड़िता ने पुलिस को बताया कि पति के अलावा उसकी सास, ननद और देवर भी उत्पीड़न में शामिल थे। सभी मांग कर रहे थे कि दहेज में स्कॉर्पियो कार दिलाई जाए। महिला का आरोप है कि इन सभी की मौजूदगी में उसके साथ दुर्व्यवहार, अपमान और हिंसा की घटनाएं बार-बार होती रहीं।

महिला का कहना है कि जब उत्पीड़न की हद पार हो गई, तो उसने मामले की रिपोर्ट दर्ज कराने का फैसला किया।


पुलिस ने 4 आरोपियों पर दर्ज की FIR

शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस ने पति समेत चार लोगों के खिलाफ दहेज प्रताड़ना, धमकी, शारीरिक हिंसा और मानसिक उत्पीड़न से जुड़े धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। स्थानीय पुलिस के अनुसार, महिला की मेडिकल रिपोर्ट भी तैयार कराई गई है और तफ्तीश जारी है।

पुलिस का कहना है कि आरोप गंभीर हैं, और सभी बिंदुओं पर निष्पक्ष जांच की जाएगी। साथ ही, पीड़िता को सुरक्षा और कानूनी सहायता भी उपलब्ध कराई जा रही है।


दहेज प्रथा—आज भी समाज के लिए कलंक

बांदा का यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि आधुनिक समाज और बढ़ती शिक्षा के बावजूद दहेज प्रथा की जड़ें कितनी गहरी हैं। कानूनी प्रावधान मजबूत होने के बाद भी कई परिवारों में बेटियों से दहेज लेकर ही उनका सम्मान तय किया जाता है। शादी के बाद भी महिलाओं को दहेज के नाम पर यातनाएं झेलनी पड़ती हैं।

दहेज प्रथा के कारण:

  • महिलाओं को घरेलू हिंसा का सामना करना पड़ता है

  • आर्थिक बोझ से परिवार टूट जाते हैं

  • विवाह सामाजिक दबाव का कारण बन जाता है

  • कई बार उत्पीड़न मृत्यु तक पहुंच जाता है


कानून क्या कहता है?

भारत में दहेज मांगना, देना या लेना—तीनों ही दहेज निषेध अधिनियम, 1961 के तहत अपराध है। इसके अलावा IPC की धारा 498A के तहत पति या ससुराल पक्ष द्वारा किसी भी प्रकार की प्रताड़ना, हिंसा या दहेज मांगना दंडनीय अपराध माना जाता है।

यदि दहेज उत्पीड़न साबित हो जाए, तो:

  • आरोपियों को 3 से 7 साल तक की सजा

  • साथ में भारी जुर्माना

  • महिला को संरक्षण और सहायता

जैसी कानूनी कार्यवाही हो सकती है।


पीड़िता की आगे की लड़ाई

महिला का कहना है कि उसने काफी सहा है, और अब वह न्याय चाहती है। समाज के डर या परिवार की मजबूरी के कारण जो महिलाएं चुप रहती हैं, उनके लिए यह मामला एक मिसाल है कि अपनी सुरक्षा और सम्मान के लिए आवाज उठाना कितना जरूरी है।

पुलिस मामले की गहन जांच कर रही है और उम्मीद है कि दोषियों के खिलाफ जल्द सख्त कदम उठाए जाएंगे।


निष्कर्ष

बांदा का यह मामला सिर्फ एक परिवार की कहानी नहीं है, बल्कि उन हजारों महिलाओं की वास्तविकता है, जो दहेज की वजह से प्रताड़ना झेल रही हैं। एक मैनेजर पति द्वारा अपनी पत्नी को उसके रूप-रंग और दहेज की कमी के कारण अपमानित करना हमारे समाज में मौजूद विकृत सोच को दर्शाता है।

दहेज के खिलाफ कानून होने के बावजूद, यह प्रथा आज भी जिंदा है और महिलाओं की जिंदगी बर्बाद कर रही है। ऐसे मामलों में समाज, परिवार और प्रशासन को मिलकर कड़े कदम उठाने होंगे, तभी बदलाव संभव है।

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