बिहार में JDU पर भारी पड़ी बीजेपी! नंबर गेम के बाद बड़े मंत्रालयों पर भी कब्ज़ा

1

बिहार की राजनीति में एक बार फिर बड़ा बदलाव देखने को मिला है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के ऐतिहासिक 10वीं बार शपथ लेने के लगभग 30 घंटे के अंदर ही नया राजनीतिक समीकरण पूरी तरह साफ हो गया है। यह साफ दिख रहा है कि इस बार एनडीए सरकार में सबसे बड़ा पॉवर सेंटर बीजेपी ही है। मंत्री पदों के नंबर गेम में भले ही जेडीयू और बीजेपी के बीच एक संतुलन दिखाने की कोशिश की गई हो, लेकिन असल ताक़त उन मंत्रालयों में झलकती है जो सरकार चलाने का असली आधार होते हैं—और इन पर कब्ज़ा है बीजेपी का।

जहाँ पिछले कई कार्यकालों में नीतीश कुमार के नेतृत्व में ज़्यादातर बड़े मंत्रालय जेडीयू के पास रहा करते थे, वहीं इस बार हालात उलट गए हैं। बीजेपी ने न केवल मंत्रालयों का बेहतर हिस्सा प्राप्त किया है, बल्कि पुलिस, प्रशासन, वित्तीय नियंत्रण, कानून-व्यवस्था और योजनाओं के क्रियान्वयन जैसे प्रमुख क्षेत्रों का भार भी अपने पास सुरक्षित कर लिया है। इससे स्पष्ट होता है कि आने वाले समय में बिहार की राजनीति में बीजेपी का प्रभाव कहीं अधिक गहरा और निर्णायक होने वाला है।


कैबिनेट के गठन के बाद बदला राजनीतिक समीकरण

शपथ ग्रहण से पहले यह अनुमान था कि दोनों दल पुराने अनुभव के आधार पर मंत्रालयों का बँटवारा करेंगे। लेकिन शपथ के बाद जब वास्तविक विभाग वितरण हुआ, तब तस्वीर बिल्कुल अलग सामने आई।
बीजेपी ने न केवल मंत्रियों की संख्या में बढ़त बनाए रखी, बल्कि संवेदनशील और प्रभावशाली मंत्रालय भी अपने पास कर लिए

इन्हीं मंत्रालयों की वजह से यह कहा जा रहा है कि बिहार सरकार में असली नियंत्रण अब बीजेपी के पास है।


1. गृह मंत्रालय पर बीजेपी का कब्ज़ा – संकेत बहुत बड़े हैं

बिहार की राजनीति में गृह मंत्रालय हमेशा सबसे अहम माना जाता है।
यह विभाग

  • कानून-व्यवस्था

  • पुलिस प्रशासन

  • सुरक्षा प्रणाली

  • खुफिया एजेंसियों के कामकाज
    जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं को नियंत्रित करता है।

इस बार गृह मंत्रालय बीजेपी के नेता सम्राट चौधरी के पास आ गया है।
यह फैसला अपने आप में कई राजनीतिक संदेश दे रहा है:

  • बीजेपी अब सीधे बिहार की कानून-व्यवस्था को नियंत्रित करेगी।

  • राज्य में होने वाले किसी भी बड़े अभियान का नेतृत्व बीजेपी का होगा।

  • जेडीयू की तुलना में बीजेपी की पकड़ और मजबूत हो जाएगी।

नीतीश कुमार की सरकार में यह पहला मौका है जब गृह विभाग पूरी तरह बीजेपी को सौंपा गया है।


2. वित्त, ग्रामीण विकास, स्वास्थ्य जैसे बड़े विभागों में भी बीजेपी की स्थिति मज़बूत

कहा जा रहा है कि

  • वित्त

  • पंचायत राज

  • ग्रामीण विकास

  • शिक्षा

  • स्वास्थ्य

जैसे विभागों को लेकर बीजेपी ने भारी प्रभाव दिखाया है।
इन मंत्रालयों में बजट, स्कीम और आम जनता से जुड़ी योजनाओं का सबसे बड़ा हिस्सा रहता है।

इस कदम का मतलब है कि राज्य की आर्थिक दिशा, ग्रामीण विकास और सामाजिक कल्याण से जुड़ी नीतियाँ अब बीजेपी की प्राथमिकताओं को अधिक प्रतिबिंबित करेंगी।


3. जेडीयू को मिले विभाग महत्वपूर्ण तो हैं, लेकिन “निर्णायक नियंत्रण” नहीं

जेडीयू के पास कुछ ऐसे विभाग दिए गए हैं जहाँ काम तो बहुत अधिक है, लेकिन निर्णयात्मक ताक़त सीमित है।
उदाहरण के लिए

  • लघु उद्योग

  • सिंचाई विभाग

  • समाज कल्याण

  • परिवहन
    इत्यादि।

ये विभाग राज्य के विकास से जुड़े जरूर हैं, लेकिन इनसे बड़ी राजनीतिक पकड़ हासिल करना मुश्किल होता है।

यह साफ दिखता है कि जेडीयू को सरकार में सम्मानजनक जगह जरूर दी गई है, लेकिन नियंत्रण की असली चाबी बीजेपी के पास रखी गई है।


4. डिप्टी सीएम मॉडल का समझदारी से उपयोग

इस सरकार में दो डिप्टी सीएम—सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा—ने पार्टी के भीतर और बाहर एक बड़ा संतुलन बना दिया है।
यह मॉडल बीजेपी को बिहार में

  • प्रशासनिक

  • राजनीतिक

  • संगठनात्मक
    तीनों स्तरों पर मजबूत बनाता है।

सम्राट चौधरी गृह विभाग के साथ राज्य की सबसे अहम कुर्सी पर बैठे हैं, जबकि विजय सिन्हा संगठन और राजनीतिक रणनीति दोनों की निगरानी कर रहे हैं।

नीतीश कुमार के लिए यह मॉडल उपयुक्त इसलिए है क्योंकि इससे कोई भी एक नेता बहुत अधिक शक्तिशाली नहीं बनता।


5. नीतीश कुमार की रणनीति—सत्ता में रहकर जोखिम कम करना

बिहार की राजनीति में नीतीश कुमार की शैली हमेशा अलग रही है।
वे सत्ता में रहते हुए परिस्थितियों को समझते हुए फैसले लेते रहे हैं।
इस बार भी उन्होंने

  • भाजपा को अधिक शक्ति देकर

  • खुद की कुर्सी सुरक्षित कर

  • विपक्ष के दबाव से बचकर
    एक व्यावहारिक फैसला लिया है।

हालाँकि, इससे जेडीयू भविष्य में कमजोर स्थिति में आ सकती है, लेकिन फिलहाल नीतीश कुमार ने सत्ता को प्राथमिकता दी है।


6. बीजेपी के लिए यह सुनहरा मौका

बीजेपी लंबे समय से बिहार में अपनी जड़ें मजबूत करने की कोशिश करती रही है।
इस बार:

  • विभाग भी बड़े

  • रणनीति भी सटीक

  • संगठन भी मजबूत

  • नेतृत्व भी आक्रामक

ऐसे में पार्टी राज्य में दीर्घकालिक प्रभाव छोड़ने के लिए तैयार दिख रही है।

यह भी कहा जा रहा है कि यह शुरुआत है, आगे और भी विभाग और नियुक्तियाँ बीजेपी के प्रभाव में होंगी।


7. विपक्ष की प्रतिक्रिया—“नीतीश ने पार्टी को कमजोर किया”

आरजेडी समेत विपक्ष का आरोप है कि

  • नीतीश कुमार ने दबाव में भाजपा को बड़ी भूमिका दे दी है

  • जेडीयू धीरे-धीरे एक “छोटी पार्टी” बन जाएगी

  • नीतीश की मजबूरी है कि वे भाजपा की हर बात मान रहे हैं

विपक्ष इस बात को भी मुद्दा बना रहा है कि
सीटों की संख्या कम होने के बावजूद बीजेपी ने सत्ता का सबसे बड़ा हिस्सा ले लिया है।


8. जनता की नज़र—विकास होगा या यह राजनीतिक खेल?

बिहार की जनता इस नए समीकरण को मिश्रित दृष्टि से देख रही है।

कुछ लोगों की राय है कि

  • बीजेपी के नियंत्रण से प्रशासन बेहतर होगा

  • अपराध पर अंकुश लग सकता है

  • योजनाएँ ज्यादा तेज़ी से आगे बढ़ेंगी

वहीं कुछ लोगों का मानना है कि

  • जेडीयू की पकड़ कमजोर होगी

  • नीतीश की स्थिरता पर असर पड़ेगा

  • भविष्य में गठबंधन टूट सकता है

लोकतंत्र में इन दोनों तरह की प्रतिक्रियाओं का होना सामान्य है, लेकिन निर्णयकारी बात आने वाले महीनों में सरकारी कामकाज की गुणवत्ता होगी।


निष्कर्ष

बिहार की नई एनडीए सरकार में मंत्रालयों का बंटवारा यह साफ संकेत दे रहा है कि बीजेपी अब बिहार सरकार में सबसे अधिक शक्तिशाली घटक बन चुकी है
जेडीयू सत्ता में तो है, लेकिन राजनीतिक और प्रशासनिक नियंत्रण काफी हद तक बीजेपी के हाथों में चला गया है।

सम्राट चौधरी जैसे नेताओं को महत्वपूर्ण मंत्रालय मिलने का अर्थ है कि आने वाले दिनों में बिहार की कानून-व्यवस्था, वित्त और विकास योजनाओं पर बीजेपी की छाप और भी स्पष्ट होगी।

यह नया समीकरण भविष्य में बिहार की राजनीति को पूरी तरह पुनर्परिभाषित कर सकता है।

Share it :

End