
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण की वोटिंग अब पूरी तरह समाप्त हो चुकी है। चुनाव आयोग (ECI) ने शुक्रवार को आधिकारिक बयान जारी करते हुए बताया कि पहले चरण की वोटिंग शांतिपूर्ण और पारदर्शी माहौल में संपन्न हुई। खास बात यह रही कि किसी भी राजनीतिक दल ने मतदान प्रक्रिया को लेकर किसी तरह की अनियमितता या गड़बड़ी की शिकायत नहीं की है।
इस चरण में राज्य के 18 जिलों की 121 विधानसभा सीटों पर मतदान हुआ। आयोग ने इसे लोकतंत्र के लिए “उत्सव और विश्वास का प्रतीक” बताया।
शांति और पारदर्शिता के बीच संपन्न हुआ मतदान
मुख्य निर्वाचन अधिकारी एच. आर. श्रीनिवास ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा,
“पहले चरण की वोटिंग पूरी तरह शांतिपूर्ण रही। कहीं से किसी हिंसक घटना या ईवीएम गड़बड़ी की बड़ी रिपोर्ट नहीं आई है। सबसे अहम बात यह है कि किसी भी राजनीतिक दल या उम्मीदवार ने औपचारिक रूप से किसी प्रकार की गड़बड़ी की शिकायत नहीं की है।”
चुनाव आयोग ने मतदान केंद्रों पर वीडियो रिकॉर्डिंग, सीसीटीवी मॉनिटरिंग और सख्त सुरक्षा व्यवस्था लागू की थी। इस कारण मतदान प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रही।
64.66% रही मतदान प्रतिशतता
पहले चरण में 64.66% वोटिंग दर्ज की गई, जो 2015 और 2020 दोनों चुनावों की तुलना में अधिक है। महिलाओं की भागीदारी विशेष रूप से उल्लेखनीय रही, जिन्होंने कई जिलों में पुरुषों से अधिक वोट डाले।
नालंदा, औरंगाबाद, गया, भागलपुर, नवादा और मुजफ्फरपुर जिलों में लोगों में खासा उत्साह देखा गया।
ईवीएम और वीवीपैट से जुड़ी शिकायतें
चुनाव आयोग ने बताया कि पूरे चरण में कुछ मतदान केंद्रों पर ईवीएम मशीनों में तकनीकी खामियों की शिकायतें आई थीं, लेकिन वे बहुत मामूली थीं। कुल मिलाकर 0.3% मशीनें तकनीकी समस्या के कारण बदली गईं।
मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा,
“हमने हर मतदान केंद्र पर पर्याप्त रिजर्व मशीनें भेजी थीं। इसलिए मतदान प्रक्रिया में किसी तरह की रुकावट नहीं आई।”
सुरक्षा बलों की तैनाती और निगरानी
पहले चरण में 80,000 से अधिक सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए थे। साथ ही, हर संवेदनशील और अति-संवेदनशील मतदान केंद्र पर सेंट्रल पैरामिलिट्री फोर्सेस (CAPF) की उपस्थिति सुनिश्चित की गई।
ड्रोन और हेलीकॉप्टर से भी निगरानी रखी गई ताकि किसी अप्रिय स्थिति को समय रहते नियंत्रित किया जा सके।
विशेष ध्यान नक्सल प्रभावित इलाकों पर
गया, औरंगाबाद, जमुई, कैमूर और नवादा जैसे जिलों में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में वोटिंग के दौरान सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया गया।
इन क्षेत्रों में मतदान सुबह 7 बजे से दोपहर 4 बजे तक सीमित था, जबकि अन्य इलाकों में मतदान शाम 5 बजे तक चला।
नक्सल इलाकों में भी मतदान शांतिपूर्ण रहा और किसी भी बड़ी हिंसक घटना की सूचना नहीं मिली।
सभी दलों ने सराहा आयोग की तैयारी
एनडीए, महागठबंधन और जन सुराज जैसे प्रमुख दलों के प्रतिनिधियों ने चुनाव आयोग की व्यवस्थाओं की सराहना की।
आरजेडी प्रवक्ता ने कहा कि “इस बार वोटिंग में प्रशासन की निष्पक्षता दिखाई दी,” जबकि भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि “ईसीआई ने शानदार प्रबंधन किया है, जिससे मतदाता निडर होकर वोट डाल सके।”
महिला मतदाताओं की उत्साही भागीदारी
आयोग की रिपोर्ट में कहा गया कि महिलाओं ने बड़ी संख्या में मतदान किया।
नालंदा जिले में महिला वोटिंग प्रतिशत 68%, जबकि गया में 66% रहा।
इसके अलावा, दिव्यांग और वरिष्ठ नागरिक मतदाताओं के लिए भी विशेष सुविधा की व्यवस्था की गई थी, जिसमें व्हीलचेयर और वाहन की सुविधा शामिल थी।
सोशल मीडिया और डिजिटल निगरानी
चुनाव आयोग ने पहली बार इस चरण में सोशल मीडिया मॉनिटरिंग टीम तैनात की थी ताकि फर्जी खबरों और अफवाहों पर तुरंत कार्रवाई की जा सके।
कई फर्जी पोस्ट हटाए गए और गलत सूचनाएं फैलाने वालों पर IT Act के तहत कार्रवाई की गई।
दूसरे चरण की तैयारी शुरू
चुनाव आयोग अब दूसरे चरण की वोटिंग की तैयारियों में जुट गया है, जो 12 नवंबर 2025 को होगी। इस चरण में 17 जिलों की 98 विधानसभा सीटों पर मतदान होना है।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि “पहले चरण के अनुभव से सीख लेते हुए दूसरे चरण की तैयारियां और भी मजबूत की जा रही हैं।”
निष्कर्ष
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण ने राज्य में एक लोकतांत्रिक उदाहरण पेश किया है। बिना किसी शिकायत, हिंसा या अव्यवस्था के यह चरण पूरा हुआ।
यह न केवल प्रशासन की दक्षता को दिखाता है बल्कि बिहार के मतदाताओं की लोकतंत्र में विश्वास और जागरूकता का भी प्रमाण है।
अब सबकी निगाहें दूसरे चरण पर हैं, जहां और भी बड़ी संख्या में मतदाताओं से भागीदारी की उम्मीद की जा रही है।