रोज 100 जॉब्स पर अप्लाई फिर भी नहीं आ रहा कॉल, बढ़ता ट्रेंड बना डूमजॉबिंग

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आज के प्रतिस्पर्धी जॉब मार्केट में नौकरी की तलाश कर रहे कई उम्मीदवार एक नई समस्या का सामना कर रहे हैं। वे रोजाना दर्जनों या सैकड़ों नौकरियों के लिए आवेदन कर रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें इंटरव्यू कॉल तक नहीं मिल रहा। इस स्थिति को अब डूमजॉबिंग कहा जा रहा है। यह ट्रेंड खासतौर पर युवाओं और फ्रेशर्स के बीच तेजी से बढ़ रहा है, जहां उम्मीदवार बिना रणनीति के बड़ी संख्या में आवेदन भेजते रहते हैं, लेकिन परिणाम शून्य रहता है।

डूमजॉबिंग का मतलब है लगातार बड़ी संख्या में नौकरियों के लिए आवेदन करना, लेकिन प्रत्येक आवेदन के लिए अलग तैयारी न करना। कई उम्मीदवार एक ही रिज्यूमे को कॉपी करके अलग अलग कंपनियों में भेज देते हैं। इससे उनके प्रोफाइल की प्रासंगिकता कम हो जाती है। कंपनियां ऐसे रिज्यूमे को प्राथमिकता नहीं देतीं, क्योंकि उसमें भूमिका के अनुसार बदलाव नहीं होता। परिणाम यह होता है कि उम्मीदवार को कोई प्रतिक्रिया नहीं मिलती।

जॉब पोर्टल्स और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म ने आवेदन प्रक्रिया को आसान बना दिया है। एक क्लिक में कई जगह आवेदन भेजा जा सकता है। इसी सुविधा के कारण उम्मीदवार बड़ी संख्या में आवेदन करने लगते हैं। उन्हें लगता है कि जितनी ज्यादा जगह अप्लाई करेंगे, उतनी जल्दी नौकरी मिल जाएगी। लेकिन बिना रणनीति के किया गया यह प्रयास उल्टा असर डाल सकता है। भर्ती करने वाली कंपनियां ऐसे आवेदनों को गंभीरता से नहीं लेतीं।

विशेषज्ञों का कहना है कि डूमजॉबिंग मानसिक दबाव भी बढ़ाता है। उम्मीदवार रोजाना कई आवेदन करते हैं और प्रतिक्रिया न मिलने पर निराशा बढ़ती जाती है। धीरे धीरे आत्मविश्वास कम होने लगता है। कई लोग यह मानने लगते हैं कि उनमें कमी है, जबकि समस्या आवेदन की रणनीति में होती है। इसलिए कम लेकिन सही जगह आवेदन करना ज्यादा प्रभावी माना जाता है।

डूमजॉबिंग की एक वजह यह भी है कि कई उम्मीदवार नौकरी की आवश्यकताओं को ध्यान से पढ़े बिना आवेदन कर देते हैं। वे अलग अलग भूमिकाओं के लिए एक ही रिज्यूमे भेजते हैं, जबकि हर नौकरी की जरूरत अलग होती है। कंपनियां ऐसे उम्मीदवारों को प्राथमिकता देती हैं जो भूमिका के अनुसार अपने अनुभव और कौशल को प्रस्तुत करते हैं। बिना कस्टमाइज्ड रिज्यूमे के चयन की संभावना कम हो जाती है।

भर्ती प्रक्रिया में अब एटीएस आधारित स्क्रीनिंग भी आम हो गई है। कई कंपनियां रिज्यूमे को पहले सॉफ्टवेयर से स्कैन कराती हैं। यदि रिज्यूमे में संबंधित कीवर्ड नहीं होते तो वह शुरुआती चरण में ही बाहर हो जाता है। डूमजॉबिंग करने वाले उम्मीदवार अक्सर इस पहलू पर ध्यान नहीं देते। वे एक ही रिज्यूमे को हर जगह भेजते हैं, जिससे चयन की संभावना घट जाती है।

विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि नौकरी खोजने के दौरान गुणवत्ता पर ध्यान देना चाहिए। हर आवेदन से पहले नौकरी का विवरण पढ़ना जरूरी है। उसी के अनुसार रिज्यूमे और कवर लेटर में बदलाव करना चाहिए। इससे प्रोफाइल अधिक प्रासंगिक बनता है। साथ ही, कम लेकिन सही जगह आवेदन करने से प्रतिक्रिया मिलने की संभावना बढ़ती है।

नेटवर्किंग भी नौकरी खोजने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। कई उम्मीदवार केवल ऑनलाइन आवेदन पर निर्भर रहते हैं। वे पेशेवर संपर्क बनाने या रेफरल का उपयोग नहीं करते। जबकि कई कंपनियों में रेफरल के जरिए चयन की संभावना अधिक होती है। इसलिए उम्मीदवारों को पेशेवर नेटवर्क मजबूत करने पर भी ध्यान देना चाहिए।

डूमजॉबिंग से बचने के लिए उम्मीदवारों को लक्ष्य तय करना चाहिए। हर दिन सीमित संख्या में नौकरियों के लिए आवेदन करना अधिक प्रभावी हो सकता है। साथ ही, प्रत्येक आवेदन के बाद तैयारी करना और इंटरव्यू के लिए अभ्यास करना भी जरूरी है। इससे उम्मीदवार बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं।

कुछ विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि नौकरी की तलाश के दौरान कौशल विकास पर ध्यान देना चाहिए। यदि लंबे समय तक प्रतिक्रिया नहीं मिल रही है तो नए कौशल सीखना फायदेमंद हो सकता है। इससे प्रोफाइल मजबूत होती है और चयन की संभावना बढ़ती है। ऑनलाइन कोर्स और प्रोजेक्ट अनुभव भी इसमें मदद कर सकते हैं।

उम्मीदवारों को यह भी समझना चाहिए कि भर्ती प्रक्रिया में समय लगता है। आवेदन करने के तुरंत बाद प्रतिक्रिया नहीं मिलती। इसलिए धैर्य रखना जरूरी है। लगातार बड़ी संख्या में आवेदन करने के बजाय व्यवस्थित तरीके से नौकरी की तलाश करना बेहतर होता है। इससे मानसिक दबाव भी कम रहता है।

कुल मिलाकर डूमजॉबिंग तेजी से बढ़ता ट्रेंड बन रहा है, जहां उम्मीदवार रोजाना बड़ी संख्या में आवेदन करते हैं लेकिन परिणाम नहीं मिलता। विशेषज्ञों का मानना है कि रणनीतिक और लक्षित आवेदन ही सफलता दिला सकते हैं। सही रिज्यूमे, नेटवर्किंग और कौशल विकास पर ध्यान देकर उम्मीदवार बेहतर अवसर पा सकते हैं।

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