
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के दोनों चरणों की वोटिंग पूरी हो चुकी है और अब एग्जिट पोल के नतीजे सामने आ गए हैं। नतीजों से साफ संकेत मिल रहे हैं कि राज्य में एक बार फिर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की वापसी संभव है। हालांकि, इस बार राष्ट्रीय जनता दल (RJD) सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभर रही है। राज्य की राजनीति में यह मुकाबला बेहद करीबी बताया जा रहा है, जहां गठबंधन की गणित सरकार गठन में निर्णायक भूमिका निभा सकती है।
ताज़ा सर्वेक्षणों के अनुसार, जनता दल यूनाइटेड (JDU) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाला राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) बहुमत के करीब पहुंच रहा है। वहीं, तेजस्वी यादव की पार्टी राजद (RJD) ने अकेले दम पर सबसे ज्यादा सीटें हासिल करने का दावा किया है। यह चुनाव इस मायने में खास रहा कि दोनों प्रमुख गठबंधनों के बीच बहुत ही कम अंतर से नतीजे तय होते दिख रहे हैं।
RJD सबसे बड़ी पार्टी, लेकिन सरकार NDA की बन सकती है
एग्जिट पोल्स के अनुसार, RJD को लगभग 90 से 100 सीटें मिलने का अनुमान है, जबकि JDU को 70 से 80 सीटें और बीजेपी को 55 से 65 सीटों के बीच सीटें मिल सकती हैं। कांग्रेस को लगभग 20 से 25 सीटें मिलने का अनुमान जताया गया है। इन आंकड़ों से यह स्पष्ट है कि तेजस्वी यादव की पार्टी अकेले सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरेगी, लेकिन गठबंधन के स्तर पर नीतीश कुमार का पलड़ा भारी है।
गठबंधन की राजनीति में NDA के पास सरकार बनाने का स्पष्ट मौका है, क्योंकि JDU और BJP मिलकर बहुमत के आंकड़े से आगे निकल सकते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नीतीश कुमार का लंबा अनुभव, स्थिर छवि और केंद्र से उनका तालमेल, बिहार की जनता के भरोसे को फिर से जीतने में मददगार साबित हुआ है।
तेजस्वी यादव का बढ़ता प्रभाव
तेजस्वी यादव ने इस बार के चुनाव में युवाओं, बेरोजगारी और महंगाई के मुद्दे को मजबूती से उठाया। उनकी जनसभाओं में भारी भीड़ देखने को मिली और युवा वर्ग में उन्होंने एक नई ऊर्जा पैदा की। इसका असर साफ तौर पर RJD के वोट शेयर में दिख रहा है, जो 2020 की तुलना में इस बार बढ़ा है। हालांकि, गठबंधन की कमी और सीमित सीटों की वजह से तेजस्वी अभी भी सत्ता से थोड़े दूर नजर आ रहे हैं।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि RJD का प्रदर्शन भविष्य के लिए सकारात्मक संकेत है। अगर पार्टी इसी तरह जनसंपर्क बनाए रखती है, तो आने वाले चुनावों में वह निर्णायक भूमिका निभा सकती है।
BJP का प्रदर्शन उम्मीद से कमजोर, कांग्रेस फिर पिछड़ी
इस बार भारतीय जनता पार्टी को पिछले चुनाव के मुकाबले कुछ नुकसान झेलना पड़ सकता है। हालांकि पार्टी ने कई क्षेत्रों में जोरदार प्रचार किया, लेकिन सीटों की संख्या में गिरावट देखने को मिल सकती है। दूसरी ओर, कांग्रेस एक बार फिर सीमित भूमिका में नजर आ रही है। उसका वोट शेयर घटकर एकल अंक में आ सकता है। वाम दलों की स्थिति भी लगभग वही बनी हुई है — प्रभावशाली नहीं, लेकिन कुछ इलाकों में निर्णायक।
चुनाव में अहम रहे ये मुद्दे
इस चुनाव में विकास और रोजगार के साथ-साथ स्थानीय मुद्दों ने बड़ी भूमिका निभाई। नीतीश सरकार के कामकाज, महिलाओं की सुरक्षा, बिजली-पानी, और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं पर जनता ने अपने फैसले दिए। वहीं विपक्ष ने सरकार को बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और कानून व्यवस्था को लेकर घेरा।
कई राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह चुनाव “विकास बनाम बदलाव” की थीम पर लड़ा गया। जहां NDA ने अपने काम और स्थिर शासन का दावा किया, वहीं विपक्ष ने ‘नई दिशा और नई सोच’ की मांग की।