G20 समिट में मोदी-मेलोनी की ‘स्पेशल केमिस्ट्री’, लूला संग गर्मजोशी भरी मुलाकात—पहले दिन कूटनीति का अनोखा रंग

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जोहान्सबर्ग में आयोजित जी-20 शिखर सम्मेलन का पहला दिन कई कूटनीतिक गतिविधियों, मुलाकातों और महत्वपूर्ण वैश्विक संवादों का केंद्र बना रहा। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस समिट में पूरी ऊर्जा और स्पष्ट दृष्टि के साथ शामिल हुए, और पहले ही दिन उनकी मुलाकातें, बातचीत और वैश्विक नेताओं के साथ तालमेल सुर्खियों में आ गए। विशेष रूप से इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के साथ उनकी मुलाकात एक बार फिर चर्चा का विषय बन गई, जिसे सोशल मीडिया पर लोगों ने “स्पेशल केमिस्ट्री” का नाम दिया।

मोदी और मेलोनी की तस्वीरें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर तेजी से वायरल होने लगीं, जिसमें दोनों नेताओं की सहजता और दोस्ताना रवैया साफ दिखाई देता है। इससे पहले भी इन दोनों नेताओं की कई मुलाकातों ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर एक अलग ही छाप छोड़ी है। उनके बीच बातचीत सिर्फ राजनीतिक रिश्तों तक सीमित नहीं रहती, बल्कि अक्सर उसमें हल्के-फुल्के और सकारात्मक भाव भी झलकते हैं।

इसी दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने ब्राजील के राष्ट्रपति लूला दा सिल्वा से मुलाकात की, जो बेहद गर्मजोशी भरी रही। दोनों नेताओं ने गले मिलकर एक-दूसरे का अभिवादन किया। यह पल कैमरों में कैद हो गया और वैश्विक मीडिया में खूब छाया रहा। भारत और ब्राजील के बीच पहले से ही मजबूत संबंध रहे हैं, लेकिन इस मुलाकात ने दोनों देशों के बीच नई संभावनाओं और भविष्य के सहयोग की दिशा में एक सकारात्मक संकेत दिया।

जी-20 के पहले दिन भारत ने कई अहम मुद्दों पर अपनी मजबूत भागीदारी दर्ज कराई। प्रधानमंत्री मोदी ने दुनिया की चुनौतियों—जैसे स्वास्थ्य संकट, वैश्विक आर्थिक अस्थिरता, आतंकवाद का नया स्वरूप, और ड्रग-टेरर नेटवर्क—पर स्पष्ट और ठोस कदम उठाने की जरूरत पर जोर दिया। विशेष रूप से अफ्रीका से जुड़े मुद्दों को भारत ने पहली प्राथमिकता में रखा।

मोदी ने अफ्रीका देशों के युवाओं के लिए “स्किल्स रिपॉजिटरी” की अवधारणा सामने रखी, ताकि वैश्विक स्तर पर रोजगार, प्रशिक्षण और डिजिटल स्किल्स के अवसर बढ़ाए जा सकें। भारत ने यह भी प्रस्ताव दिया कि स्वास्थ्य आपात स्थितियों में वैश्विक स्तर पर एक एकीकृत प्रतिक्रिया प्रणाली बनाई जाए, जिससे महामारी जैसी चुनौतियों का विश्व स्तर पर सामना किया जा सके।

इसके अलावा, प्रधानमंत्री ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण मुद्दे—ड्रग-टेरर नेक्सस—पर दुनिया का ध्यान आकर्षित किया। मोदी ने कहा कि आज नशे और आतंकवाद का गठजोड़ दुनिया की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन चुका है और इसके खिलाफ देशों को एकजुट होकर लड़ने की जरूरत है। भारत ने इस दिशा में अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने की पहल की, जिसका कई देशों ने समर्थन भी किया।

भारत द्वारा रखे गए प्रस्तावों को अफ्रीकी देशों के साथ-साथ एशिया और यूरोप के देशों से भी सकारात्मक प्रतिक्रिया मिलती दिखी। भारत ने न सिर्फ अपनी बात मजबूती से रखी, बल्कि विभिन्न देशों के साथ मिलकर साझेदारी के नए मॉडल पर भी कार्य करने का संदेश दिया।

जोहान्सबर्ग समिट में वैश्विक नेतृत्व में भारत की भूमिका लगातार मजबूत होती दिख रही है। इस बार की बैठक में भारत ने दुनिया को यह संदेश देने की कोशिश की है कि विकासशील देशों की आवाज़ को और अधिक प्रभावी तरीके से सुना जाना चाहिए, और विश्व मंच पर संतुलन बनाने के लिए जरूरी है कि वैश्विक नीतियों में सभी देशों का बराबरी का योगदान हो।

पहले दिन की बैठकों और मुलाकातों में यह साफ दिखा कि प्रधानमंत्री मोदी का नेतृत्व दुनिया के बड़े नेताओं को भी प्रभावित कर रहा है। चाहे इटली की प्रधानमंत्री मेलोनी के साथ सहज बातचीत हो, ब्राजील के राष्ट्रपति लूला से गर्मजोशी भरी मुलाकात, या फिर अफ्रीकी नेताओं के साथ व्यापक संवाद—भारत के लिए यह समिट अत्यधिक एक्टिव और सफल शुरुआत के साथ आगे बढ़ा।

समीक्षकों का कहना है कि भारत ने इस मंच पर न सिर्फ अपने हितों को मजबूती से सामने रखा, बल्कि पूरी दुनिया के सामने विकास, स्थिरता और सुरक्षा का एक समग्र दृष्टिकोण पेश किया है।

पहले दिन की तमाम तस्वीरों, वीडियो और रिपोर्टों में जो बात सबसे अधिक ध्यान खींचती है वह यह कि भारत आज सिर्फ एक भागीदार नहीं, बल्कि समाधान प्रस्तुत करने वाला वैश्विक नेतृत्वकर्ता बनकर उभरा है। नरेंद्र मोदी की उपस्थिति ने इस समिट को एक नए आयाम की दिशा दी है—जहां कूटनीति केवल औपचारिकताओं तक सीमित नहीं, बल्कि व्यवहारिक, मानवीय और वैश्विक कल्याण के सिद्धांतों पर आधारित है।

कुल मिलाकर, जी-20 के पहले दिन ने दुनिया को भारत की शक्ति, गरिमा और सामरिक संतुलन का एक स्पष्ट संकेत दिया है। आने वाले दिनों में इस समिट से अंतरराष्ट्रीय सहयोग के नए रास्ते खुलने की पूरी संभावना है।

 

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