
टेक जगत में चर्चा का विषय बने Galgotias University से जुड़ा विवाद थमता नजर नहीं आ रहा। हाल ही में आयोजित AI Impact Summit के दौरान विश्वविद्यालय की ओर से एक ड्रोन प्रोजेक्ट शोकेस किया गया, जिसे लेकर सोशल मीडिया पर सवाल उठने लगे। वायरल वीडियो में दावा किया गया कि प्रदर्शित ड्रोन का ढांचा थर्माकॉल से बना था।
क्या है पूरा मामला?
AI Impact Summit में विश्वविद्यालय के स्टॉल पर एक ड्रोन मॉडल प्रस्तुत किया गया। कुछ लोगों ने वीडियो शेयर कर आरोप लगाया कि यह वास्तविक कार्यशील ड्रोन नहीं बल्कि थर्माकॉल से बना डेमो मॉडल था।
इसके बाद सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई—क्या यह तकनीकी प्रदर्शन था या सिर्फ प्रोटोटाइप मॉडल?
विश्वविद्यालय का पक्ष
विश्वविद्यालय की ओर से कहा गया कि कार्यक्रम में प्रदर्शित मॉडल एक प्रोटोटाइप या कॉन्सेप्ट मॉडल हो सकता है, जिसे तकनीक समझाने के लिए तैयार किया गया था। संस्थान ने यह भी स्पष्ट किया कि छात्रों की परियोजनाओं को गलत तरीके से प्रस्तुत किया जा रहा है।
हालांकि आधिकारिक विस्तृत बयान का इंतजार है।
सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया
वीडियो वायरल होने के बाद कई यूजर्स ने सवाल उठाए:
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क्या यह वास्तव में उड़ने वाला ड्रोन था?
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क्या इसे AI प्रोजेक्ट के रूप में दिखाना उचित था?
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तकनीकी प्रदर्शन की पारदर्शिता कितनी जरूरी है?
कुछ लोगों ने इसे छात्रों के प्रयास पर अनावश्यक हमला बताया, जबकि अन्य ने इसे “ओवरक्लेम” कहा।
AI Impact Summit की अहमियत
AI Impact Summit में देश-विदेश की टेक कंपनियों और शैक्षणिक संस्थानों ने अपने प्रोजेक्ट पेश किए। ऐसे मंचों पर प्रदर्शित तकनीक की विश्वसनीयता और प्रस्तुति दोनों महत्वपूर्ण मानी जाती हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कोई मॉडल केवल कॉन्सेप्ट है, तो उसकी प्रकृति स्पष्ट रूप से बतानी चाहिए।
शिक्षा संस्थानों की जिम्मेदारी
तकनीकी संस्थानों से अपेक्षा की जाती है कि वे पारदर्शी और प्रमाणित नवाचार प्रस्तुत करें। यदि कोई प्रोटोटाइप या डेमो मॉडल है, तो उसकी सीमाएं भी स्पष्ट होनी चाहिए, ताकि भ्रम की स्थिति न बने।
निष्कर्ष
गलगोटिया विश्वविद्यालय से जुड़ा यह विवाद तकनीकी प्रदर्शनों में पारदर्शिता और विश्वसनीयता की अहमियत को रेखांकित करता है। अब सबकी नजर इस पर है कि संस्थान की ओर से आधिकारिक स्पष्टीकरण क्या आता है और विवाद किस दिशा में जाता है।