
वैश्विक बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में अचानक तेज गिरावट दर्ज की गई है। इसकी शुरुआत अमेरिका (US) के कमोडिटी मार्केट से हुई, जिसके बाद एशियाई और भारतीय बाजारों में भी असर देखने को मिला। निवेशकों के बीच मुनाफावसूली और मजबूत डॉलर ने कीमती धातुओं पर दबाव बढ़ाया।
कितनी आई गिरावट?
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोना और चांदी दोनों में उल्लेखनीय फिसलन देखी गई। अमेरिकी बाजार में ट्रेडिंग के दौरान कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव रहा, जिसके बाद अगले सत्र में एशियाई बाजारों में भी गिरावट दर्ज हुई।
भारतीय बाजार में भी स्पॉट और वायदा कीमतों में नरमी देखी गई।
गिरावट के प्रमुख कारण
1️⃣ मजबूत अमेरिकी डॉलर
डॉलर इंडेक्स में मजबूती आने से सोने की मांग कम होती है, क्योंकि सोना डॉलर में ट्रेड होता है। डॉलर मजबूत होने पर अन्य मुद्राओं के लिए सोना महंगा पड़ता है।
2️⃣ ब्याज दरों को लेकर संकेत
अमेरिका में फेडरल रिजर्व की संभावित नीति और ब्याज दरों के संकेतों ने भी निवेशकों की रणनीति प्रभावित की। ऊंची ब्याज दरें गैर-ब्याज देने वाली संपत्तियों जैसे सोने को कम आकर्षक बनाती हैं।
3️⃣ मुनाफावसूली
हालिया तेजी के बाद कई निवेशकों ने प्रॉफिट बुकिंग की, जिससे कीमतों पर दबाव आया।
क्या आगे भी जारी रहेगी गिरावट?
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि अल्पकाल में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। हालांकि, भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता सोने को सपोर्ट भी दे सकती है।
दीर्घकालिक निवेशकों के लिए गिरावट को खरीदारी के अवसर के रूप में भी देखा जाता है, लेकिन जोखिम का आकलन जरूरी है।
भारत पर असर
भारत में शादी-ब्याह और निवेश के लिहाज से सोने की मांग अहम होती है। कीमतों में गिरावट से खरीदारों को राहत मिल सकती है।
हालांकि, अंतरराष्ट्रीय संकेतों के आधार पर घरेलू बाजार में रोजाना उतार-चढ़ाव संभव है।
निवेशकों के लिए सुझाव
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जल्दबाजी में निर्णय न लें
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पोर्टफोलियो में विविधता बनाए रखें
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अंतरराष्ट्रीय संकेतों पर नजर रखें
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विशेषज्ञ सलाह के बाद निवेश करें
निष्कर्ष
US बाजार से शुरू हुई गिरावट ने सोना-चांदी की कीमतों को झटका दिया है। मजबूत डॉलर, ब्याज दरों के संकेत और मुनाफावसूली इसके प्रमुख कारण रहे। आगे की दिशा वैश्विक आर्थिक संकेतों और निवेशकों की रणनीति पर निर्भर करेगी।