
अमेरिका की पूर्व विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने जेफ्री एपस्टीन से किसी भी प्रकार के संबंध से इनकार किया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि वह कभी भी जेफ्री एपस्टीन से नहीं मिलीं। साथ ही, उन्होंने इस मामले में पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की गवाही को आवश्यक बताया है।
यह बयान उस समय आया है जब अमेरिकी हाउस ओवरसाइट कमेटी एपस्टीन से जुड़े दस्तावेजों और संभावित संपर्कों की जांच कर रही है। क्लिंटन ने कहा कि अगर सच्चाई सामने लानी है, तो सभी संबंधित लोगों को खुलकर बयान देना चाहिए।
क्या कहा हिलेरी ने?
हिलेरी क्लिंटन ने अपने बयान में कहा कि:
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उनका एपस्टीन से कोई व्यक्तिगत या पेशेवर संपर्क नहीं रहा।
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उनके नाम को बेवजह इस मामले में घसीटा जा रहा है।
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जांच निष्पक्ष और पारदर्शी होनी चाहिए।
उन्होंने यह भी जोड़ा कि अगर ट्रंप या अन्य प्रभावशाली व्यक्तियों का नाम सामने आता है, तो उन्हें भी शपथ लेकर बयान देना चाहिए।
ट्रंप की गवाही पर जोर
क्लिंटन ने कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए ट्रंप की गवाही महत्वपूर्ण हो सकती है। उनके मुताबिक, सार्वजनिक जीवन में रहे लोगों को जवाबदेही से बचना नहीं चाहिए।
हालांकि ट्रंप की ओर से इस पर कोई ताजा प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
एपस्टीन मामला क्यों है संवेदनशील?
जेफ्री एपस्टीन पर नाबालिग लड़कियों के यौन शोषण और मानव तस्करी के गंभीर आरोप लगे थे। उनकी गिरफ्तारी और बाद में जेल में हुई मौत ने कई साजिश सिद्धांतों को जन्म दिया।
इस मामले में कई हाई-प्रोफाइल नामों के सामने आने से राजनीतिक और सामाजिक हलकों में हलचल मची हुई है।
जांच की स्थिति
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हाउस ओवरसाइट कमेटी दस्तावेजों की समीक्षा कर रही है।
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संभावित गवाहों की सूची तैयार की जा रही है।
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पुराने रिकॉर्ड और उड़ानों के लॉग की जांच की जा रही है।
इस पूरी प्रक्रिया पर अमेरिकी मीडिया और जनता की नजर बनी हुई है।
निष्कर्ष
हिलेरी क्लिंटन का साफ इनकार और ट्रंप की गवाही की मांग ने एपस्टीन मामले को फिर से सुर्खियों में ला दिया है। अब देखना होगा कि जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है और क्या कोई नया खुलासा सामने आता है।
यह मामला अमेरिकी राजनीति में पारदर्शिता और जवाबदेही की बहस को और तेज कर सकता है।