‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ साबित होगा भारत–EU समझौता, फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर बोले पीयूष गोयल

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भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच प्रस्तावित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) को लेकर चर्चाएं एक बार फिर तेज हो गई हैं। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने इस समझौते को “मदर ऑफ ऑल डील्स” बताते हुए कहा है कि भारत और यूरोपीय संघ के बीच होने वाला यह व्यापारिक करार अब अंतिम चरण में पहुंच चुका है। उनके मुताबिक, यह समझौता न केवल व्यापार के लिहाज से ऐतिहासिक होगा, बल्कि भारत की वैश्विक आर्थिक स्थिति को भी नई मजबूती देगा।

पीयूष गोयल ने कहा कि भारत और 27 देशों वाले यूरोपीय संघ के बीच FTA को लेकर लंबे समय से बातचीत चल रही है। अब दोनों पक्ष कई अहम मुद्दों पर आम सहमति के बेहद करीब पहुंच चुके हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि यह समझौता दोनों अर्थव्यवस्थाओं के लिए “विन-विन” साबित होगा और आने वाले दशकों तक व्यापार, निवेश और रोजगार के नए अवसर खोलेगा।

केंद्रीय मंत्री के अनुसार, भारत आज दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। ऐसे में यूरोपीय संघ के साथ मजबूत व्यापारिक साझेदारी भारत को ग्लोबल सप्लाई चेन में और अहम भूमिका दिला सकती है। उन्होंने कहा कि भारत सिर्फ बाजार नहीं है, बल्कि एक भरोसेमंद मैन्युफैक्चरिंग और इनोवेशन हब के रूप में उभर रहा है, जिसे EU भी गंभीरता से देख रहा है।

पीयूष गोयल ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत किसी भी समझौते में अपने राष्ट्रीय हितों से समझौता नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि FTA ऐसा होना चाहिए, जिससे भारतीय किसानों, MSME सेक्टर, स्टार्टअप्स और उद्योगों को फायदा पहुंचे। भारत चाहता है कि उसके उत्पादों को यूरोपीय बाजारों में बेहतर पहुंच मिले, वहीं EU की कंपनियों को भी भारत में निवेश और कारोबार के बेहतर अवसर मिलें।

भारत–EU FTA को इतना अहम क्यों माना जा रहा है, इसे समझना जरूरी है। यूरोपीय संघ दुनिया के सबसे बड़े व्यापारिक ब्लॉक्स में से एक है। भारत और EU के बीच पहले से ही अरबों डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार होता है। अगर FTA लागू होता है, तो टैरिफ में कमी, व्यापारिक बाधाओं का हटना और नियमों में सरलता जैसे कदम व्यापार को कई गुना बढ़ा सकते हैं। यही वजह है कि पीयूष गोयल ने इसे “मदर ऑफ ऑल डील्स” की संज्ञा दी है।

मंत्री ने बताया कि इस समझौते से टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, ग्रीन एनर्जी, डिजिटल इकोनॉमी और सस्टेनेबल डेवलपमेंट जैसे क्षेत्रों में सहयोग को भी बढ़ावा मिलेगा। यूरोपीय संघ पर्यावरण और जलवायु से जुड़े मानकों पर खास जोर देता है, जबकि भारत भी स्वच्छ ऊर्जा और टिकाऊ विकास की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। ऐसे में यह साझेदारी केवल व्यापार तक सीमित नहीं रहेगी।

हालांकि, बातचीत के दौरान कुछ चुनौतीपूर्ण मुद्दे भी रहे हैं। इनमें बौद्धिक संपदा अधिकार, डेटा प्रोटेक्शन, पर्यावरण मानक और श्रम कानून जैसे विषय शामिल हैं। पीयूष गोयल का कहना है कि भारत इन सभी मुद्दों पर संतुलित और व्यावहारिक रुख अपना रहा है। उनका मानना है कि किसी भी FTA को इस तरह डिजाइन किया जाना चाहिए कि वह विकासशील देशों की जरूरतों को भी ध्यान में रखे।

उन्होंने यह भी कहा कि भारत ने बीते वर्षों में कई अहम व्यापारिक समझौते किए हैं और हर समझौते से देश ने कुछ न कुछ सीखा है। भारत–EU FTA भी उन्हीं अनुभवों के आधार पर तैयार किया जा रहा है, ताकि भविष्य में किसी तरह की असमानता या नुकसान की स्थिति न बने।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह समझौता अंतिम रूप लेता है, तो भारतीय निर्यातकों के लिए यूरोपीय बाजार के दरवाजे और ज्यादा खुलेंगे। टेक्सटाइल, फार्मास्यूटिकल्स, ऑटोमोबाइल, आईटी सर्विसेज और एग्री-प्रोडक्ट्स जैसे क्षेत्रों को बड़ा फायदा मिल सकता है। वहीं, यूरोपीय कंपनियों को भारत के विशाल उपभोक्ता बाजार और कुशल मानव संसाधन का लाभ मिलेगा।

पीयूष गोयल ने यह भी संकेत दिया कि भारत अब पुराने दौर की तरह सिर्फ बाजार खोलने की नीति पर नहीं चलता। भारत चाहता है कि हर समझौता घरेलू उद्योग को मजबूत करे, रोजगार पैदा करे और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य के साथ मेल खाए। इसी सोच के तहत भारत–EU FTA को अंतिम रूप दिया जा रहा है।

राजनीतिक और आर्थिक विश्लेषकों का कहना है कि यह समझौता भारत की कूटनीतिक रणनीति का भी अहम हिस्सा है। बदलते वैश्विक हालात में भारत अपने व्यापारिक साझेदारों के साथ संतुलन बनाकर चलना चाहता है। यूरोपीय संघ के साथ मजबूत आर्थिक संबंध भारत को वैश्विक मंच पर और प्रभावशाली बना सकते हैं।

कुल मिलाकर, पीयूष गोयल के बयान से यह साफ है कि भारत–EU FTA को लेकर सरकार बेहद आशावादी है। “मदर ऑफ ऑल डील्स” कहे जा रहे इस समझौते से न सिर्फ व्यापार बढ़ेगा, बल्कि भारत की वैश्विक आर्थिक पहचान भी और मजबूत होगी। अब सभी की नजरें इस पर टिकी हैं कि यह ऐतिहासिक करार कब अंतिम रूप लेता है और इसका असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर किस तरह देखने को मिलता है।

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