
बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को सजा-ए-मौत सुनाए जाने के बाद पूरे दक्षिण एशिया में राजनीतिक हलचल बढ़ गई है। बांग्लादेश के इंटरनेशनल क्राइम ट्रिब्यूनल द्वारा दिया गया यह फैसला न सिर्फ पड़ोसी देश की राजनीति में भूचाल लाया है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी कई सवाल खड़े कर रहा है। ऐसे माहौल में भारत की प्रतिक्रिया स्वाभाविक रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही थी, क्योंकि भारत और बांग्लादेश के संबंध ऐतिहासिक, रणनीतिक और आर्थिक रूप से बेहद गहरे हैं।
भारत ने इस मामले पर संयमित लेकिन सारगर्भित प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह बांग्लादेश में शांति, स्थिरता और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के संरक्षण का सदैव समर्थन करता है। हालाँकि भारत ने शेख हसीना के खिलाफ दिए गए फैसले पर कोई प्रत्यक्ष टिप्पणी नहीं की, लेकिन उसके बयान में यह संकेत साफ था कि वह बांग्लादेश के आंतरिक मामलों में खुलकर हस्तक्षेप नहीं करना चाहता।
बांग्लादेश में अदालत का फैसला—राजनीति में बड़ी उथल-पुथल
इंटरनेशनल क्राइम ट्रिब्यूनल ने शेख हसीना को कथित मानवाधिकार उल्लंघन और सत्ता के दुरुपयोग से जुड़े पुराने मामलों के आधार पर दोषी ठहराया। यह मामला कई वर्षों से अदालत में लंबित था, लेकिन फैसले के समय और राजनीतिक परिस्थिति को देखते हुए बांग्लादेश में इसे विवादास्पद माना जा रहा है।
विपक्षी दलों ने फैसले को स्वागत योग्य बताया, जबकि हसीना की पार्टी अवामी लीग ने इसे राजनैतिक प्रतिशोध करार दिया है। राजधानी ढाका में फैसले के बाद तनाव बढ़ गया है और कई स्थानों पर सुरक्षा बलों की तैनाती करनी पड़ी।
भारत की प्रतिक्रिया—संयमित, संतुलित और कूटनीतिक
भारत की विदेश मंत्रालय ने इस मामले पर बयान देते हुए कहा कि भारत हमेशा पड़ोसी देशों में लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं, स्थिर सरकार और क्षेत्रीय शांति का समर्थक रहा है।
बयान में यह स्पष्ट किया गया:
-
भारत किसी भी देश के आंतरिक न्यायिक फैसले पर टिप्पणी नहीं करता।
-
बांग्लादेश के साथ भारत के संबंध पारस्परिक विश्वास और सहयोग पर आधारित हैं।
-
भारत चाहता है कि बांग्लादेश में स्थिरता बनी रहे और जनता शांतिपूर्ण माहौल में आगे बढ़ सके।
हालाँकि बयान में शेख हसीना का नाम नहीं लिया गया, लेकिन भारत की सतर्कता यह दर्शाती है कि वह किसी भी पक्ष का खुलकर समर्थन या विरोध करने से बच रहा है।
क्यों महत्वपूर्ण है भारत की प्रतिक्रिया?
भारत और बांग्लादेश के संबंध सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि रणनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा हितों से भी जुड़े हुए हैं।
1. सीमाई सुरक्षा:
भारत के पूर्वी राज्यों—असम, मेघालय, त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल—की सीमा बांग्लादेश से लगती है। इन क्षेत्रों में अवैध घुसपैठ, तस्करी और आतंकवादी गतिविधियों के संदर्भ में स्थिर बांग्लादेश भारत के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
2. आर्थिक व्यापार:
भारत-बांग्लादेश के बीच सालाना व्यापार का बड़ा हिस्सा है, जिसमें ऊर्जा, कृषि, कपड़ा और दवा क्षेत्र शामिल हैं।
3. सुरक्षा और आतंकवाद विरोध:
दोनों देशों ने पिछले वर्षों में चरमपंथी संगठनों के खिलाफ मिलकर काम किया है। शेख हसीना के शासनकाल में भारत को काफी सहयोग मिला था।
4. क्षेत्रीय राजनीति:
बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन या राजनीतिक अस्थिरता का सीधा प्रभाव भारत की पूर्वोत्तर नीति और बंगाल की खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा पर पड़ता है।
इसी कारण भारत का कोई भी टिप्पणी सावधानीपूर्वक और संतुलित ही होना था।
शेख हसीना की विदेश नीति में भारत की भूमिका
शेख हसीना, अपने कार्यकाल के दौरान, भारत के साथ मजबूत संबंधों की पक्षधर रही हैं।
उन्होंने—
-
दो देशों के बीच सीमा विवाद सुलझाए,
-
आतंकवाद विरोधी कार्रवाई में सहयोग बढ़ाया,
-
और बड़े पैमाने पर आर्थिक और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट शुरू किए।
इसलिए उनका राजनीतिक भविष्य बांग्लादेश-भारत संबंधों के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण माना जाता है।
ट्रिब्यूनल के फैसले पर बांग्लादेश में बढ़ता तनाव
ट्रिब्यूनल के फैसले के बाद ढाका, चिटगांव और राजशाही जैसे शहरों में विरोध प्रदर्शन बढ़ गए हैं।
अवामी लीग समर्थकों का दावा है कि—
-
यह फैसला राजनीतिक प्रेरित है
-
विपक्ष सत्ता के लिए प्रतिशोध ले रहा है
-
हसीना को फंसाने की बड़ी साजिश रची गई है
वहीं विपक्ष आरोप लगा रहा है कि—
-
हसीना के शासनकाल में मानवाधिकार का उल्लंघन हुआ
-
राजनीतिक विरोधियों पर अत्याचार किए गए
-
न्यायपालिका पर पर्दे के पीछे से दबाव था
इस स्थिति ने बांग्लादेश को राजनीतिक अस्थिरता की ओर धकेल दिया है, जिसका सीधा असर पूरे क्षेत्र पर पड़ सकता है।
क्या क्षेत्रीय स्थिरता को खतरा?
दक्षिण एशिया पहले ही कई भू-राजनीतिक चुनौतियों से जूझ रहा है—
-
म्यांमार में सैन्य संघर्ष
-
श्रीलंका में आर्थिक संकट
-
अफगानिस्तान की अस्थिरता
-
पाकिस्तान की राजनीतिक उथल-पुथल
ऐसे माहौल में बांग्लादेश में भी अस्थिरता उभरना भारत सहित पूरे क्षेत्र के लिए चिंता का विषय है। विशेषज्ञों का मानना है कि बांग्लादेश का राजनीतिक भविष्य आने वाले महीनों में पूरे दक्षिण एशिया की स्थिरता को प्रभावित कर सकता है।
भारत की आगे की रणनीति क्या होगी?
भारत के लिए सबसे महत्वपूर्ण होगा—
-
तटस्थ रहना
-
दक्षिण एशिया में स्थिरता बनाए रखना
-
बांग्लादेश के सभी राजनीतिक दलों के साथ संवाद जारी रखना
-
सीमा पर सुरक्षा बढ़ाना
-
आर्थिक और ऊर्जा सहयोग को प्रभावित न होने देना
भारत को यह संतुलन बनाए रखना होगा कि वह बांग्लादेश के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करे, लेकिन क्षेत्रीय शांति की दिशा में अपनी सकारात्मक भूमिका भी निभाता रहे।
निष्कर्ष
शेख हसीना को सुनाई गई मौत की सजा बांग्लादेश के राजनीतिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकती है। यह फैसला देश की राजनीति, जनता और क्षेत्रीय संबंधों पर गहरा प्रभाव छोड़ सकता है। भारत की प्रतिक्रिया संयमित और कूटनीतिक रही, जो दर्शाती है कि वह किसी भी तरह की अस्थिरता को बढ़ावा नहीं देना चाहता।
आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि बांग्लादेश की राजनीतिक स्थिति किस दिशा में आगे बढ़ती है और भारत अपनी विदेश नीति को किस प्रकार संतुलित रखता है।