
दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नहयान की मुलाकात सिर्फ एक औपचारिक कूटनीतिक कार्यक्रम नहीं थी, बल्कि यह भारत–यूएई संबंधों को नई ऊंचाई देने वाला एक निर्णायक क्षण बन गई। करीब तीन घंटे चली इस अहम बैठक में दोनों देशों के बीच पांच बड़े समझौतों पर हस्ताक्षर हुए और सात ऐसे ऐलान किए गए, जिनका असर आने वाले वर्षों में रक्षा, अंतरिक्ष, निवेश, तकनीक और रणनीतिक सहयोग के क्षेत्र में साफ दिखाई देगा।
यह दौरा ऐसे समय में हुआ है, जब वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था दोनों अस्थिर दौर से गुजर रही हैं। भारत और यूएई, दोनों ही देश इस बदलते माहौल में अपने आपसी रिश्तों को और मजबूत करने की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहे हैं। इस मुलाकात ने यह साफ कर दिया कि भारत और यूएई अब सिर्फ व्यापारिक साझेदार नहीं, बल्कि रणनीतिक सहयोगी के रूप में उभर रहे हैं।
बैठक की शुरुआत द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा से हुई। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और यूएई के रिश्ते अब “कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप” के स्तर पर पहुंच चुके हैं। वहीं राष्ट्रपति अल नहयान ने भारत को यूएई का भरोसेमंद और दीर्घकालिक साझेदार बताया। दोनों नेताओं ने यह स्वीकार किया कि बीते एक दशक में रिश्तों में असाधारण तेजी से विस्तार हुआ है।
सबसे पहले बात उन पांच समझौतों की, जिन पर इस बैठक के दौरान हस्ताक्षर हुए। इनमें रक्षा सहयोग को मजबूत करने, अंतरिक्ष अनुसंधान में साझेदारी बढ़ाने, रणनीतिक निवेश को गति देने, उन्नत तकनीक में सहयोग और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में साझा परियोजनाएं शामिल हैं। इन समझौतों का उद्देश्य सिर्फ वर्तमान जरूरतों को पूरा करना नहीं, बल्कि भविष्य की चुनौतियों के लिए संयुक्त तैयारी करना है।
रक्षा क्षेत्र में हुए समझौते को खास तौर पर अहम माना जा रहा है। दोनों देश संयुक्त सैन्य अभ्यास, रक्षा उपकरणों के सह-निर्माण और खुफिया जानकारी साझा करने के दायरे को बढ़ाने पर सहमत हुए हैं। इससे न सिर्फ दोनों देशों की सुरक्षा क्षमता बढ़ेगी, बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता में भी योगदान मिलेगा।
अंतरिक्ष सहयोग को लेकर भी बड़ा कदम उठाया गया है। भारत और यूएई अब सैटेलाइट टेक्नोलॉजी, स्पेस रिसर्च और डेटा शेयरिंग में मिलकर काम करेंगे। इससे मौसम पूर्वानुमान, आपदा प्रबंधन और संचार व्यवस्था को और मजबूत करने में मदद मिलेगी। यह साझेदारी यह भी दिखाती है कि दोनों देश हाई-टेक सेक्टर में भविष्य की तैयारी कर रहे हैं।
रणनीतिक निवेश को लेकर किए गए ऐलान आर्थिक नजरिए से बेहद महत्वपूर्ण हैं। यूएई ने भारत में इंफ्रास्ट्रक्चर, ग्रीन एनर्जी, सेमीकंडक्टर और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में बड़े निवेश का संकेत दिया है। इससे न सिर्फ रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, बल्कि भारत की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को भी मजबूती मिलेगी।
डिजिटल और फिनटेक सहयोग भी बैठक का अहम हिस्सा रहा। दोनों देश डिजिटल पेमेंट सिस्टम, साइबर सुरक्षा और स्मार्ट सिटी परियोजनाओं में साझेदारी बढ़ाने पर सहमत हुए हैं। यह सहयोग भारत के डिजिटल इंडिया मिशन और यूएई के टेक्नोलॉजी विजन—दोनों के लिए फायदेमंद माना जा रहा है।
इन समझौतों के अलावा, सात बड़े ऐलानों ने इस दौरे को और खास बना दिया। इनमें ऊर्जा सुरक्षा, ग्रीन हाइड्रोजन, फूड सिक्योरिटी, स्टार्टअप सहयोग, शिक्षा, स्वास्थ्य और सांस्कृतिक आदान-प्रदान से जुड़े फैसले शामिल हैं। खास तौर पर ग्रीन एनर्जी को लेकर दोनों देशों ने दीर्घकालिक साझेदारी की बात कही, जिससे जलवायु परिवर्तन से निपटने में मदद मिलेगी।
फूड सिक्योरिटी पर भी खास ध्यान दिया गया। भारत और यूएई मिलकर कृषि तकनीक, भंडारण और सप्लाई चेन को मजबूत करने पर सहमत हुए हैं। इसका मकसद भविष्य में किसी भी वैश्विक संकट के दौरान खाद्य आपूर्ति को सुरक्षित रखना है।
स्टार्टअप और इनोवेशन के क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ाने की घोषणा की गई है। दोनों देश युवा उद्यमियों के लिए साझा प्लेटफॉर्म, फंडिंग और एक्सचेंज प्रोग्राम शुरू करने पर विचार कर रहे हैं। इससे भारत और यूएई के युवाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काम करने के नए मौके मिलेंगे।
शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी नई पहल की बात हुई। छात्र विनिमय कार्यक्रम, मेडिकल रिसर्च और डिजिटल हेल्थ प्लेटफॉर्म पर संयुक्त काम को बढ़ावा देने का फैसला किया गया। इससे दोनों देशों के नागरिकों को सीधा लाभ मिलेगा।
रणनीतिक दृष्टि से यह दौरा इसलिए भी अहम है, क्योंकि भारत और यूएई दोनों ही हिंद-प्रशांत क्षेत्र और मध्य पूर्व में स्थिरता के पक्षधर हैं। आतंकवाद, कट्टरपंथ और साइबर अपराध जैसे मुद्दों पर दोनों देशों ने साझा रणनीति बनाने पर सहमति जताई है। इससे सुरक्षा सहयोग को नई धार मिलेगी।
विश्लेषकों का मानना है कि इस दौरे ने यह साबित कर दिया है कि भारत–यूएई रिश्ते अब सिर्फ द्विपक्षीय नहीं, बल्कि क्षेत्रीय और वैश्विक संतुलन का भी अहम हिस्सा बन चुके हैं। तीन घंटे की इस बैठक में लिए गए फैसले आने वाले वर्षों में दोनों देशों की विदेश नीति और आर्थिक रणनीति को नई दिशा देंगे।
इस मुलाकात का एक और अहम पहलू मानवीय और सांस्कृतिक रिश्तों को लेकर था। दोनों नेताओं ने प्रवासी भारतीयों की भूमिका की सराहना की और कहा कि भारत–यूएई संबंधों की असली ताकत लोगों के आपसी जुड़ाव में है। पर्यटन, संस्कृति और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने के लिए भी नई योजनाओं पर चर्चा हुई।
कुल मिलाकर, यूएई राष्ट्रपति का यह दिल्ली दौरा सिर्फ शिष्टाचार यात्रा नहीं, बल्कि भारत–यूएई साझेदारी का एक नया अध्याय साबित हुआ है। तीन घंटे की बैठक, पांच समझौते और सात बड़े ऐलान—इन सबने यह साफ कर दिया है कि दोनों देश अब भविष्य की राजनीति और अर्थव्यवस्था को साथ मिलकर आकार देने की दिशा में आगे बढ़ चुके हैं। आने वाले समय में इसका असर रक्षा, तकनीक, निवेश और क्षेत्रीय स्थिरता—हर स्तर पर दिखाई देने की उम्मीद है।