
कच्चे तेल की खरीद को लेकर उठ रहे सवालों के बीच सरकार ने साफ कर दिया है कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए व्यावहारिक और आर्थिक दृष्टिकोण अपनाता रहेगा। संसदीय समिति की बैठक में अधिकारियों ने दोटूक कहा कि देश वहां से कच्चा तेल खरीदेगा, जहां वह सबसे सस्ता और अनुकूल शर्तों पर उपलब्ध होगा।
यह बयान उस समय आया जब वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों, आपूर्ति स्रोतों और भू-राजनीतिक परिस्थितियों को लेकर चर्चा तेज है।
संसदीय समिति में क्या हुआ?
सूत्रों के अनुसार, संसद की एक स्थायी समिति के समक्ष विदेश मंत्रालय और वाणिज्य मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने प्रस्तुति दी। बैठक में भारत की ऊर्जा सुरक्षा, तेल आयात के स्रोत और वैश्विक दबावों पर विस्तार से चर्चा हुई।
अधिकारियों ने बताया कि भारत अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए विविध स्रोतों से तेल खरीदता है और किसी एक देश पर निर्भरता कम करने की रणनीति अपनाता है।
सस्ती खरीद ही प्राथमिकता
सरकार का रुख स्पष्ट है कि भारत का पहला लक्ष्य अपने नागरिकों और उद्योगों के लिए ऊर्जा की लागत को नियंत्रित रखना है। यदि किसी देश से सस्ता कच्चा तेल उपलब्ध होता है और अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुरूप है, तो भारत उसे खरीदने में हिचकिचाएगा नहीं।
ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि विकासशील अर्थव्यवस्था के लिए सस्ती ऊर्जा बेहद महत्वपूर्ण है।
वैश्विक दबाव और संतुलन
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई बार तेल आयात को लेकर राजनीतिक और कूटनीतिक दबाव बनते रहे हैं। हालांकि भारत ने हमेशा अपने राष्ट्रीय हित को प्राथमिकता देने की नीति अपनाई है।
सरकार का मानना है कि ऊर्जा सुरक्षा केवल आर्थिक नहीं, बल्कि रणनीतिक मुद्दा भी है। इसलिए आपूर्ति के विविध स्रोत बनाए रखना जरूरी है।
ऊर्जा सुरक्षा की रणनीति
भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातकों में से एक है। ऐसे में सरकार लंबे समय से ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने, वैकल्पिक ऊर्जा को बढ़ावा देने और रणनीतिक भंडार बढ़ाने पर काम कर रही है।
साथ ही, नवीकरणीय ऊर्जा और घरेलू उत्पादन को भी बढ़ावा दिया जा रहा है, ताकि आयात पर निर्भरता धीरे-धीरे कम हो सके।
विशेषज्ञों की राय
आर्थिक विश्लेषकों का कहना है कि सस्ता कच्चा तेल देश की महंगाई दर और चालू खाते के संतुलन पर सकारात्मक असर डालता है। ईंधन की कीमतें कम होने से परिवहन और उत्पादन लागत भी नियंत्रित रहती है।
हालांकि दीर्घकालिक रणनीति में स्वच्छ ऊर्जा की ओर संक्रमण भी उतना ही अहम माना जा रहा है।
निष्कर्ष
संसदीय समिति के सामने सरकार ने स्पष्ट किया है कि भारत का दृष्टिकोण व्यावहारिक और राष्ट्रीय हित पर आधारित है। जहां से कच्चा तेल सस्ता और सुरक्षित शर्तों पर उपलब्ध होगा, भारत वहीं से खरीद करेगा।
ऊर्जा सुरक्षा, आर्थिक स्थिरता और रणनीतिक संतुलन—इन्हीं तीन स्तंभों पर भारत की तेल नीति टिकी हुई है।