26 राज्यों में फैला 719 करोड़ की ठगी का जाल, दुबई-चीन तक तार… गुजरात पुलिस ने अंतरराष्ट्रीय साइबर गिरोह को किया बेनकाब

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भारत में साइबर अपराध का जाल किस कदर तेज़ी से फैल चुका है, इसका एक और बड़ा और चौंकाने वाला उदाहरण गुजरात से सामने आया है। गुजरात पुलिस ने 719 करोड़ रुपये की ऑनलाइन ठगी से जुड़े एक अंतरराष्ट्रीय साइबर ठग गिरोह का पर्दाफाश किया है, जिसके तार सीधे दुबई और चीन तक जुड़े हुए बताए जा रहे हैं। पुलिस की इस बड़ी कार्रवाई में बैंक स्टाफ समेत कुल 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। यह गिरोह देश के 26 राज्यों में लोगों को अपना शिकार बना चुका था।

26 राज्यों में फैला था ठगी का नेटवर्क

जांच में सामने आया है कि यह साइबर गैंग किसी एक शहर या राज्य तक सीमित नहीं था, बल्कि देश के 26 राज्यों में सुनियोजित ढंग से ठगी को अंजाम दे रहा था। आरोपी फर्जी कॉल, नकली निवेश योजनाएं, क्रेडिट कार्ड क्लोनिंग, केवाईसी अपडेट के नाम पर डेटा चोरी और फेक बैंक लिंक के जरिए लोगों को अपने जाल में फंसाते थे।

गैंग के सदस्य तकनीकी तौर पर बेहद प्रशिक्षित थे और हर टारगेट के लिए अलग रणनीति अपनाई जाती थी, जिससे लोग आसानी से उनके झांसे में आ जाते थे।

719 करोड़ रुपये की ठगी का खुलासा

पुलिस जांच में यह सामने आया है कि अब तक इस गैंग ने करीब 719 करोड़ रुपये की ठगी को अंजाम दिया है। यह रकम सैकड़ों नहीं बल्कि हजारों पीड़ितों से कई छोटे-बड़े ट्रांजैक्शन के जरिए जुटाई गई थी।

अपराधियों ने ठगी का पैसा कई फर्जी खातों में ट्रांसफर करवाया और फिर उसे क्रिप्टो करेंसी, हवाला नेटवर्क और विदेशी खातों के जरिए बाहर भेज दिया।

दुबई और चीन से जुड़ा कनेक्शन

जांच एजेंसियों के अनुसार, इस पूरे नेटवर्क की कमान देश के बाहर बैठे हैंडलर्स के हाथ में थी। दुबई और चीन से साइबर ठगों को दिशा-निर्देश मिलते थे। वहीं से स्क्रिप्ट, फर्जी ऐप्स और तकनीकी टूल्स उपलब्ध कराए जाते थे।

देश में मौजूद आरोपी सिर्फ मोहरे के तौर पर काम कर रहे थे, जो लोगों से संपर्क करते थे, बैंक खातों की व्यवस्था करते थे और पैसा ट्रांसफर करवाते थे।

बैंक स्टाफ की मिलीभगत ने खोले रास्ते

इस केस का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि इस पूरे साइबर फ्रॉड में कुछ बैंक कर्मचारियों की भी संलिप्तता सामने आई है। यह बैंक स्टाफ नकली खातों को खोलने, दस्तावेजों की जांच में लापरवाही और ठगी के पैसों को सुरक्षित तरीके से इधर-उधर ट्रांसफर करने में मदद कर रहे थे।

पुलिस के अनुसार, कुछ बैंककर्मी जानबूझकर नियमों को ताक पर रख रहे थे, जिससे साइबर ठगों को ठगी के लिए मजबूत आधार मिल गया।

कैसे देता था गैंग वारदात को अंजाम

गिरोह अलग-अलग तरीकों से लोगों को ठगता था। कभी फेक निवेश ऐप और शेयर मार्केट में मोटे मुनाफे का लालच दिया जाता, तो कभी बिजली बिल बकाया, केवाईसी अपडेट या लोन क्लोजिंग के नाम पर लिंक भेजकर लोगों की बैंक डिटेल्स चुरा ली जाती थीं।

कई मामलों में साइबर ठग खुद को सरकारी अधिकारी या बैंक मैनेजर बताकर लोगों को धमकाते थे और डर के माहौल में उनसे पैसे ट्रांसफर करवा लेते थे।

क्रिप्टो और हवाला के जरिए भेजा गया पैसा

जांच में सामने आया है कि ठगी की रकम को सबसे पहले फर्जी खातों में जमा कराया जाता था। इसके बाद उसे छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर क्रिप्टो करेंसी में बदला जाता और विदेश भेज दिया जाता था।

कुछ मामलों में हवाला नेटवर्क का भी इस्तेमाल किया गया, जिससे पैसे की ट्रैकिंग मुश्किल हो जाती थी।

गुजरात पुलिस की महीनों चली गुप्त जांच

इस बड़े नेटवर्क का खुलासा अचानक नहीं हुआ, बल्कि गुजरात पुलिस ने महीनों तक तकनीकी निगरानी, ट्रांजैक्शन एनालिसिस और खुफिया जानकारी के आधार पर इस ऑपरेशन को अंजाम दिया।

जैसे ही पुख्ता सबूत मिले, पुलिस ने एक साथ कई जगहों पर छापेमारी कर 10 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। इनमें टेक्निकल एक्सपर्ट्स, बैंक से जुड़े लोग और फील्ड एजेंट शामिल हैं।

डिजिटल सबूतों का पहाड़ जब्त

पुलिस ने आरोपियों के पास से दर्जनों मोबाइल फोन, लैपटॉप, हार्ड डिस्क, सिम कार्ड, बैंक की पासबुक, एटीएम कार्ड और कई फर्जी दस्तावेज जब्त किए हैं। इन सभी की फॉरेंसिक जांच की जा रही है।

इन डिजिटल डिवाइसेज़ से हजारों पीड़ितों के डेटा, चैट रिकॉर्ड, कॉल डिटेल्स और विदेशी ट्रांजैक्शन के सबूत मिले हैं।

हजारों लोग बने साइबर ठगी के शिकार

अब तक की जांच में अनुमान लगाया जा रहा है कि इस गैंग ने देशभर में हजारों लोगों को ठगा है। इनमें नौकरीपेशा लोग, बुजुर्ग, छोटे कारोबारी और यहां तक कि महिलाएं भी शामिल हैं।

कई पीड़ितों की जीवनभर की कमाई चंद मिनटों में साफ हो गई और उन्हें तब जाकर एहसास हुआ जब खाते से पैसे निकल चुके थे।

पुलिस अब मास्टरमाइंड तक पहुंचने में जुटी

गुजरात पुलिस अब इस नेटवर्क के असली मास्टरमाइंड तक पहुंचने की कोशिश में जुटी है। जांच एजेंसियां दुबई और चीन में बैठे ऑपरेटरों की पहचान के लिए इंटरनेशनल एजेंसियों से तालमेल कर रही हैं।

इंटरपोल की मदद से भी इन आरोपियों तक पहुंचने की प्रक्रिया तेज की जा रही है।

साइबर अपराध से बचाव की जरूरत

इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि साइबर अपराध अब सिर्फ तकनीकी अपराध नहीं रहा, बल्कि यह एक संगठित अंतरराष्ट्रीय गैंगवार का रूप ले चुका है। आम लोगों को भी अब बेहद सतर्क रहने की जरूरत है।

अनजान कॉल, संदिग्ध लिंक, फर्जी निवेश स्कीम और केवाईसी अपडेट के झांसे से बचना ही सबसे बड़ा बचाव है।

निष्कर्ष

26 राज्यों में फैला, 719 करोड़ रुपये की ठगी करने वाला यह साइबर गैंग देश के अब तक के सबसे बड़े डिजिटल फ्रॉड नेटवर्क में से एक माना जा रहा है। दुबई-चीन कनेक्शन, बैंक स्टाफ की मिलीभगत और क्रिप्टो ट्रांजैक्शन ने इस पूरे मामले को और ज्यादा गंभीर बना दिया है।

गुजरात पुलिस की यह कार्रवाई न सिर्फ एक बड़ी सफलता है, बल्कि यह भी संकेत है कि अब साइबर अपराधियों के लिए बचकर निकलना पहले जितना आसान नहीं रहेगा।

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