
उत्तर प्रदेश के कानपुर में पुलिस ने एक शातिर ठग को गिरफ्तार किया है, जो खुद को दारोगा बताकर युवाओं से नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करता था। आरोपी की पहचान संजय कुमार सिंह के रूप में हुई है। वह होटल में इंटरव्यू और लिखित परीक्षा का नाटक रचकर अभ्यर्थियों से पैसे ऐंठता था।
कैसे चलता था फर्जीवाड़ा?
आरोपी सोशल मीडिया और जान-पहचान के जरिए युवाओं से संपर्क करता था। वह दावा करता कि पुलिस विभाग में उसकी पहुंच है और वह दारोगा या अन्य पदों पर नौकरी दिलवा सकता है।
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होटल में कमरे बुक कर ‘इंटरव्यू’ आयोजित
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फर्जी लिखित परीक्षा कराना
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चयन सूची दिखाकर विश्वास जीतना
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एडवांस और प्रोसेसिंग फीस के नाम पर रकम वसूलना
इस तरह वह बेरोजगार युवाओं को झांसे में लेता था।
ऐसे खुली पोल
एक पीड़ित को शक होने पर उसने पुलिस से शिकायत की। जांच में सामने आया कि आरोपी का पुलिस विभाग से कोई संबंध नहीं है।
पुलिस ने जाल बिछाकर उसे गिरफ्तार कर लिया। तलाशी में फर्जी दस्तावेज, मुहरें और कथित चयन सूची बरामद होने की जानकारी सामने आई है।
कितनों से ठगी?
प्रारंभिक जांच में कई युवाओं से ठगी की आशंका जताई जा रही है। पुलिस पीड़ितों से आगे आने की अपील कर रही है, ताकि पूरी रकम और मामलों का आंकड़ा स्पष्ट हो सके।
कानूनी कार्रवाई
आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी की धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या उसके साथ अन्य लोग भी शामिल थे।
युवाओं के लिए चेतावनी
विशेषज्ञों का कहना है कि सरकारी नौकरी के नाम पर किसी निजी स्थान पर इंटरव्यू या परीक्षा आयोजित करना संदिग्ध हो सकता है।
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आधिकारिक वेबसाइट पर ही जानकारी जांचें
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फीस या रिश्वत की मांग से सावधान रहें
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नियुक्ति पत्र और दस्तावेज की सत्यता की पुष्टि करें
निष्कर्ष
कानपुर में फर्जी दारोगा बनकर नौकरी का झांसा देने वाला आरोपी अब सलाखों के पीछे है। यह मामला बेरोजगारी का फायदा उठाकर ठगी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का संदेश देता है।
युवाओं को सतर्क रहने और आधिकारिक प्रक्रियाओं पर भरोसा करने की जरूरत है।