छत्तीसगढ़ में रिश्तों का खौफनाक सच: अफेयर में डूबी पत्नी ने पति को जहर दिया, अस्पताल ले जाकर बनी बेगुनाह… बच्चों ने खोली साजिश

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छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले से सामने आई यह घटना रिश्तों, भरोसे और इंसानियत—तीनों को झकझोर देने वाली है। यहां एक महिला ने अपने ही पति को जहर देकर मौत के घाट उतार दिया, लेकिन कहानी का सबसे चौंकाने वाला हिस्सा यह है कि उसने खुद को मासूम साबित करने के लिए पति को अस्पताल तक पहुंचाया। अगर बच्चे सच्चाई सामने न लाते, तो शायद यह हत्या एक सामान्य बीमारी या हादसे के रूप में दर्ज हो जाती। लेकिन बच्चों की जुबान ने मां के चेहरे से नकाब उतार दिया और पूरा मामला एक खौफनाक साजिश के रूप में सामने आया।

मामला कोरबा जिले के एक गांव का बताया जा रहा है। मृतक एक सामान्य मजदूर था, जो रोज़ की तरह काम करके घर लौटता था। उसकी पत्नी बंटी देवी घर संभालती थी और परिवार में दो बच्चे भी थे। बाहर से देखने पर यह एक साधारण परिवार लगता था, लेकिन घर के अंदर रिश्तों में जहर घुल चुका था।

पुलिस जांच में सामने आया कि बंटी देवी का किसी अन्य व्यक्ति के साथ प्रेम संबंध चल रहा था। पति को इसकी भनक लग चुकी थी और इसी बात को लेकर दोनों के बीच आए दिन झगड़े होते रहते थे। पति कई बार पत्नी को समझाने की कोशिश करता था, लेकिन रिश्तों की दरार लगातार गहरी होती चली गई।

बताया जा रहा है कि घटना वाले दिन भी पति-पत्नी के बीच किसी बात को लेकर विवाद हुआ था। इसी दौरान बंटी देवी ने पति को खाने या पीने की किसी चीज में जहर मिला दिया। कुछ ही देर में पति की हालत बिगड़ने लगी। वह उल्टियां करने लगा और बेहोशी की हालत में चला गया।

यहां कहानी ने एक नया मोड़ लिया। बंटी देवी ने खुद को जिम्मेदार पत्नी दिखाने के लिए पड़ोसियों को बुलाया और पति को तुरंत अस्पताल ले गई। उसने डॉक्टरों को बताया कि पति की तबीयत अचानक बिगड़ गई है और उसे कुछ समझ नहीं आ रहा कि ऐसा क्यों हुआ।

अस्पताल में इलाज के दौरान पति की हालत और बिगड़ती चली गई। डॉक्टरों को शक हुआ कि यह मामला सामान्य बीमारी का नहीं, बल्कि जहर का हो सकता है। इसी बीच घर से आए बच्चों ने ऐसी बातें बताईं, जिसने पूरे मामले की दिशा ही बदल दी।

बच्चों ने डॉक्टरों और पुलिस के सामने बताया कि उन्होंने अपनी मां को पिता के खाने में कुछ मिलाते हुए देखा था। बच्चों का कहना था कि मां और पिता के बीच अक्सर झगड़े होते थे और मां किसी दूसरे आदमी से फोन पर बात करती थी। बच्चों की यह गवाही सुनते ही पुलिस सतर्क हो गई।

इलाज के दौरान पति की मौत हो गई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी जहर दिए जाने की पुष्टि हुई। इसके बाद पुलिस ने बंटी देवी से सख्ती से पूछताछ शुरू की। पहले तो वह खुद को निर्दोष बताती रही और बार-बार यही कहती रही कि उसने पति को बचाने की पूरी कोशिश की।

लेकिन जब बच्चों के बयान, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और परिस्थितिजन्य सबूत सामने रखे गए, तो बंटी देवी टूट गई। पूछताछ में उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया। उसने बताया कि प्रेम संबंध में पति रोड़ा बन रहा था और रोज़-रोज़ के झगड़ों से वह परेशान हो चुकी थी। इसी वजह से उसने यह खौफनाक कदम उठाया।

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, यह मामला पूरी तरह से पूर्व नियोजित हत्या का है। महिला ने पहले पति को जहर दिया, फिर खुद को निर्दोष साबित करने के लिए अस्पताल ले जाकर नाटक किया। अगर बच्चे सच न बताते, तो शायद यह हत्या कभी उजागर ही नहीं होती।

इस घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। गांव के लोग हैरान हैं कि जिस महिला को वे एक साधारण गृहिणी समझते थे, वह इतनी बड़ी साजिश कर सकती है। मृतक के परिवार में मातम पसरा हुआ है। परिजनों का कहना है कि उन्हें कभी अंदाजा नहीं था कि मामला इतना गंभीर हो जाएगा।

पुलिस ने आरोपी पत्नी को गिरफ्तार कर लिया है और उसके खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया गया है। साथ ही, यह भी जांच की जा रही है कि प्रेम संबंध वाला व्यक्ति इस साजिश में शामिल था या नहीं। अगर उसकी भूमिका सामने आती है, तो उसके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।

इस केस में बच्चों की भूमिका सबसे अहम मानी जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों ने जो साहस दिखाया, वही सच सामने आने की वजह बना। लेकिन इसके साथ ही यह सवाल भी उठता है कि अब उन बच्चों का भविष्य क्या होगा—जिनकी मां जेल में है और पिता इस दुनिया में नहीं रहे।

मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि यह घटना सिर्फ अपराध नहीं, बल्कि पारिवारिक ताने-बाने के टूटने की दर्दनाक मिसाल है। जब रिश्तों में संवाद खत्म हो जाता है और गुस्से व स्वार्थ की जगह ले लेता है, तो नतीजे ऐसे ही खौफनाक होते हैं।

समाजशास्त्रियों का कहना है कि अफेयर या वैवाहिक विवादों के मामलों में हिंसा का रास्ता चुनना सबसे बड़ा अपराध है। ऐसे मामलों में काउंसलिंग, बातचीत या कानूनी रास्ते मौजूद हैं, लेकिन हत्या किसी भी समस्या का समाधान नहीं हो सकती।

यह घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि घर के भीतर पल रहे तनाव कितने खतरनाक रूप ले सकते हैं। बाहर से सामान्य दिखने वाला परिवार अंदर से कितना टूट चुका हो सकता है—इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है।

कानून के जानकारों का कहना है कि यह मामला अदालत में मजबूत माना जाएगा, क्योंकि इसमें बच्चों की गवाही, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और आरोपी का कबूलनामा—तीनों मौजूद हैं। ऐसे में आरोपी को सख्त सजा मिलने की पूरी संभावना है।

कुल मिलाकर, कोरबा की यह घटना सिर्फ एक हत्या की कहानी नहीं है। यह भरोसे के कत्ल, रिश्तों की गिरती मर्यादा और उस दर्दनाक सच्चाई की तस्वीर है, जहां एक पत्नी अपने ही पति की जान ले लेती है और मासूम बच्चे अपनी मां के खिलाफ सच बोलने को मजबूर हो जाते हैं।

यह मामला समाज के लिए एक चेतावनी है—कि रिश्तों में अगर समस्या है, तो उसका हल बातचीत, समझदारी और कानून के जरिए निकाला जाना चाहिए। वरना नतीजा सिर्फ मौत, जेल और टूटे हुए बच्चों का भविष्य बनकर रह जाता है।

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