MCD का बड़ा फैसला: अब गोबर के उपलों से होगा अंतिम संस्कार, 105 सफाई कर्मचारियों को किया गया स्थायी

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दिल्ली नगर निगम (MCD) की बैठक में हाल ही में दो अहम फैसले लिए गए, जिनका सीधा असर पर्यावरण और सफाई कर्मचारियों के भविष्य पर पड़ेगा। इन फैसलों में एक ओर अंतिम संस्कार के लिए गोबर के उपलों के इस्तेमाल से जुड़ा पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने का प्रस्ताव रखा गया, वहीं दूसरी ओर लंबे समय से काम कर रहे 105 सफाई कर्मचारियों को स्थायी करने का निर्णय भी लिया गया।

दिल्ली के मेयर राजा इकबाल सिंह ने बताया कि निगम पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए अंतिम संस्कार की पारंपरिक प्रक्रिया में एक नया विकल्प शुरू करने जा रहा है। इसके तहत कुछ श्मशान घाटों पर पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लकड़ी की जगह गोबर के उपलों का इस्तेमाल किया जाएगा।

मेयर के अनुसार, इस कदम का उद्देश्य पर्यावरण को होने वाले नुकसान को कम करना है। आमतौर पर अंतिम संस्कार में बड़ी मात्रा में लकड़ी का उपयोग किया जाता है, जिससे पेड़ों की कटाई बढ़ती है और वातावरण में धुआं भी अधिक फैलता है। गोबर के उपलों का इस्तेमाल करने से लकड़ी की खपत कम होगी और यह एक अपेक्षाकृत पर्यावरण अनुकूल विकल्प साबित हो सकता है।

नगर निगम का मानना है कि अगर यह पायलट प्रोजेक्ट सफल रहता है तो भविष्य में इसे और अधिक श्मशान घाटों पर लागू किया जा सकता है। इससे न केवल पर्यावरण संरक्षण में मदद मिलेगी बल्कि अंतिम संस्कार की प्रक्रिया को अधिक टिकाऊ और सस्ता भी बनाया जा सकेगा।

इसी बैठक में सफाई कर्मचारियों को लेकर भी एक महत्वपूर्ण फैसला लिया गया। नगर निगम ने 105 सफाई कर्मचारियों को स्थायी करने का निर्णय लिया है। ये कर्मचारी काफी समय से निगम में काम कर रहे थे और लंबे समय से उनकी नौकरी को स्थायी करने की मांग की जा रही थी।

मेयर ने बताया कि पात्र कर्मचारियों को नियमित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इससे कर्मचारियों को नौकरी की सुरक्षा मिलेगी और उन्हें निगम के अन्य स्थायी कर्मचारियों की तरह सुविधाएं भी मिल सकेंगी।

सफाई कर्मचारियों के स्थायी होने से उनके परिवारों को भी आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा मिलेगी। लंबे समय से अस्थायी रूप से काम कर रहे कर्मचारियों के लिए यह फैसला राहत भरा माना जा रहा है।

नगर निगम के इन दोनों फैसलों को अलग-अलग स्तर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एक तरफ पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कदम उठाया गया है, तो दूसरी ओर कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए उन्हें स्थायी किया गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर गोबर के उपलों से अंतिम संस्कार का यह प्रयोग सफल रहता है तो यह पर्यावरण के लिए एक बेहतर विकल्प बन सकता है। वहीं सफाई कर्मचारियों को स्थायी करने का निर्णय निगम प्रशासन की सामाजिक जिम्मेदारी को भी दर्शाता है।

कुल मिलाकर, MCD की इस बैठक में लिए गए फैसले दिल्ली के नागरिक प्रशासन, पर्यावरण और कर्मचारियों के हितों से जुड़े अहम कदम के रूप में देखे जा रहे हैं। आने वाले समय में इन फैसलों का असर शहर के प्रशासनिक ढांचे और पर्यावरणीय पहल पर देखने को मिल सकता है।

 

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