
नेपाल की राजनीति में लगातार बढ़ते संकट के बीच अब देश की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की का नाम अंतरिम सरकार के नेतृत्व के लिए सबसे आगे बताया जा रहा है।
हाल ही में हुए Gen-Z विरोध प्रदर्शनों ने सत्ता समीकरण पूरी तरह बदल दिए हैं। भ्रष्टाचार, सोशल मीडिया बैन और बेरोजगारी के खिलाफ युवाओं के आंदोलन ने प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली को इस्तीफा देने पर मजबूर कर दिया। अशांति के दौरान कई जानें गईं और सरकार को सोशल मीडिया पर लगाया प्रतिबंध भी वापस लेना पड़ा।
ऐसे माहौल में युवाओं और राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि किसी निष्पक्ष और सशक्त चेहरे की जरूरत है। इसी वजह से सुशीला कार्की, जिन्हें उनकी ईमानदार छवि और सख्त फैसलों के लिए जाना जाता है, इस जिम्मेदारी की प्रमुख दावेदार मानी जा रही हैं।
दूसरी ओर, राजधानी काठमांडू के मेयर और युवाओं के बीच बेहद लोकप्रिय बालेन शाह को भी इस भूमिका के लिए प्रस्ताव दिया गया था। लेकिन उन्होंने दिलचस्पी नहीं दिखाई। शाह, जो पहले रैपर भी रह चुके हैं, युवाओं के बीच एक करिश्माई नेता माने जाते हैं, मगर उन्होंने साफ कहा कि वे खुद पद नहीं चाहते, बल्कि युवाओं को राजनीति में आगे आते देखना पसंद करेंगे।
विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर सुशीला कार्की को जिम्मेदारी दी जाती है, तो यह नेपाल की राजनीति में नए दौर की शुरुआत होगी, जहाँ पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर दिया जाएगा। वहीं, शाह का कदम यह दिखाता है कि नई पीढ़ी अब व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा से ज़्यादा सिस्टम में बदलाव को प्राथमिकता दे रही है।