न्यू जर्सी डबल मर्डर केस में लैपटॉप ने खोल दी चौंकाने वाली सच्चाई — अमेरिका ने नजीर हमीद को भारत से प्रत्यर्पित करने की मांग की

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न्यू जर्सी में आठ साल पहले हुए एक दर्दनाक डबल मर्डर मामले ने अब एक नए मोड़ पर पहुँचकर विश्व ध्यान खींचा है। अमेरिकी जांच एजेंसियों ने इस मामले में भारतीय नागरिक नजीर हमीद पर आरोप लगाया है, और अब उनकी प्रत्यर्पण (डिपोर्टेशन) की मांग की जा रही है। यह मुकदमा सिर्फ हत्याकांड तक सीमित नहीं है; इसमें आधुनिक फोरेंसिक विज्ञान, डिजिटल साक्ष्य और अंतरराष्ट्रीय कानूनी लड़ाई की कहानी शामिल है — जिसने इस खौफनाक घटना के पीछे छिपे राज खोल दिए हैं।


 घटना की पृष्ठभूमि और आरोप

मामला मार्च 2017 का है, जब न्यू जर्सी के मैपल शेड इलाके में एक 38 वर्षीय महिला शशिकला नर्रा और उनका छह वर्षीय बेटा अनिश निर्मम तरीके से हत्या किए गए थे। उस वक्त सुरक्षा एजेंसियों ने घटनास्थल पर जैसे ही जांच की, उन्हें खून के कुछ दाग मिले। शुरुआती जांच में यह निष्कर्ष निकाला गया कि उन दागों का खून किसी और व्यक्ति का था — न तो पीड़ितों का, न ही परिवार का।

जांच के बाद संदिग्ध रूप से नजीर हमीद नाम के व्यक्ति का नाम浮 उभरा। उस समय हमीद अमेरिका में काम कर रहा था और न्यू जर्सी में रह रहा था। हत्या के बाद ही वह भारत लौट गया, जिससे उसकी अनुपस्थिति गंभीर सवाल खड़े करती रही।


लैपटॉप और DNA का इस्तेमाल: एक जांच की क्रांतिकारी राह

अमेरिकी अधिकारियों ने जब नजीर हमीद को जांच के दायरे में लिया, तो उन्होंने उसकी कंपनी द्वारा जारी किया गया लैपटॉप जब्त करने का आदेश दिया। यह कदम इसलिए अहम था क्योंकि लैपटॉप में वो डेटा हो सकता था, जिससे अपराध और संदिग्ध की पहचान साफ हो सके।

विश्लेषण टीम ने उस लैपटॉप से DNA सैंपल निकाला, जिसे फिर अपराध स्थल से मिले खून के सैंपल से मिलाया गया। जांच में यह पाया गया कि लैपटॉप में मौजूद जीन सामग्री (DNA) और घटनास्थल का खून मिलते-जुलते थे। यह फोरेंसिक लिंक न सिर्फ केस को फिर जीवित करता है, बल्कि हमीद के खिलाफ आरोपों को और पुख्ता बनाता है।

बीर्लिंगटन काउंटी के अभियोजकों ने कहा कि यह सबूत उनकी मामले की जांच को मजबूत करता है और उन्हें विश्वास है कि वह नाजी़र हमीद पर हत्या का आरोप लगा कर न्याय सुनिश्चित कर सकते हैं।


 प्रत्यर्पण की मांग: भारत-अमेरिका संबंधों में कानूनी लड़ाई

अमेरिका ने नजीर हमीद को भारत से प्रत्यर्पित करने की मांग की है ताकि वह न्याय के कटघरे में आए। उनकी गिरफ्तारी और न्यायिक प्रक्रिया की शुरुआत के लिए दोनों देशों के बीच कानूनी समन्वय और बातचीत आवश्यक हो गई है।

अमेरिकी जांच एजेंसियों ने भारत की संबंधित न्यायिक अथॉरिटीज़ के साथ संपर्क स्थापित किया है और इस मामले में तेजी लाने की अपील भी की है। उनका तर्क है कि यह मामला न सिर्फ न्यू जर्सी का अपराध है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय न्याय और अपराध का मामला है जिसमें हमीद को अमेरिका में जवाब देना चाहिए।


 जाँच की चुनौतियाँ और कानूनी अड़चनें

यह कहना गलत नहीं होगा कि इस तरह का प्रत्यर्पण मामला कानूनी और प्रशासनिक दृष्टि से बेहद जटिल है। निम्नलिखित चुनौतियाँ सामने आ सकती हैं:

  1. क़ानूनी प्रक्रिया की लंबी वक्त सीमा: प्रत्यर्पण में कई बाधाएं होती हैं — दोनों देशों की कानूनी प्रकिया, लंबी सुनवाई, और दायित्वों का मिलान।

  2. नजीर हमीद की प्रतिरक्षा: उन्होंने पहले कहा था कि वह DNA नमूना देने से इनकार करते हैं, जिससे जांच में देरी हो सकती है।

  3. राजनीतिक और कूटनीतिक दबाव: ऐसे मामलों में राजनयिक प्रयासों का भी बड़ा रोल होता है — दोनों देशों के बीच यह देखना होगा कि कैसे सहयोग किया जाए कि न्याय प्रक्रिया निष्पक्ष हो।


 जांच का भविष्य और संभावित निष्कर्ष

अगर प्रत्यर्पण सफल होता है और अमेरिका में हमीद को दोषी पाया जाता है, तो यह एक बड़ा कानूनी और न्यायिक उदाहरण बनेगा। इससे स्पष्ट होगा कि कैसे डिजिटल फोरेंसिक (जैसे लैपटॉप-DNA) का इस्तेमाल जटिल अपराधों में न्याय दिलाने में महत्वपूर्ण हो सकता है।

दूसरी ओर, अगर प्रत्यर्पण या मुकदमेबाजी में देरी होती है, तो यह दर्शाएगा कि अंतरराष्ट्रीय कानूनी प्रक्रियाएँ अभी भी चुनौतिपूर्ण हैं और अपराधियों के लिए एक सुरक्षित ठिकाना बने रहने की संभावना है।


 निष्कर्ष

न्यू जर्सी में हुए उस दुखद दोहरे हत्याकांड की कहानी अब सिर्फ एक पुरानी पहेली नहीं रही — लैपटॉप, डीएनए और आधुनिक फोरेंसिक विज्ञान ने सच को उजागर कर दिया है। नजीर हमीद का मामला यह याद दिलाता है कि अपराध चाहे कितनी दूर या पुरानी क्यों न हो, डिजिटल सबूत और अंतरराष्ट्रीय न्याय संयंत्र उसकी जिम्मेदारी तय कर सकता है।

अब आगे की लड़ाई न्याय की ही होगी — क्या अमेरिका हमीद को वापस लाकर उस अपराध का हिसाब-किताब कर सकेगा? और भारत इस कानूनी जाल में कैसे भागीदारी करेगा? आने वाले समय में ये सवाल अहम साबित होंगे।

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