
ओडिशा विधानसभा ने राज्य के सभी विधायकों के वेतन और भत्तों में बड़ी बढ़ोतरी करते हुए एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है। लंबे समय से चल रही चर्चाओं और प्रस्तावों पर विचार के बाद सदन ने यह निर्णय लिया कि अब ओडिशा के विधायकों को उनकी वर्तमान आय की तुलना में लगभग तीन गुना अधिक वेतन मिलेगा। इसके बाद उनका मासिक पैकेज बढ़कर करीब ₹3.45 लाख हो जाएगा, जो पहले करीब ₹1.11 लाख था।
यह फैसला विधायकों के कार्यभार, बढ़ती महंगाई और उनके निर्वाचन क्षेत्रों में बढ़ते दायित्वों को ध्यान में रखकर लिया गया है। राज्य सरकार ने माना कि आज का राजनीतिक और प्रशासनिक माहौल पहले की तुलना में अधिक चुनौतीपूर्ण हो गया है, और इसके चलते जनप्रतिनिधियों को अपने क्षेत्रों में कई तरह की जिम्मेदारियों का निर्वहन करना होता है। ऐसे में उन्हें मिलने वाले वेतन और भत्तों को समय के अनुरूप अपडेट करना आवश्यक था।
🔹 वेतन वृद्धि में शामिल मुख्य बिंदु
इस वेतन-वृद्धि पैकेज में केवल बेसिक सैलरी ही नहीं, बल्कि विभिन्न भत्तों का भी पुनर्मूल्यांकन किया गया है। नई व्यवस्था के अनुसार —
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विधायकों की बेसिक सैलरी अब लगभग तीन गुना बढ़ाकर अधिक आकर्षक पैकेज बनाया गया है।
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उनको मिलने वाला चुनावी क्षेत्र विकास भत्ता, यात्रा भत्ता, सचिवीय भत्ता, कन्वेयंस अलाउंस, एवं अन्य मासिक सुविधाओं को भी बढ़ाया गया है।
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इन सभी को जोड़कर MLA का कुल मासिक पैकेज बढ़कर लगभग ₹3.45 लाख हो गया है।
सरकार के इस कदम का सबसे बड़ा उद्देश्य यह बताया जा रहा है कि राज्य के विधायकों को आर्थिक रूप से इस योग्य बनाया जाए कि वे बिना व्यक्तिगत आर्थिक दबाव के अपने क्षेत्र में विकास कार्य कर सकें, लोगों से नियमित संपर्क में रहें और संसद/विधानसभा के कार्यों में पूर्ण योगदान दे सकें।
🔹 पूर्व विधायकों की पेंशन में भी बढ़ोतरी
इस निर्णय का असर सिर्फ वर्तमान विधायकों तक सीमित नहीं है। पूर्व विधायकों को मिलने वाली पेंशन और अन्य लाभों में भी बढ़ोतरी की गई है। यह फैसला इसलिए लिया गया कि कई पूर्व MLA अब भी सामाजिक और राजनीतिक जीवन में सक्रिय रहते हैं तथा उनके सामने भी आर्थिक चुनौतियाँ आती हैं। सरकार का मानना है कि पेंशन बढ़ने से वे अपनी जीवन-यापन की जरूरतें बेहतर तरीके से पूरी कर सकेंगे।
🔹 विधानसभा में कैसे पास हुआ प्रस्ताव
वेतन वृद्धि से जुड़े सभी विधेयक एक ही दिन में सदन में पेश किए गए और उन पर विस्तृत चर्चा की गई। बहस के दौरान विभिन्न दलों के विधायकों ने अपना समर्थन जताया। कई सदस्यों का कहना था कि अन्य राज्यों में भी विधायकों के वेतन समय-समय पर महंगाई के अनुसार बढ़ाए जाते हैं, इसलिए ओडिशा में यह कदम देर से ही सही, लेकिन जरूरी था।
अंततः सदन में सहमति से यह बिल पारित कर दिया गया।
🔹 जनता और राजनीतिक विशेषज्ञों की राय
हालाँकि विधानसभा के इस फैसले को सदस्यों ने एक सकारात्मक और व्यावहारिक कदम बताया है, लेकिन जनता और राजनीतिक विशेषज्ञों के बीच इस पर मिले-जुले विचार देखने को मिल रहे हैं।
कई लोग मानते हैं कि जब राज्य में स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क विकास और ग्रामीण कल्याण जैसी कई अहम जरूरतें पूरी तरह से संतुलित नहीं हैं, तब विधायकों का वेतन तीन गुना बढ़ा देना आम जनता पर भार बढ़ाने जैसा लग सकता है।
दूसरी ओर, कुछ विश्लेषक यह भी कह रहे हैं कि बेहतर वेतन मिलने से विधायकों की आर्थिक ईमानदारी और जिम्मेदारी सुनिश्चित होगी। उन्हें अपने कामों के लिए बाहरी स्रोतों पर निर्भर नहीं रहना होगा और वे पूरी ऊर्जा के साथ अपने क्षेत्र के विकास में लग सकेंगे।
🔹 सरकार का तर्क — बढ़ती जिम्मेदारियों के अनुरूप आय
राज्य सरकार ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि आधुनिक राजनीतिक व्यवस्था में विधायकों की गतिविधियाँ और जिम्मेदारियाँ पहले से कहीं अधिक बढ़ गई हैं।
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उन्हें अपने निर्वाचन क्षेत्र के हजारों लोगों से जुड़े रहना पड़ता है।
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अलग-अलग विभागों से समन्वय करते हुए योजनाओं को जमीन पर उतारना होता है।
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विधानसभा सत्रों में भाग लेना, विभिन्न समितियों में कार्य करना और प्रशासनिक मुद्दों का समाधान करना एक बड़ी जिम्मेदारी है।
इन सभी कामों के मद्देनज़र वेतन को आधुनिक मानकों के अनुरूप बढ़ाना उचित था।
🔹 क्या बदलेगा इस फैसले से?
ओडिशा विधानसभा में विधायकों की सैलरी बढ़ने के बाद राज्य में राजनीतिक और प्रशासनिक माहौल पर कई तरह के प्रभाव देखने को मिल सकते हैं —
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विधायकों की आर्थिक स्थिरता बढ़ेगी।
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क्षेत्रीय स्तर पर विकास कार्यों में तेज़ी आ सकती है।
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राजनीतिक पदों को लेकर अधिक योग्य लोग आगे आने के लिए प्रेरित होंगे।
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जनता और विपक्ष दोनों ही सरकार की खर्च नीति पर अधिक निगरानी रखेंगे।
🔹 विपक्ष की प्रतिक्रिया
कुछ विपक्षी नेताओं ने इस फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि राज्य में कई ऐसे सेक्टर हैं जिन्हें आर्थिक सहयोग की ज़रूरत है — जैसे स्कूलों का संसाधन सुधार, ग्रामीण जलापूर्ति योजनाएँ, नौकरी सृजन, स्वास्थ्य सुविधाएँ, आदि। ऐसे में बजट का बड़ा हिस्सा विधायकों के वेतन पर खर्च करना प्राथमिकता नहीं होना चाहिए।
🔹 निष्कर्ष
ओडिशा में विधायकों के वेतन को तीन गुना बढ़ाने का यह फैसला निश्चित रूप से एक बड़ा कदम है। यह विधायकों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करेगा और उन्हें अपने कार्यों पर अधिक फोकस करने में मदद मिल सकती है।
हालाँकि, इस वृद्धि के साथ जवाबदेही, पारदर्शिता, और जन हित को प्राथमिकता देना बेहद ज़रूरी है — क्योंकि जनता की नज़र अब इस बात पर भी होगी कि बढ़ा हुआ वेतन जनता के लिए किस हद तक लाभकारी साबित होता है।