पानीपत की ‘साइको चाची’: जलन में तीन मासूमों की हत्या… खूनी खेल की परतें ऐसे खुलीं

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हरियाणा के पानीपत में सामने आया यह मामला पूरे प्रदेश को झकझोर देने वाला है। यहां एक महिला पूनम द्वारा करीब सात वर्षों की अवधि में तीन मासूम बच्चों की हत्या करने का भयावह खुलासा हुआ है। पुलिस जांच में सामने आया कि यह महिला एक-एक कर उन बच्चों को निशाना बनाती थी, जिनसे वह किसी न किसी वजह से जलन रखती थी। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिन बच्चों की उसने जान ली, वे उसके बेहद करीब—उसके बेटे, भांजी और भतीजी—ही थे। यह मामला न सिर्फ रिश्तों को शर्मसार करता है बल्कि यह भी दिखाता है कि मानसिक विकृति किस हद तक इंसान को खतरनाक बना सकती है।

सात सालों में तीन बच्चों की हत्या का सिलसिला

पानीपत की रहने वाली पूनम की जिंदगी सामान्य लगती थी। पति नौकरी करता था, घर में एक बेटा और फैमिली का साथ था। लेकिन 2017 से 2024 के बीच उसने तीन छोटे बच्चों की हत्या की। पुलिस के अनुसार यह कोई गुस्से में किया गया अपराध नहीं था, बल्कि सोच-समझकर रची गई योजनाएं थीं। हर बार उसने ऐसा माहौल बनाया कि मौतें सामान्य लगें—जैसे खेलते समय गिरकर मर जाना या अचानक तबीयत बिगड़ना। परिवार वाले भी किसी अनहोनी का शक नहीं कर पाए।

लेकिन जब तीसरी हत्या के बाद कई सबूत एक दिशा में जाने लगे, तो परिवार को अचानक शक हुआ और मामला पुलिस तक पहुंचा। इसके बाद खुला वह राज, जिसने सभी को सन्न कर दिया।

पहला शिकार—अपना ही बेटा

सबसे पहले पूनम ने अपने बेटे को मारा। पुलिस के अनुसार, पूनम मानसिक रूप से अस्थिर और अत्यधिक असुरक्षा भाव से ग्रस्त थी। उसे लगता था कि उसका बेटा बड़ा होकर उसे इग्नोर करने लगेगा, या उससे दूर हो जाएगा। इसके अलावा वह चाहती थी कि परिवार में सहानुभूति उसे मिले और सभी उसे भावनात्मक रूप से अहमियत दें।

एक दिन उसने बेटे को ऐसी स्थिति में धकेला, जिससे उसकी सांस रुक गई। परिवारवालों ने इसे हादसा समझकर मान लिया। किसी को अंदाजा तक नहीं था कि एक मां अपने ही बच्चे की जान ले सकती है।

दूसरा शिकार—सुंदर भांजी

कुछ साल बाद उसका ध्यान अपनी भांजी पर गया, जो देखने में बेहद प्यारी और परिवार में सबकी चहेती थी। पूनम उससे जलने लगी। उसे लगता था कि घर-परिवार में अब ध्यान इस बच्ची पर ज्यादा जा रहा है, जबकि वह खुद उपेक्षित महसूस कर रही थी।

एक दिन मौका देखकर उसने बच्ची को घर के पीछे के हिस्से में ले जाकर उसे भी मार डाला। परिवार ने इसे फिर एक दूसरी दुर्घटना मान लिया। किसी को सबसे ज्यादा प्यार करने वाली ‘चाची’ पर कैसे शक होता?

तीसरी हत्या—भतीजी की मौत से खुला राज

तीसरी हत्या ने पूरे मामले की परतें खोल दीं। इस बार पूनम की भतीजी शिकार बनी—एक और मासूम बच्ची, जो सुंदरता और मासूमियत की वजह से सभी की लाड़ली थी। पुलिस के अनुसार, पूनम की मानसिक स्थिति इतनी बिगड़ चुकी थी कि वह अब किसी भी ऐसे बच्चे को दुश्मन की तरह देखने लगी थी, जिसे लोग प्यार करें।

जिस दिन यह बच्ची मरी, परिवार में कई बातें संदिग्ध लगीं। गांव के लोगों ने बताया कि बच्ची पूनम के पास ही आखिरी बार देखी गई थी। बच्ची का गिरना या दम घुटना अब “सामान्य” नहीं लग रहा था।

इस बार परिवार और पुलिस ने गंभीरता से जांच शुरू की और सीसीटीवी, कॉल रिकॉर्ड और पूनम के बयान में कई झूठ पकड़े गए।

पुलिस पूछताछ में टूटी पूनम—कबूल किया सबकुछ

पूछताछ के दौरान पूनम शुरू में बहुत शांत रही, लेकिन जैसे-जैसे पुलिस ने सबूत रखे, वह टूटती चली गई। आखिरकार उसने तीनों हत्याओं का सच कबूल कर लिया।

उसे जब पूछा गया कि उसने ऐसा क्यों किया, तो उसने जो बताया, उसने पुलिस वालों तक के होश उड़ा दिए:

  • बच्चों से जलन होती थी।

  • परिवार में उन्हें ज्यादा प्यार मिलता देखकर वह असहज हो जाती थी।

  • उसका मानना था कि अगर ये बच्चे नहीं रहेंगे, तो सब उसे ध्यान देंगे।

  • किसी भी ‘सुंदर’ बच्चे से उसे आंतरिक नफरत होने लगती थी।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पूनम के भीतर लंबे समय से मानसिक विकार था, जिसे परिवार पहचान नहीं पाया। उसकी सोच धीरे-धीरे एक खतरनाक स्तर तक पहुंच गई।

कैसे करती थी हत्या? पुलिस ने बताया मॉडस ऑपरेंडी

पुलिस जांच में सामने आया कि:

  • वह बच्चों को अकेले में ले जाती थी

  • उन्हें खेल-खेल में ऐसी स्थिति में धकेलती, जहां उनकी सांस रुक सकती थी

  • बोलती थी कि बच्चा अचानक बेहोश हो गया

  • आसपास को ऐसा सेट करती कि दिखे जैसे कोई एक्सीडेंट हुआ हो

इसका तरीका इतना प्लान्ड था कि दो मौतें परिवार को बिल्कुल दुर्घटना लगीं।

परिवार सदमे में—‘हमने कैसे नहीं पहचाना?’

पूनम के पति और दूसरे परिजन सदमे में हैं। उनका कहना है कि उन्हें कभी शक नहीं हुआ कि वह इस हद तक जा सकती है। घर की बुजुर्ग महिलाएं उसे बहुत शांत और घर-माहौल संभालने वाली मानती थीं। वह बच्चों से खेलती भी थी—सबके सामने तो कम से कम ऐसा ही दिखती थी।

परिवार वालों को अब सबसे ज्यादा दर्द इस बात का है कि तीन बच्चों की मौत एक साजिश थी, जिसे वे समझ नहीं पाए।

मनोवैज्ञानिकों की राय—एक विकृत मानसिकता का खतरनाक रूप

मनोचिकित्सकों के अनुसार:

  • यह अत्यधिक जलन और असुरक्षा की स्थिति का गंभीर रूप है

  • ऐसे लोग अचानक ज्यादा खतरनाक हो सकते हैं

  • उन्हें छोटी-छोटी चीजों से भावनात्मक चोट लगती है

  • प्यार और ध्यान पाने की लत अंदर ही अंदर हिंसक रूप ले सकती है

समय रहते उपचार न होने के कारण पूनम की मानसिकता लगातार विकृत होती चली गई।

सामाजिक सवाल—क्या परिवार को संकेत नजर नहीं आए?

यह केस कई सवाल छोड़ता है:

  • क्या परिवारों को मानसिक बदलावों पर अधिक ध्यान देना चाहिए?

  • क्या बच्चों की अचानक मृत्यु को इतनी आसानी से “हादसा” मान लेना ठीक था?

  • क्या समाज मानसिक स्वास्थ्य को अब भी अनदेखा कर रहा है?

पूनम का केस यह भी बताता है कि मानसिक बीमारी कभी-कभी कितनी खतरनाक और हिंसक हो सकती है।

निष्कर्ष—एक ऐसी कहानी जिसे समझना भी मुश्किल

पानीपत की यह घटना सिर्फ एक क्राइम स्टोरी नहीं, बल्कि एक चेतावनी है कि इंसानी रिश्तों के भीतर ऐसी दरारें भी हो सकती हैं, जिन्हें हम अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं। तीन मासूम जीवन जिन्होंने इंसानी बर्बरता का शिकार होकर दुनिया को अलविदा कहा—ये सिर्फ आंकड़े नहीं, बल्कि एक ऐसे दर्द की याद दिलाते हैं जिसे शब्दों में बयान करना मुश्किल है।

पूनम गिरफ्तार है और कानून अपना काम करेगा, लेकिन परिवार और समाज के घाव शायद लंबे समय तक भर नहीं पाएंगे।

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