सऊदी अरब–पाकिस्तान रक्षा समझौते पर पाकिस्तान की बयानबाज़ी: ‘भारत का हमला मतलब सऊदी पर हमला’, नया NATO बनाने का दावा

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सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच हाल ही में हुए रक्षा समझौते को लेकर पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सनसनीखेज दावे करना शुरू कर दिया है। इस्लामाबाद की ओर से यह नैरेटिव गढ़ा जा रहा है कि अगर भारत ने पाकिस्तान पर हमला किया तो उसे सऊदी अरब पर हमला माना जाएगा। पाकिस्तान इस करार को “नए NATO” जैसी सैन्य संरचना का रूप देकर दुनिया को गुमराह करने की कोशिश कर रहा है।


इशाक डार का विवादित बयान

पाकिस्तान के वित्त मंत्री और वरिष्ठ नेता इशाक डार ने सार्वजनिक रूप से कहा कि सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच हुआ म्यूचुअल डिफेंस एग्रीमेंट ऐतिहासिक है। उनके मुताबिक, इस समझौते के बाद अब यदि भारत पाकिस्तान पर सैन्य कार्रवाई करता है, तो उसे सऊदी अरब की सुरक्षा पर सीधा हमला माना जाएगा। डार ने इसे सामूहिक सुरक्षा तंत्र जैसा करार देते हुए NATO के समानांतर दिखाने की कोशिश की।


समझौते की असलियत

विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान के दावों में कोई ठोस आधार नहीं है। यह समझौता मूल रूप से रक्षा प्रशिक्षण, सैन्य सहयोग और सुरक्षा साझेदारी को मजबूत करने तक सीमित है। इसमें ऐसा कोई प्रावधान नहीं है कि एक देश पर हमले को दूसरे देश पर हमला माना जाएगा या फिर सामूहिक सैन्य कार्रवाई की जाएगी। यानी पाकिस्तान का यह दावा राजनीतिक और कूटनीतिक तौर पर अतिशयोक्ति ही है।


पाकिस्तान का मकसद क्या है?

विश्लेषकों के मुताबिक, पाकिस्तान इस रक्षा समझौते को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहा है ताकि भारत विरोधी माहौल बनाया जा सके और घरेलू राजनीति में अपनी स्थिति मजबूत की जा सके। आर्थिक संकट और राजनीतिक अस्थिरता से जूझ रही पाक सरकार ऐसे बयानों के जरिए यह संदेश देना चाहती है कि उसे सऊदी अरब जैसा ताकतवर सहयोगी मिला है। इससे घरेलू स्तर पर जनता को भरोसा दिलाना आसान होगा कि पाकिस्तान अकेला नहीं है।


भारत की प्रतिक्रिया

भारत की ओर से अभी तक पाकिस्तान के इस बयान पर आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। लेकिन भारतीय रणनीतिक विशेषज्ञ मानते हैं कि पाकिस्तान की यह बयानबाज़ी केवल “प्रचार युद्ध” का हिस्सा है। उनका कहना है कि भारत के सऊदी अरब के साथ भी गहरे आर्थिक और रणनीतिक संबंध हैं, इसलिए पाकिस्तान के दावों से क्षेत्रीय समीकरणों पर कोई वास्तविक असर नहीं पड़ेगा।


निष्कर्ष

पाकिस्तान की ओर से किया जा रहा “नए NATO” का दावा न केवल भ्रामक है बल्कि कूटनीतिक दृष्टि से भी अव्यावहारिक है। सऊदी–पाक रक्षा समझौता वास्तव में सामान्य सहयोग का हिस्सा है, लेकिन इस्लामाबाद इसे अपनी राजनीतिक और सामरिक मजबूती के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत करने की कोशिश कर रहा है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय पाकिस्तान के इस दावे को कितनी गंभीरता से लेगा, यह संदेहास्पद है।

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