
अमेरिका की सर्वोच्च न्यायिक संस्था Supreme Court of the United States ने पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को बड़ा झटका देते हुए उनके द्वारा लगाए गए कुछ टैरिफ कदमों को अवैध ठहराया है। अदालत ने कहा कि राष्ट्रपति के पास उन परिस्थितियों में एकतरफा टैरिफ लागू करने का वैधानिक अधिकार नहीं था।
क्या था मामला?
ट्रंप प्रशासन ने राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक हितों का हवाला देते हुए कई देशों पर अतिरिक्त आयात शुल्क (टैरिफ) लगाया था। यह कदम अमेरिकी उद्योगों को संरक्षण देने और व्यापार घाटा कम करने के उद्देश्य से उठाया गया बताया गया था।
मामला अदालत तक पहुंचा, जहां यह सवाल उठा कि क्या राष्ट्रपति को कांग्रेस की अनुमति के बिना ऐसे व्यापक टैरिफ लगाने का अधिकार है।
अदालत का क्या कहना है?
सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया कि कार्यपालिका (Executive) की शक्तियां सीमित हैं और व्यापार नीति जैसे बड़े फैसलों में विधायिका (Congress) की भूमिका अहम है।
अदालत ने कहा कि कानून के तहत दिए गए अधिकारों की सीमा से बाहर जाकर टैरिफ लागू नहीं किए जा सकते।
क्या होगा असर?
1️⃣ व्यापार नीति पर प्रभाव
फैसले से भविष्य में राष्ट्रपति के टैरिफ निर्णयों पर संवैधानिक सीमाएं स्पष्ट होंगी।
2️⃣ अंतरराष्ट्रीय व्यापार संबंध
जिन देशों पर अतिरिक्त शुल्क लगाया गया था, वे अब राहत की उम्मीद कर सकते हैं।
3️⃣ घरेलू उद्योगों पर असर
कुछ उद्योग, जो टैरिफ संरक्षण पर निर्भर थे, उन्हें नई रणनीति बनानी पड़ सकती है।
राजनीतिक प्रतिक्रिया
रिपब्लिकन और डेमोक्रेट नेताओं के बीच इस फैसले को लेकर बहस तेज हो गई है। समर्थकों का कहना है कि यह संवैधानिक संतुलन का उदाहरण है, जबकि आलोचक इसे कार्यपालिका की शक्ति पर अंकुश मान रहे हैं।
आगे की राह
संभव है कि मामला निचली अदालतों में आगे की प्रक्रिया या नए विधायी प्रस्तावों के जरिए जारी रहे। कांग्रेस यदि चाहे तो नए कानून बनाकर टैरिफ अधिकारों को स्पष्ट कर सकती है।
निष्कर्ष
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला राष्ट्रपति की व्यापारिक शक्तियों पर महत्वपूर्ण सीमा रेखा खींचता है। डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ कदम को गैरकानूनी करार देने से अमेरिकी व्यापार नीति और राजनीतिक विमर्श दोनों पर दूरगामी असर पड़ सकता है।