
उत्तराखंड के पौड़ी जिले में तेंदुए के हमले की एक और दर्दनाक घटना सामने आई है। जंगल में घास काटने गई एक बुजुर्ग महिला पर तेंदुए ने घात लगाकर हमला कर दिया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। देर शाम जब वह घर नहीं लौटी तो ग्रामीणों ने तलाश शुरू की और कुछ ही दूरी पर उसका लहूलुहान शव बरामद हुआ। घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत फैल गई है।
यह हादसा पौड़ी गढ़वाल जिले के स्यांसू गांव के पास हुआ। मृतका की पहचान 62 वर्षीय कांति देवी के रूप में की गई है। जानकारी के मुताबिक, कांति देवी रोज की तरह गुरुवार सुबह जंगल में चारा और घास काटने के लिए गई थीं, लेकिन कई घंटे बीत जाने के बाद भी वह वापस नहीं लौटीं।
तेंदुए ने किया बर्बर हमला
ग्रामीणों ने बताया कि जब वे उन्हें खोजते हुए जंगल के अंदर पहुंचे तो कुछ ही दूरी पर खून से सना दरांती और फटा हुआ दुपट्टा दिखाई दिया। इसके बाद करीब 200 मीटर आगे जाकर कांति देवी का शव पड़ा मिला, जिसके शरीर पर तेंदुए के पंजों और दांतों के निशान साफ दिख रहे थे।
स्थानीय लोगों के अनुसार, तेंदुए ने महिला पर पीछे से हमला किया और उसे काफी दूर तक घसीट कर ले गया। ये इलाका पहले से ही मेन-ईटर जोन (आदमी खाने वाले तेंदुए का इलाका) घोषित है। पिछले तीन महीनों में यहां तेंदुए के हमले की यह पांचवीं घटना है।
गांव में मातम और डर का माहौल
घटना के बाद स्यांसू गांव और आसपास के इलाकों में भय और गुस्से का माहौल है। ग्रामीणों ने वन विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि पिछले कई महीनों से वे लगातार तेंदुए की आवाजाही की शिकायत कर रहे थे, लेकिन विभाग ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
कांति देवी के परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। उनका बेटा देहरादून में मजदूरी करता है और हादसे की खबर सुनकर गांव के लिए रवाना हो गया। ग्रामीणों ने मांग की है कि पीड़ित परिवार को मुआवजा दिया जाए और इलाके में पिंजरा लगाकर तेंदुए को पकड़ा जाए।
वन विभाग ने शुरू की तलाशी
सूचना मिलते ही वन विभाग और स्थानीय पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। टीम ने घटना स्थल का मुआयना किया और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। वन क्षेत्राधिकारी ने बताया कि इलाके में ट्रैप कैमरे और पिंजरे लगाए जा रहे हैं ताकि तेंदुए को पकड़ा जा सके।
उन्होंने कहा,
“यह इलाका घना जंगल होने के कारण तेंदुओं की आवाजाही सामान्य है। हम जल्द ही उस तेंदुए की पहचान कर उसे सुरक्षित पकड़ने की कोशिश कर रहे हैं।”
टीम ने आसपास के ग्रामीणों को सतर्क रहने और अकेले जंगल न जाने की सलाह दी है।
उत्तराखंड में बढ़ता मानव-वन्यजीव संघर्ष
उत्तराखंड के कई पहाड़ी जिलों में मानव-वन्यजीव संघर्ष तेजी से बढ़ रहा है। पौड़ी, टिहरी, नैनीताल और अल्मोड़ा जैसे जिलों में तेंदुए और गुलदारों के हमले आम होते जा रहे हैं। वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि जंगलों में भोजन और क्षेत्रीय सीमाओं की कमी के चलते तेंदुए अब गांवों के पास आने लगे हैं।
पिछले एक साल में राज्य में 30 से अधिक लोग तेंदुए के हमले में मारे जा चुके हैं, जबकि सैकड़ों मवेशी इनका शिकार बन चुके हैं।
प्रशासन ने मुआवजा देने का आश्वासन दिया
पौड़ी के जिलाधिकारी ने कहा कि प्रशासन पीड़ित परिवार को वन्यजीव मुआवजा योजना के तहत ₹5 लाख की आर्थिक सहायता देगा। साथ ही, वन विभाग को तेंदुए को पकड़ने के लिए विशेष टीम गठित करने के निर्देश दिए गए हैं।
उन्होंने कहा कि गांवों में जागरूकता अभियान चलाया जाएगा और बच्चों व बुजुर्गों को अकेले जंगल न जाने की सख्त हिदायत दी जाएगी।
निष्कर्ष
कांति देवी की मौत ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या पहाड़ों में इंसान और जंगलों के बीच संतुलन अब खत्म हो गया है? जिस जंगल से गांव के लोग अपनी रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करते हैं, वहीं अब उनका सबसे बड़ा डर बन चुका है।
स्थानीय लोग मांग कर रहे हैं कि राज्य सरकार जल्द से जल्द स्थायी समाधान निकाले, ताकि इंसान और वन्यजीव दोनों सुरक्षित रह सकें।