वाराणसी में स्कूल प्रिंसिपल पर गंभीर आरोप: ग्रामीणों के विरोध के बीच पुलिस ने हिरासत में लिया

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उत्तर प्रदेश के वाराणसी के पिसौर गांव स्थित एक प्राथमिक विद्यालय के प्रिंसिपल पर छात्राओं के साथ कथित तौर पर अनुचित व्यवहार करने का आरोप लगा है। मामला सामने आने के बाद गांव में आक्रोश फैल गया और बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने स्कूल का घेराव कर दिया। तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए पुलिस को मौके पर पहुंचना पड़ा और आरोपी को सुरक्षा घेरे में लेकर बाहर निकाला गया।


क्या है पूरा मामला?

ग्रामीणों का आरोप है कि स्कूल के प्रिंसिपल छात्राओं को बहलाने-फुसलाने के बहाने अपने कक्ष में बुलाते थे और उनके साथ अनुचित हरकत करते थे। यह बात तब सामने आई जब कुछ बच्चियों ने घर जाकर अपने परिजनों को घटना की जानकारी दी।

परिजनों ने अन्य ग्रामीणों के साथ मिलकर स्कूल पहुंचकर विरोध जताया और आरोपी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।


स्कूल का घेराव, बढ़ा तनाव

मामले की खबर फैलते ही सैकड़ों ग्रामीण स्कूल परिसर में इकट्ठा हो गए। आक्रोशित भीड़ ने आरोपी के खिलाफ नारेबाजी की और गिरफ्तारी की मांग की। स्थिति को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया गया।

तनाव को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने आरोपी को भीड़ से बचाते हुए हिरासत में लिया। सुरक्षा कारणों से उसे हेलमेट पहनाकर बाहर ले जाया गया, ताकि किसी तरह की झड़प न हो।


पुलिस की कार्रवाई

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर लिया गया है और जांच शुरू कर दी गई है। बच्चियों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया अपनाई जा रही है।

अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो कठोर कार्रवाई की जाएगी।


शिक्षा व्यवस्था पर सवाल

इस घटना ने स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अभिभावकों का कहना है कि शिक्षा संस्थानों में ऐसे मामलों की रोकथाम के लिए सख्त निगरानी और जवाबदेही जरूरी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों की सुरक्षा के लिए नियमित जागरूकता कार्यक्रम और शिकायत तंत्र को मजबूत करना आवश्यक है।


प्रशासन की प्रतिक्रिया

स्थानीय प्रशासन ने कहा है कि मामले की निष्पक्ष जांच होगी और दोषी पाए जाने पर कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी। साथ ही स्कूल प्रबंधन की भूमिका की भी जांच की जा रही है।


निष्कर्ष

वाराणसी के पिसौर गांव में सामने आया यह मामला बेहद गंभीर है। ग्रामीणों के विरोध और पुलिस कार्रवाई के बाद अब जांच की दिशा तय करेगी कि आरोपों में कितनी सच्चाई है।

बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए, और ऐसे मामलों में त्वरित एवं सख्त कार्रवाई जरूरी है।

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