
उत्तर प्रदेश के संभल में भड़की हिंसा के पीछे छिपे मास्टरमाइंड की पहचान अब धीरे-धीरे सामने आ रही है। जिस नाम ने पुलिस और खुफिया एजेंसियों की नींद उड़ा रखी है, वह है शारिक साठा। आज प्रशासन उसके घर की कुर्की की कार्रवाई करने जा रहा है। बताया जा रहा है कि शारिक इस समय दुबई में छिपा हुआ है और उसके तार न सिर्फ देश के भीतर, बल्कि पाकिस्तान तक जुड़े होने के संकेत मिले हैं। यह मामला अब सिर्फ स्थानीय हिंसा का नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय साजिश के शक तक पहुंच चुका है।
संभल में हुई हिंसा ने पूरे इलाके को हिला कर रख दिया था। अचानक भड़की आगजनी, पत्थरबाजी और संगठित उपद्रव ने यह साफ कर दिया था कि यह कोई सामान्य भीड़ का उग्र रूप नहीं था, बल्कि इसके पीछे किसी सोची-समझी साजिश का हाथ था। जांच आगे बढ़ी तो पुलिस की नजर शारिक साठा पर जाकर टिक गई, जिसे इस हिंसा का मास्टरमाइंड माना जा रहा है।
पुलिस के अनुसार, शारिक साठा पहले भी कई आपराधिक मामलों में शामिल रहा है। उसकी क्राइम कुंडली में हत्या, रंगदारी, अवैध वसूली और गैंग संचालन जैसे गंभीर आरोप दर्ज हैं। वह लंबे समय से पुलिस की वांछित सूची में शामिल था, लेकिन गिरफ्तारी से बचता रहा। हाल के वर्षों में वह विदेश भाग गया और दुबई में बैठकर अपने नेटवर्क को संचालित करने लगा।
जांच में सामने आया है कि संभल हिंसा के दौरान जमीन पर जो लोग सक्रिय थे, वे शारिक के सीधे संपर्क में थे। हिंसा भड़काने, भीड़ जुटाने और हथियारों की व्यवस्था तक के तार उसी से जुड़े होने के संकेत मिले हैं। पुलिस का कहना है कि हिंसा के समय शारिक खुद मौके पर मौजूद नहीं था, लेकिन मोबाइल और डिजिटल माध्यमों से वह लगातार निर्देश दे रहा था।
सबसे गंभीर पहलू तब सामने आया, जब जांच एजेंसियों को उसके पाकिस्तान कनेक्शन के सुराग मिले। शुरुआती जांच में कुछ ऐसे कॉल रिकॉर्ड, मैसेज और फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन सामने आए हैं, जो सीमा पार संपर्क की ओर इशारा करते हैं। हालांकि, इस कनेक्शन की पूरी पुष्टि अभी जांच के दायरे में है, लेकिन एजेंसियां इसे बेहद संवेदनशील मामला मान रही हैं।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, शारिक का नेटवर्क सिर्फ अपराध तक सीमित नहीं है, बल्कि उसका इस्तेमाल साम्प्रदायिक तनाव भड़काने और कानून-व्यवस्था बिगाड़ने के लिए भी किया गया। संभल की हिंसा इसी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है। यही वजह है कि अब इस केस में सिर्फ स्थानीय पुलिस ही नहीं, बल्कि खुफिया एजेंसियां भी सक्रिय हो चुकी हैं।
आज होने वाली कुर्की की कार्रवाई इस पूरे मामले में एक अहम मोड़ मानी जा रही है। प्रशासन ने शारिक साठा की अवैध रूप से अर्जित संपत्तियों की पहचान कर ली है और अदालत से अनुमति लेकर उसके घर और अन्य ठिकानों को जब्त किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई सिर्फ एक व्यक्ति के खिलाफ नहीं, बल्कि संगठित अपराध और हिंसा के पूरे नेटवर्क के खिलाफ संदेश है।
कुर्की की कार्रवाई का मकसद सिर्फ संपत्ति जब्त करना नहीं, बल्कि आरोपी पर मानसिक और आर्थिक दबाव बनाना भी है, ताकि वह या तो सरेंडर करे या फिर उसके नेटवर्क की रीढ़ टूटे। पुलिस का मानना है कि विदेश में बैठे अपराधी अक्सर भारत में मौजूद अपनी संपत्तियों के सहारे ही नेटवर्क चलाते हैं। जब यह आधार छिन जाता है, तो उनका पूरा सिस्टम कमजोर पड़ जाता है।
शारिक की क्राइम कुंडली पर नजर डालें तो उसकी आपराधिक यात्रा कई साल पुरानी है। शुरुआत छोटे-मोटे अपराधों से हुई, लेकिन धीरे-धीरे वह संगठित गिरोह का सरगना बन गया। स्थानीय स्तर पर उसका खौफ इतना था कि कई लोग उसके खिलाफ गवाही देने से भी डरते थे। यही डर उसके नेटवर्क की सबसे बड़ी ताकत बना।
संभल हिंसा के बाद पुलिस ने जब गहराई से जांच शुरू की, तो कई पुराने मामले भी दोबारा खुलने लगे। जिन मामलों में पहले ठोस सबूत नहीं मिल पाए थे, अब नए गवाह और डिजिटल साक्ष्य सामने आने लगे हैं। इससे साफ हो गया है कि शारिक सिर्फ एक घटना का आरोपी नहीं, बल्कि लंबे समय से अपराध की दुनिया का बड़ा खिलाड़ी रहा है।
राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी यह मामला चर्चा का विषय बन गया है। कई नेताओं ने मांग की है कि अगर पाकिस्तान कनेक्शन की पुष्टि होती है, तो इसे देश की सुरक्षा से जुड़ा मामला मानकर सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि ऐसी साजिशें सिर्फ कानून-व्यवस्था नहीं, बल्कि राष्ट्रीय एकता के लिए भी खतरा होती हैं।
वहीं, प्रशासन का कहना है कि वह किसी भी नतीजे पर पहुंचने से पहले पुख्ता सबूत जुटा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, जल्दबाजी में कोई बयान देना जांच को कमजोर कर सकता है। इसलिए हर डिजिटल लिंक, बैंक ट्रांजैक्शन और कॉल डिटेल की बारीकी से जांच की जा रही है।
इस पूरे मामले ने यह भी दिखा दिया है कि आज अपराध सिर्फ गली-मोहल्लों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का हिस्सा बन चुका है। दुबई जैसे शहरों से बैठकर भारत में हिंसा भड़काना अब एक नई चुनौती बन गया है, जिससे निपटने के लिए पुलिस और एजेंसियों को नई रणनीति अपनानी पड़ रही है।
स्थानीय लोगों के लिए यह कार्रवाई उम्मीद की किरण बनकर आई है। संभल हिंसा के बाद इलाके में डर और असुरक्षा का माहौल बना हुआ था। लोग चाहते हैं कि असली दोषियों को सजा मिले, ताकि भविष्य में कोई और शारिक साठा उनके शहर को आग में न झोंक सके।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि अगर शारिक के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय साजिश और विदेशी कनेक्शन के ठोस सबूत मिलते हैं, तो उस पर कड़े गैर-जमानती धाराओं में मुकदमा चलेगा। इसके साथ ही उसे भारत लाने के लिए प्रत्यर्पण की प्रक्रिया भी शुरू की जा सकती है।
फिलहाल, आज की कुर्की की कार्रवाई पर पूरे प्रदेश की नजरें टिकी हैं। यह सिर्फ एक घर की कुर्की नहीं, बल्कि उस नेटवर्क पर पहली बड़ी चोट मानी जा रही है, जिसने संभल को हिंसा की आग में झोंक दिया था।
कुल मिलाकर, शारिक साठा का मामला यह दिखाता है कि हिंसा अक्सर अचानक नहीं होती, बल्कि उसके पीछे सालों की तैयारी, नेटवर्क और साजिश छिपी होती है। अब देखना यह है कि जांच एजेंसियां इस साजिश की पूरी परतें कितनी जल्दी खोल पाती हैं और क्या सच में संभल हिंसा के पीछे का मास्टरमाइंड कानून के शिकंजे तक लाया जा सकेगा या नहीं।