AI वीडियो पर सियासी तूफान: कांग्रेस प्रवक्ता रागिनी नायक के पोस्ट से भड़की BJP, बोली- OBC प्रधानमंत्री को स्वीकार नहीं कर पा रही कांग्रेस

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देश की सियासत में एक बार फिर AI वीडियो को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। इस बार विवाद की जड़ बनी हैं कांग्रेस की प्रवक्ता रागिनी नायक, जिन्होंने सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का चाय बेचते हुए दिखाने वाला एक AI वीडियो पोस्ट किया। इस वीडियो के सामने आते ही भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला और इसे OBC समाज के अपमान से जोड़ते हुए बड़ा सियासी मुद्दा बना दिया

बीजेपी का आरोप है कि कांग्रेस आज भी एक पिछड़े वर्ग से आने वाले प्रधानमंत्री को स्वीकार नहीं कर पा रही, और उसी मानसिकता के तहत इस तरह के वीडियो साझा किए जा रहे हैं। वहीं कांग्रेस इस पूरे मामले को राजनीतिक व्यंग्य और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जोड़कर देख रही है।


📱 क्या है पूरा मामला?

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर कांग्रेस प्रवक्ता रागिनी नायक ने एक वीडियो साझा किया, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चाय बेचते हुए दिखाया गया। यह वीडियो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से बनाया गया था। वीडियो के साथ किए गए कैप्शन को बीजेपी ने अपमानजनक, वर्गभेदी और राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित बताया।

वीडियो के वायरल होते ही बीजेपी नेताओं और समर्थकों ने इसे डीपफेक और डिजिटल छेड़छाड़ का मामला बताते हुए कड़ी प्रतिक्रिया दी।


🔥 BJP का तीखा हमला

बीजेपी ने इस पूरे मामले में कांग्रेस पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं—

  1. OBC विरोधी मानसिकता का आरोप:
    बीजेपी नेताओं ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी एक गरीब परिवार से निकलकर देश के प्रधानमंत्री बने हैं। उनका चाय बेचना संघर्ष की कहानी है, लेकिन कांग्रेस उसे तंज और मजाक का विषय बना रही है, जो उनकी OBC विरोधी सोच को दर्शाता है।

  2. AI और डीपफेक के दुरुपयोग का आरोप:
    बीजेपी का कहना है कि कांग्रेस तकनीक का उपयोग सियासी मर्यादा तोड़ने के लिए कर रही है।

  3. महिलाओं को मोहरा बनाने का हमला:
    कुछ बीजेपी नेताओं ने यह भी कहा कि कांग्रेस जान-बूझकर महिला नेताओं के जरिए ऐसे विवादित पोस्ट करवा रही है ताकि सहानुभूति बटोरी जा सके।


🗣️ BJP प्रवक्ताओं की प्रतिक्रिया

बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ताओं ने कहा कि—

  • यह वीडियो पीएम मोदी के संघर्ष और गरीब पृष्ठभूमि का मजाक उड़ाने की कोशिश है।

  • कांग्रेस आज भी राजनीतिक वंशवाद और अभिजात्य वर्ग की मानसिकता से बाहर नहीं निकल पाई है।

  • यह वीडियो सिर्फ पीएम मोदी पर नहीं, बल्कि करोड़ों मेहनतकश लोगों पर भी हमला है।


🏛️ कांग्रेस का पक्ष क्या है?

इस पूरे विवाद पर कांग्रेस की तरफ से यह तर्क दिया गया है कि—

  • यह वीडियो राजनीतिक व्यंग्य (Political Satire) के तौर पर देखा जाना चाहिए।

  • इसमें किसी जाति या समाज का अपमान करने का इरादा नहीं था।

  • बीजेपी जानबूझकर इसे OBC मुद्दे से जोड़कर भावनात्मक राजनीति कर रही है।

कुछ कांग्रेस नेताओं ने यह भी कहा कि बीजेपी असली मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए इस तरह के विवाद खड़े कर रही है


⚖️ AI और डीपफेक से जुड़ा बढ़ता खतरा

यह मामला एक बार फिर यह दिखाता है कि AI और डीपफेक तकनीक किस तरह से राजनीति में नए विवाद पैदा कर रही है।

विशेषज्ञों के अनुसार—

  • AI से बनाए गए वीडियो आम जनता को गुमराह कर सकते हैं

  • इससे किसी भी व्यक्ति की छवि को मिनटों में बदल दिया जा सकता है

  • चुनावी दौर में यह तकनीक प्रचार का बड़ा हथियार बन सकती है

सरकार पहले ही कई बार चेतावनी दे चुकी है कि डीपफेक कंटेंट लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा बन सकता है


🗳️ चुनावी सियासत से जुड़ा मुद्दा

यह विवाद ऐसे समय पर सामने आया है जब देश में लगातार चुनावी माहौल बना हुआ है। ऐसे में—

  • बीजेपी इस मुद्दे को पीएम मोदी के संघर्ष और OBC सम्मान से जोड़ रही है

  • कांग्रेस इसे राजनीतिक व्यंग्य और सरकार की आलोचना के अधिकार से जोड़ रही है

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह विवाद आने वाले दिनों में और बड़ा रूप ले सकता है, खासकर तब जब विपक्ष और सत्ता पक्ष दोनों इसे भावनात्मक मुद्दा बना रहे हैं।


📊 सोशल मीडिया पर दो धड़ों में बंटी जनता

सोशल मीडिया पर इस वीडियो को लेकर जनता दो हिस्सों में बंटी नजर आ रही है—

🔹 BJP समर्थक:

  • इसे गरीब और OBC समाज का अपमान बता रहे हैं

  • कांग्रेस पर अभिजात्य सोच का आरोप लगा रहे हैं

🔹 कांग्रेस समर्थक:

  • इसे सत्ताधारी सरकार के खिलाफ व्यंग्य बता रहे हैं

  • बीजेपी पर हर मुद्दे को जाति से जोड़ने का आरोप लगा रहे हैं


👩‍⚖️ क्या हो सकती है कानूनी कार्रवाई?

कई बीजेपी नेताओं ने संकेत दिए हैं कि अगर जरूरत पड़ी तो इस मामले में कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है, क्योंकि—

  • AI वीडियो से किसी व्यक्ति की छवि खराब करना साइबर अपराध की श्रेणी में आ सकता है

  • चुनावी दौर में इस तरह का कंटेंट आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन भी माना जा सकता है

हालांकि, अभी तक किसी आधिकारिक FIR की पुष्टि नहीं हुई है।


🧠 विशेषज्ञों की राय

राजनीति और टेक्नोलॉजी विशेषज्ञों का मानना है कि—

  • भविष्य में AI आधारित विवाद और बढ़ेंगे

  • सभी राजनीतिक दलों को इस पर स्पष्ट नीति बनानी होगी

  • सिर्फ विरोध नहीं, बल्कि नियमन (Regulation) भी जरूरी है


✅ निष्कर्ष

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का AI से बनाया गया चाय बेचने वाला वीडियो एक साधारण सोशल मीडिया पोस्ट नहीं रह गया है, बल्कि यह अब जाति, वर्ग, सम्मान और तकनीक के दुरुपयोग से जुड़ा बड़ा राजनीतिक विवाद बन चुका है।
बीजेपी इसे OBC समाज के अपमान के रूप में देख रही है, जबकि कांग्रेस इसे राजनीतिक व्यंग्य और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बता रही है।

यह मामला साफ तौर पर दिखाता है कि AI तकनीक सिर्फ सुविधाओं का साधन नहीं रही, बल्कि अब यह सियासत का नया हथियार भी बन चुकी है। आने वाले दिनों में यह विवाद संसद से लेकर सोशल मीडिया और संभवतः अदालत तक भी पहुंच सकता है।

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