बांग्लादेश में सियासी हिंसा: शेख हसीना के कट्टर विरोधी शरीफ उस्मान हादी पर दिनदहाड़े हमला, सिर में मारी गई गोली

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बांग्लादेश की राजधानी ढाका एक बार फिर सियासी हिंसा से दहल उठी है। दिनदहाड़े हुए एक सनसनीखेज हमले में प्रधानमंत्री शेख हसीना के कट्टर विरोधी और निर्दलीय सांसद उम्मीदवार शरीफ उस्मान हादी को गोली मार दी गई। यह हमला ढाका के पॉल्टन इलाके में हुआ, जहां व्यस्त सड़कों और आम नागरिकों की मौजूदगी के बीच हमलावरों ने बेखौफ होकर इस वारदात को अंजाम दिया। इस घटना ने न केवल बांग्लादेश की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि देश में चुनावी माहौल को लेकर भी गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, शरीफ उस्मान हादी किसी कार्यक्रम से निकलकर सड़क से गुजर रहे थे, तभी अचानक अज्ञात हमलावरों ने उन पर फायरिंग कर दी। बताया जा रहा है कि गोली सीधे उनके सिर में लगी, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए। गोली चलने की आवाज सुनते ही इलाके में अफरा-तफरी मच गई। लोग इधर-उधर भागने लगे और कुछ ही देर में घटनास्थल पर भारी भीड़ जमा हो गई। हमलावर वारदात को अंजाम देने के बाद मौके से फरार हो गए।

घायल हादी को तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी हालत नाजुक बताई जा रही है। डॉक्टरों के मुताबिक, सिर में गोली लगना बेहद गंभीर मामला है और अगले कुछ घंटे उनकी स्थिति के लिहाज से अहम माने जा रहे हैं। अस्पताल के बाहर उनके समर्थकों और परिवारजनों की भीड़ जमा हो गई, जिनमें गुस्सा और चिंता दोनों साफ झलक रहे थे।

शरीफ उस्मान हादी बांग्लादेश की राजनीति में एक मुखर और विवादास्पद चेहरा माने जाते हैं। वे लंबे समय से प्रधानमंत्री शेख हसीना और उनकी पार्टी की नीतियों के तीखे आलोचक रहे हैं। हाल ही में उन्होंने आगामी चुनावों में निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर उतरने का ऐलान किया था, जिसके बाद से उनकी सक्रियता और बयानबाजी और तेज हो गई थी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यही वजह उन्हें निशाना बनाए जाने के पीछे हो सकती है।

इस हमले के बाद बांग्लादेश की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। विपक्षी दलों ने इसे राजनीतिक साजिश करार देते हुए सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि चुनाव से पहले विरोधी आवाजों को डराने और दबाने की कोशिश की जा रही है। वहीं, सत्तारूढ़ पक्ष ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना सरकार की प्राथमिकता है और दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा।

पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने मामले की जांच शुरू कर दी है। घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है और हमलावरों की पहचान के प्रयास किए जा रहे हैं। पुलिस का कहना है कि शुरुआती जांच में यह हमला सुनियोजित लग रहा है। हमलावरों ने भीड़भाड़ वाले इलाके को चुना, जिससे साफ होता है कि वे दहशत फैलाना चाहते थे।

यह घटना ऐसे समय पर हुई है, जब बांग्लादेश में राजनीतिक माहौल पहले से ही तनावपूर्ण बना हुआ है। चुनाव नजदीक आते ही हिंसा, धमकी और टकराव की घटनाएं बढ़ने लगी हैं। राजनीतिक रैलियों और सभाओं के दौरान झड़पें आम होती जा रही हैं। शरीफ उस्मान हादी पर हमला इसी बढ़ती अस्थिरता का एक और उदाहरण माना जा रहा है।

मानवाधिकार संगठनों और अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों ने भी इस घटना पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग लेने वाले नेताओं और उम्मीदवारों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है। अगर इस तरह की घटनाएं जारी रहीं, तो यह न सिर्फ चुनावों की निष्पक्षता पर सवाल उठाएगा, बल्कि आम नागरिकों के मन में भी डर पैदा करेगा।

हादी के समर्थकों का कहना है कि वे किसी भी कीमत पर पीछे नहीं हटेंगे और इस हमले के बावजूद उनकी राजनीतिक लड़ाई जारी रहेगी। हालांकि, यह भी सच है कि इस घटना ने उनके अभियान को झटका दिया है। एक ओर जहां उनकी सेहत को लेकर चिंता है, वहीं दूसरी ओर चुनावी माहौल में भय का माहौल बन गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस हमले के बाद सरकार पर दबाव और बढ़ेगा कि वह चुनाव से पहले सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करे। राजधानी ढाका जैसे सुरक्षित माने जाने वाले इलाके में दिनदहाड़े गोलीबारी होना यह दिखाता है कि अपराधियों के हौसले कितने बुलंद हैं। अगर समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले दिनों में हालात और बिगड़ सकते हैं।

कुल मिलाकर, शेख हसीना के कट्टर विरोधी शरीफ उस्मान हादी पर हुआ यह हमला बांग्लादेश की राजनीति के लिए एक गंभीर चेतावनी है। यह घटना बताती है कि सियासी मतभेद अब हिंसा का रूप ले रहे हैं, जो किसी भी लोकतंत्र के लिए बेहद खतरनाक संकेत है। अब सबकी नजरें जांच एजेंसियों पर टिकी हैं कि वे दोषियों को कितनी जल्दी पकड़ पाती हैं और क्या इस तरह की घटनाओं पर लगाम लगाई जा सकेगी।

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