
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से सामने आया यह मामला न सिर्फ कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है, बल्कि चिकित्सा जैसे भरोसेमंद पेशे की साख को भी गहरी चोट पहुंचाता है। नर्सिंग की एक छात्रा के साथ शादी का झांसा देकर दुष्कर्म और बाद में ब्लैकमेलिंग करने के आरोप में किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) के एक इंटर्न डॉक्टर को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। पीड़िता की शिकायत के बाद हुई इस कार्रवाई ने पूरे शहर में आक्रोश और चिंता का माहौल पैदा कर दिया है।
पीड़िता के अनुसार, आरोपी इंटर्न डॉक्टर से उसकी पहचान पढ़ाई और प्रशिक्षण के दौरान हुई थी। शुरुआत में बातचीत सामान्य रही, जो धीरे-धीरे नजदीकियों में बदल गई। आरोपी ने खुद को गंभीर रिश्ते के लिए तैयार बताते हुए शादी का भरोसा दिलाया। पीड़िता का कहना है कि इसी भरोसे के आधार पर उसने आरोपी पर विश्वास किया, जिसका आरोपी ने गलत फायदा उठाया।
शिकायत में बताया गया है कि आरोपी ने शादी का वादा करते हुए कई बार शारीरिक संबंध बनाए। जब पीड़िता ने शादी की बात को लेकर दबाव बनाना शुरू किया, तो आरोपी का रवैया बदल गया। आरोप है कि उसने शादी से साफ इनकार कर दिया और इस दौरान पीड़िता को धमकाने व ब्लैकमेल करने लगा। पीड़िता का दावा है कि आरोपी ने निजी तस्वीरों और बातचीत का इस्तेमाल कर उसे डराने की कोशिश की, ताकि वह चुप रहे।
मामले की गंभीरता तब और बढ़ गई, जब पीड़िता ने हिम्मत जुटाकर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने तत्काल जांच शुरू की और प्रारंभिक साक्ष्यों के आधार पर आरोपी इंटर्न डॉक्टर को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद आरोपी को अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, यह मामला केवल धोखे का नहीं, बल्कि यौन शोषण और मानसिक उत्पीड़न से भी जुड़ा है। शादी का झांसा देकर सहमति हासिल करना कानून की नजर में अपराध माना जाता है, खासकर जब वादा शुरू से ही झूठा हो। जांच एजेंसियां इस बात की भी पड़ताल कर रही हैं कि आरोपी ने ब्लैकमेलिंग के लिए किन माध्यमों का इस्तेमाल किया और क्या इस तरह की हरकतें पहले भी की गई थीं।
इस घटना ने मेडिकल संस्थानों में सुरक्षा और नैतिकता को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। चिकित्सा क्षेत्र में काम करने वाले लोगों से समाज एक खास स्तर की संवेदनशीलता और जिम्मेदारी की उम्मीद करता है। ऐसे में एक इंटर्न डॉक्टर पर लगे ये आरोप न सिर्फ व्यक्तिगत अपराध हैं, बल्कि पूरे सिस्टम के लिए चेतावनी भी हैं।
पीड़िता के परिवार का कहना है कि उन्हें न्याय व्यवस्था पर भरोसा है और वे चाहते हैं कि आरोपी को कड़ी से कड़ी सजा मिले, ताकि भविष्य में कोई और लड़की इस तरह की हैवानियत का शिकार न बने। परिवार ने यह भी कहा कि उनकी बेटी ने जो साहस दिखाया है, वह समाज के लिए एक संदेश है कि अपराध के खिलाफ आवाज उठाना जरूरी है।
महिला अधिकार संगठनों ने भी इस मामले पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि “शादी का झांसा” देकर यौन शोषण के मामले लगातार सामने आ रहे हैं और कानून के सख्त पालन की जरूरत है। साथ ही, पीड़िताओं को सामाजिक दबाव और बदनामी के डर से बाहर निकालकर न्याय तक पहुंचाने के लिए संवेदनशील माहौल बनाना भी उतना ही जरूरी है।
पुलिस ने बताया कि मामले की जांच अभी जारी है। आरोपी के मोबाइल फोन और डिजिटल डिवाइस की फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है, ताकि ब्लैकमेलिंग से जुड़े सबूत जुटाए जा सकें। साथ ही, पीड़िता के बयान और मेडिकल रिपोर्ट को केस डायरी का हिस्सा बनाया गया है। जांच के दौरान अगर और तथ्य सामने आते हैं, तो धाराओं में बढ़ोतरी भी की जा सकती है।
इस प्रकरण ने युवाओं के बीच रिश्तों में भरोसे और जिम्मेदारी को लेकर भी बहस छेड़ दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि भावनात्मक रिश्तों में जल्दबाजी और बिना ठोस भरोसे के बड़े फैसले लेना कई बार गंभीर परिणाम ला सकता है। हालांकि, यह भी उतना ही सच है कि अपराध की पूरी जिम्मेदारी अपराधी की होती है, न कि पीड़िता की।
कानूनी जानकारों के मुताबिक, ऐसे मामलों में अदालत इस बात पर गौर करती है कि क्या शादी का वादा शुरू से ही झूठा था और क्या उसी आधार पर सहमति हासिल की गई। अगर यह साबित हो जाता है, तो आरोपी को सख्त सजा का सामना करना पड़ सकता है। इसके अलावा, ब्लैकमेलिंग और धमकी की धाराएं अलग से आरोपी की मुश्किलें बढ़ा सकती हैं।
कुल मिलाकर, लखनऊ का यह मामला समाज के लिए एक कड़वी सच्चाई को उजागर करता है। भरोसे का गलत इस्तेमाल, पेशे की मर्यादा को तोड़ना और कानून से ऊपर खुद को समझना—ये सब मिलकर एक गंभीर अपराध की तस्वीर पेश करते हैं। अब सबकी निगाहें पुलिस जांच और अदालत की कार्रवाई पर टिकी हैं, ताकि पीड़िता को न्याय मिले और ऐसा अपराध दोहराने की हिम्मत कोई न कर सके।