भाग्य को उलट देने वाला केमद्रुम योग: कैसे समृद्ध इंसान को भी गरीबी और संघर्ष की राह पर ले जाता है यह अशुभ संयोग

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ज्योतिष शास्त्र में कुछ योग ऐसे माने गए हैं, जो इंसान के जीवन की दिशा ही बदल देते हैं। इन्हीं में से एक अत्यंत भयावह और प्रभावशाली योग है—केमद्रुम योग। शास्त्रों में इसे दरिद्रता, मानसिक अशांति और जीवन संघर्ष का प्रमुख कारण बताया गया है। मान्यता है कि यह योग राजा को रंक और अमीर को फकीर बना सकता है। जब यह योग कुंडली में बनता है, तो व्यक्ति का जीवन मेहनत, अभाव और अस्थिरता से भर सकता है, चाहे उसके पास कितनी ही प्रतिभा या अवसर क्यों न हों।

केमद्रुम योग मुख्य रूप से चंद्रमा की स्थिति से बनता है। ज्योतिष के अनुसार, चंद्रमा मन, भावनाओं और मानसिक संतुलन का कारक ग्रह है। जब चंद्रमा से दूसरे और बारहवें भाव में कोई भी ग्रह न हो, यानी चंद्रमा दोनों ओर से एकाकी हो जाए, तो केमद्रुम योग का निर्माण होता है। इसे चंद्र दोष का सबसे कठोर रूप भी माना जाता है।

इस योग का सबसे बड़ा प्रभाव व्यक्ति के आर्थिक जीवन पर पड़ता है। ऐसे लोग अक्सर जीवन में बार-बार धन हानि, कर्ज, नौकरी में अस्थिरता या व्यापार में घाटे का सामना करते हैं। कई बार अच्छे अवसर हाथ में आते हुए भी निकल जाते हैं, और मेहनत के बावजूद सफलता टिक नहीं पाती।

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, केमद्रुम योग केवल धन ही नहीं, बल्कि व्यक्ति के मानसिक स्वास्थ्य को भी प्रभावित करता है। ऐसे लोग अवसाद, आत्मविश्वास की कमी, भय और असुरक्षा की भावना से जूझ सकते हैं। वे अक्सर अपने फैसलों पर संदेह करते हैं और छोटी-छोटी बातों से मानसिक रूप से टूट जाते हैं।

इस योग का असर व्यक्ति के सामाजिक जीवन में भी दिखाई देता है। कई बार ऐसे लोग अकेलेपन का शिकार हो जाते हैं, रिश्तों में दूरी आ जाती है और समाज में उन्हें वह सम्मान नहीं मिल पाता, जिसके वे हकदार होते हैं। परिवार का सहयोग भी कई मामलों में कमजोर पड़ जाता है।

हालांकि, शास्त्र यह भी स्पष्ट करते हैं कि केमद्रुम योग हर कुंडली में समान रूप से घातक नहीं होता। इसके प्रभाव कई बातों पर निर्भर करते हैं—जैसे चंद्रमा की राशि, उसकी स्थिति, उस पर पड़ने वाली दृष्टि और कुंडली में मौजूद अन्य शुभ या अशुभ योग।

अगर चंद्रमा मजबूत हो, उच्च राशि में हो या उस पर शुभ ग्रहों की दृष्टि हो, तो केमद्रुम योग का असर काफी हद तक कम हो सकता है। वहीं यदि चंद्रमा निर्बल हो और अन्य अशुभ योग भी साथ हों, तो यह योग जीवन में गहरी कठिनाइयां पैदा कर सकता है।

शास्त्रों में यह भी बताया गया है कि कई बार केमद्रुम योग होने के बावजूद व्यक्ति जीवन में ऊंचे पद तक पहुंच सकता है, लेकिन वह सफलता स्थायी नहीं रहती। अचानक उन्नति के बाद अचानक पतन—यह इस योग की एक खास पहचान मानी जाती है।

केमद्रुम योग का प्रभाव बचपन से ही दिखने लगता है। ऐसे बच्चे पढ़ाई में मेहनती होते हुए भी अपेक्षित परिणाम नहीं पा पाते। प्रतियोगी परीक्षाओं में बार-बार असफलता, करियर में दिशा बदलते रहना और निर्णय लेने में भ्रम—ये इसके सामान्य लक्षण माने जाते हैं।

स्वास्थ्य की दृष्टि से भी यह योग कई तरह की परेशानियां ला सकता है। नींद की समस्या, मानसिक थकान, हार्मोन असंतुलन और पाचन से जुड़ी दिक्कतें इसके साथ देखी जाती हैं। चूंकि चंद्रमा शरीर के द्रव तत्व और मन दोनों का कारक है, इसलिए इसका कमजोर होना दोनों स्तरों पर असर डालता है।

लेकिन ज्योतिष केवल डराने का शास्त्र नहीं है, बल्कि उपायों का विज्ञान भी है। केमद्रुम योग के प्रभाव को कम करने के लिए कई शास्त्रीय उपाय बताए गए हैं।

सबसे पहला और महत्वपूर्ण उपाय है—चंद्रमा को मजबूत करना। इसके लिए सोमवार का व्रत, शिव पूजन और चंद्र मंत्र का जप अत्यंत लाभकारी माना जाता है। “ॐ सोम सोमाय नमः” मंत्र का नियमित जाप मानसिक शांति और स्थिरता प्रदान करता है।

दूसरा उपाय है—दान और सेवा। दूध, चावल, सफेद वस्त्र और चांदी का दान करने से चंद्रमा की अशुभता कम होती है। विशेष रूप से जरूरतमंदों को भोजन कराना इस योग के नकारात्मक प्रभाव को घटाता है।

तीसरा उपाय है—माता का सम्मान और सेवा। चंद्रमा माता और भावनाओं का प्रतीक है। जिन लोगों की माता के साथ संबंध अच्छे होते हैं, उनके जीवन में केमद्रुम योग का प्रभाव अपेक्षाकृत कम देखा जाता है।

कुछ ज्योतिषी यह भी मानते हैं कि अगर कुंडली में केंद्र या त्रिकोण में शुभ ग्रह मजबूत हों, तो केमद्रुम योग स्वतः ही निष्फल हो जाता है। इसे “भंग योग” कहा जाता है, यानी योग बनते हुए भी उसका असर खत्म हो जाना।

यहां यह समझना बेहद जरूरी है कि केमद्रुम योग जीवन को कठिन जरूर बनाता है, लेकिन यह व्यक्ति की कर्मशक्ति को समाप्त नहीं करता। मेहनत, सही मार्गदर्शन और सकारात्मक सोच से इसके प्रभाव को काफी हद तक बदला जा सकता है।

कई प्रसिद्ध व्यक्तियों की कुंडली में केमद्रुम योग पाया गया है, लेकिन उन्होंने संघर्ष के जरिए बड़ी सफलता हासिल की। यह इस बात का संकेत है कि यह योग भाग्य को चुनौती देता है, लेकिन उसे पूरी तरह नियंत्रित नहीं करता।

ज्योतिषाचार्य कहते हैं कि केमद्रुम योग वाले लोगों का जीवन अक्सर देर से स्थिर होता है। युवावस्था में संघर्ष अधिक रहता है, लेकिन 35 या 40 के बाद धीरे-धीरे स्थिति संभलने लगती है, बशर्ते सही निर्णय और संयम बना रहे।

इस योग का एक और महत्वपूर्ण पक्ष है—यह व्यक्ति को आध्यात्मिक बना सकता है। लगातार संघर्ष और अस्थिरता इंसान को भौतिक मोह से हटाकर आत्मचिंतन की ओर ले जाती है। कई बार ऐसे लोग बाद के जीवन में साधना, सेवा और आध्यात्मिक मार्ग पर अग्रसर हो जाते हैं।

कुल मिलाकर, केमद्रुम योग को केवल अभिशाप के रूप में देखना अधूरा दृष्टिकोण होगा। यह एक ऐसा योग है, जो जीवन में कठिन परीक्षा जरूर लेता है, लेकिन सही उपाय, सही कर्म और धैर्य से इसके दुष्प्रभाव को काफी हद तक बदला जा सकता है।

यह योग हमें यह सिखाता है कि भाग्य से ज्यादा महत्वपूर्ण कर्म और विवेक हैं। ग्रह दिशा दिखाते हैं, लेकिन रास्ता चलना इंसान को खुद ही पड़ता है। अगर केमद्रुम योग आपकी कुंडली में है, तो डरने की नहीं, बल्कि सजग होकर अपने जीवन को सही दिशा देने की जरूरत है—ताकि संघर्ष को भी सफलता की सीढ़ी बनाया जा सके।

 

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