भारतीय वायुसेना की ताकत AN-32: दुर्गम इलाकों का भरोसेमंद ट्रांसपोर्ट विमान

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भारतीय वायुसेना का AN-32 विमान पिछले चार दशकों से देश की सैन्य परिवहन क्षमता की रीढ़ बना हुआ है। सोवियत काल में विकसित यह ट्विन-इंजन टर्बोप्रॉप विमान विशेष रूप से कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में संचालन के लिए तैयार किया गया था। इसे यूक्रेन की विमान निर्माता कंपनी Antonov ने भारतीय वायुसेना की जरूरतों को ध्यान में रखकर विकसित किया था।

AN-32 की सबसे बड़ी खासियत इसकी हाई-एल्टीट्यूड ऑपरेशन क्षमता है। यह विमान 4,500 मीटर तक की ऊंचाई वाले एयरफील्ड्स पर भी उड़ान भर सकता है और बेहद गर्म मौसम में भी प्रभावी ढंग से काम करता है। यही कारण है कि लद्दाख, सियाचिन और पूर्वोत्तर भारत जैसे दुर्गम इलाकों में सेना के लिए रसद, हथियार और जवानों की आपूर्ति में इसका व्यापक उपयोग होता है।

भारत ने 1984 से 1991 के बीच AN-32 के 125 विमान खरीदे थे। वर्तमान में भी 100 से अधिक विमान विभिन्न भूमिकाओं में सेवा दे रहे हैं। समय के साथ इन विमानों को आधुनिक एवियोनिक्स, संचार उपकरण, नेविगेशन सिस्टम और सुरक्षा सुविधाओं से अपग्रेड किया गया है ताकि उनकी सेवा अवधि बढ़ाई जा सके।

तकनीकी रूप से AN-32 लगभग 6.7 टन तक का माल या करीब 50 पैराट्रूपर्स को ले जाने में सक्षम है। इसकी अधिकतम गति लगभग 530 किमी प्रति घंटा है, जबकि इसकी परिचालन सीमा करीब 2,500 किलोमीटर तक मानी जाती है। यह कच्ची और छोटी रनवे पट्टियों पर भी टेकऑफ और लैंडिंग कर सकता है, जो इसे सामरिक अभियानों के लिए बेहद उपयोगी बनाता है।

भारतीय वायुसेना में इस विमान को “सतलुज” नाम से भी जाना जाता है। इसका उपयोग केवल सैन्य रसद तक सीमित नहीं है, बल्कि प्राकृतिक आपदाओं के दौरान राहत सामग्री पहुंचाने, घायलों को निकालने और मानवीय सहायता मिशनों में भी किया जाता है।

हालांकि AN-32 अब एक पुराना प्लेटफॉर्म माना जाता है, फिर भी भारतीय वायुसेना इसकी उपयोगिता को देखते हुए कई विमानों का लाइफ-एक्सटेंशन और ओवरहॉल कार्यक्रम चला रही है। साथ ही भविष्य में इन्हें नए परिवहन विमानों से बदलने की योजनाओं पर भी काम जारी है।

दिलचस्प बात यह है कि 13 जून 2026 को असम के जोरहाट एयरबेस पर एक AN-32 विमान लैंडिंग के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसके बाद यह विमान एक बार फिर चर्चा में आ गया। जांच एजेंसियां घटना के कारणों की पड़ताल कर रही हैं।

 

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