फर्जी हस्ताक्षर मामले में बढ़ीं अभिषेक बनर्जी की मुश्किलें, CID मुख्यालय में करीब 8 घंटे तक चली पूछताछ

2

पश्चिम बंगाल की राजनीति में चर्चित फर्जी हस्ताक्षर मामले ने एक बार फिर तूल पकड़ लिया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी से राज्य की अपराध जांच विभाग (CID) ने लंबी पूछताछ की है। कोलकाता स्थित CID मुख्यालय में हुई इस पूछताछ का सिलसिला कई घंटों तक चला, जहां जांचकर्ताओं ने कथित हस्ताक्षर जालसाजी से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर सवाल किए। इस घटनाक्रम ने राज्य की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है और विपक्ष को सरकार पर हमला करने का एक नया मुद्दा मिल गया है।

मामला पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के चयन से जुड़े एक कथित दस्तावेज को लेकर सामने आया है। आरोप है कि एक प्रस्ताव पत्र में कई विधायकों के हस्ताक्षरों को लेकर अनियमितताएं हुईं और कुछ हस्ताक्षरों की प्रामाणिकता पर सवाल उठाए गए। शिकायत के आधार पर CID ने विशेष जांच दल (SIT) गठित कर जांच शुरू की थी। इसी जांच के तहत अभिषेक बनर्जी को कई बार पूछताछ के लिए बुलाया गया है।

रिपोर्टों के अनुसार, जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि संबंधित प्रस्ताव पत्र किस प्रकार तैयार किया गया, उसमें शामिल हस्ताक्षर वास्तविक थे या नहीं, और दस्तावेज जमा करने की पूरी प्रक्रिया में किन-किन लोगों की भूमिका रही। जांचकर्ताओं ने कथित तौर पर दस्तावेजों की समयरेखा, संबंधित नेताओं की भूमिका और विभिन्न बयानों में सामने आए विरोधाभासों पर भी सवाल किए।

बताया जा रहा है कि अभिषेक बनर्जी से पहले भी कई घंटों तक पूछताछ की जा चुकी है। जांच एजेंसी का कहना है कि मामले के विभिन्न पहलुओं को स्पष्ट करने के लिए अतिरिक्त जानकारी की आवश्यकता थी, जिसके चलते उन्हें दोबारा बुलाया गया। इस दौरान TMC नेता कुणाल घोष से भी पूछताछ की गई और कुछ चरणों में दोनों नेताओं से जुड़े तथ्यों का मिलान करने की कोशिश की गई।

जांच के केंद्र में वह प्रस्ताव है जिसमें कथित तौर पर बड़ी संख्या में विधायकों के हस्ताक्षर शामिल थे। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि कुछ हस्ताक्षर वास्तविक नहीं थे या बिना उचित अनुमति के दस्तावेज में शामिल किए गए। इस मामले की शिकायत पार्टी से जुड़े कुछ पूर्व नेताओं और विधायकों द्वारा उठाए गए सवालों के बाद सामने आई थी। इसके बाद जांच एजेंसियों ने मामले को गंभीरता से लेते हुए विस्तृत जांच शुरू की।

अभिषेक बनर्जी ने इससे पहले सार्वजनिक रूप से कहा था कि वह जांच में पूरा सहयोग कर रहे हैं और एजेंसियों के सभी सवालों का जवाब दे रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया था कि राजनीतिक कारणों से उन्हें बार-बार निशाना बनाया जा रहा है। वहीं तृणमूल कांग्रेस के नेताओं का भी कहना है कि जांच को राजनीतिक रंग दिया जा रहा है और विपक्ष राज्य की राजनीति में लाभ लेने की कोशिश कर रहा है।

दूसरी ओर विपक्षी दलों का कहना है कि यदि दस्तावेजों में किसी प्रकार की जालसाजी हुई है तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। विपक्ष का आरोप है कि मामला केवल तकनीकी त्रुटि का नहीं बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की विश्वसनीयता से जुड़ा हुआ है। हालांकि इन आरोपों और प्रत्यारोपों के बीच अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

इस बीच कलकत्ता हाई कोर्ट ने भी मामले में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अदालत ने अभिषेक बनर्जी को अंतरिम राहत देते हुए गिरफ्तारी से अस्थायी संरक्षण प्रदान किया था, लेकिन साथ ही जांच में सहयोग करने का निर्देश भी दिया था। अदालत के निर्देशों के बाद ही वे निर्धारित समय पर CID के समक्ष उपस्थित हो रहे हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला केवल एक कानूनी जांच तक सीमित नहीं है, बल्कि आगामी राजनीतिक समीकरणों पर भी असर डाल सकता है। पश्चिम बंगाल की राजनीति में अभिषेक बनर्जी को तृणमूल कांग्रेस के प्रमुख चेहरों में गिना जाता है और ऐसे में उनसे जुड़ा कोई भी विवाद राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है।

फिलहाल CID की जांच जारी है और एजेंसी दस्तावेजों, बयानों तथा अन्य उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण कर रही है। आने वाले दिनों में मामले में और नेताओं से पूछताछ हो सकती है तथा जांच का दायरा भी बढ़ सकता है। सभी पक्षों की नजर अब इस बात पर टिकी है कि जांच एजेंसी अपनी रिपोर्ट में क्या निष्कर्ष निकालती है और क्या इस मामले में आगे कोई कानूनी कार्रवाई होती है।

Share it :

End