राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: जेल में बंद पांच आरोपियों से होगी पूछताछ, कोर्ट ने SIT को दी अनुमति

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अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के मामले की जांच लगातार आगे बढ़ रही है। अब इस प्रकरण में एक नया महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। विशेष जांच दल (SIT) को जेल में बंद पांच आरोपियों से पूछताछ करने की अदालत से अनुमति मिल गई है। अदालत की मंजूरी मिलने के बाद जांच एजेंसी इन आरोपियों से जेल के भीतर ही विस्तृत पूछताछ करेगी, ताकि कथित चोरी के पूरे नेटवर्क, धन के प्रवाह और अन्य संभावित आरोपियों के बारे में जानकारी जुटाई जा सके।

जांच एजेंसियों के अनुसार, जिन पांच आरोपियों से जेल में पूछताछ की अनुमति मिली है, उनमें अविनाश शुक्ला भी शामिल है, जिसे इस मामले का प्रमुख आरोपी माना जा रहा है। पुलिस का मानना है कि आरोपियों से आमने-सामने पूछताछ के दौरान कई ऐसे तथ्य सामने आ सकते हैं, जो अब तक की जांच में स्पष्ट नहीं हो पाए हैं। अदालत से अनुमति मिलने के बाद पुलिस अब निर्धारित प्रक्रिया के तहत जेल में जाकर उनसे पूछताछ करेगी।

यह मामला तब सामने आया जब मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए चढ़ावे की गिनती और उसके रखरखाव के दौरान कथित वित्तीय अनियमितताओं की शिकायतें मिलीं। प्रारंभिक जांच में यह आशंका जताई गई कि चढ़ावे की रकम का एक हिस्सा व्यवस्थित तरीके से निकालकर उसका दुरुपयोग किया गया। इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया, जिसने विस्तृत जांच शुरू की।

अब तक की जांच में पुलिस कई लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। जांच एजेंसियों का दावा है कि आरोपियों के कब्जे से लगभग 80 लाख रुपये नकद तथा विभिन्न देशों की विदेशी मुद्रा भी बरामद की गई है। पुलिस का कहना है कि बरामदगी और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि कथित गड़बड़ी कितने समय से चल रही थी और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही। हालांकि मामले की जांच अभी जारी है और अंतिम निष्कर्ष आना बाकी है।

जांच अधिकारियों के अनुसार, जेल में पूछताछ का उद्देश्य केवल आरोपियों के बयान दर्ज करना नहीं है, बल्कि उनके बयानों का अन्य उपलब्ध साक्ष्यों, डिजिटल रिकॉर्ड, वित्तीय दस्तावेजों और बरामद रकम से मिलान करना भी है। पुलिस यह भी जानना चाहती है कि कथित तौर पर चोरी की गई राशि को कैसे बाहर निकाला गया, उसका उपयोग कहां हुआ और क्या इस पूरे मामले में कोई संगठित नेटवर्क सक्रिय था।

इस बीच जांच का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है। SIT ने मंदिर ट्रस्ट के पिछले पांच वर्षों के वित्तीय रिकॉर्ड का दोबारा ऑडिट कराने का भी निर्णय लिया है। जांच एजेंसी का उद्देश्य यह पता लगाना है कि कहीं पूर्व वर्षों में भी किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता तो नहीं हुई। इस पुनः ऑडिट के माध्यम से चढ़ावे के संग्रह, गिनती और जमा करने की पूरी प्रक्रिया की विस्तार से समीक्षा की जाएगी।

मामले की जांच केवल कथित चोरी तक सीमित नहीं है। पुलिस उन परिस्थितियों की भी पड़ताल कर रही है, जिनके तहत चढ़ावे की गिनती के लिए कर्मचारियों की नियुक्ति की गई थी। जांच एजेंसियां यह भी देख रही हैं कि नियुक्ति प्रक्रिया, निगरानी व्यवस्था और सुरक्षा प्रणाली में कहीं ऐसी कमियां तो नहीं थीं, जिनका कथित तौर पर फायदा उठाया गया। इसी कारण कई संबंधित व्यक्तियों से पूछताछ की जा चुकी है और आगे भी बयान दर्ज किए जा सकते हैं।

इस मामले को लेकर सामाजिक और धार्मिक संगठनों ने भी पारदर्शी जांच की मांग की है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने इस घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। कई संतों और धार्मिक नेताओं ने भी कहा है कि श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े चढ़ावे में यदि किसी प्रकार की अनियमितता हुई है तो इसकी निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार लोगों को कानून के अनुसार दंड मिलना चाहिए।

फिलहाल अदालत से मिली अनुमति के बाद जेल में बंद पांचों आरोपियों से पूछताछ की तैयारी शुरू हो गई है। जांच एजेंसियों को उम्मीद है कि इन बयानों से मामले के कई अहम पहलुओं पर नई जानकारी मिल सकती है। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी तरह साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ाई जा रही है और यदि जांच के दौरान किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। अब सभी की नजर SIT की आगामी जांच और उसके निष्कर्षों पर टिकी है, जो इस चर्चित मामले की पूरी तस्वीर सामने ला सकते हैं।

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