
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में शनिवार को एक नाटकीय घटनाक्रम देखने को मिला, जब दुष्कर्म के एक मामले में नामजद आरोपी की गिरफ्तारी की मांग को लेकर एक दिव्यांग छात्रा करीब 150 फीट ऊंचे मोबाइल टावर पर चढ़ गई। छात्रा का आरोप है कि कई महीने पहले दर्ज कराए गए मुकदमे के बावजूद पुलिस अब तक आरोपी को गिरफ्तार नहीं कर सकी है। करीब तीन घंटे तक चले हाई-वोल्टेज घटनाक्रम के बाद पुलिस और प्रशासन की ओर से लिखित आश्वासन दिए जाने पर छात्रा सुरक्षित नीचे उतर आई। इस दौरान मौके पर बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी, प्रशासनिक अधिकारी और स्थानीय लोग मौजूद रहे।
जानकारी के अनुसार, 21 वर्षीय छात्रा उत्तर प्रदेश के जालौन जिले की रहने वाली है और लखनऊ में रहकर डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय से बीए अंतिम वर्ष की पढ़ाई कर रही है। वह शारीरिक रूप से दिव्यांग है। शनिवार सुबह वह पारा थाना क्षेत्र में स्थित एक मोबाइल टावर पर चढ़ गई। बताया जा रहा है कि टावर पर चढ़ने के बाद उसने स्वयं पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद पुलिस और प्रशासनिक टीम तत्काल मौके पर पहुंच गई। आसपास के लोगों की भीड़ भी घटनास्थल पर जमा हो गई और पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
छात्रा का आरोप है कि उसके साथ पढ़ने वाले एक युवक ने शादी का झांसा देकर उसके साथ दुष्कर्म किया। उसका कहना है कि इस संबंध में अप्रैल 2026 में पारा थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी, लेकिन मामला दर्ज होने के बावजूद अब तक आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई। छात्रा के अनुसार, उसने कई बार संबंधित अधिकारियों से कार्रवाई की मांग की, लेकिन उसे अपेक्षित न्याय नहीं मिला। इसी वजह से उसने विरोध दर्ज कराने के लिए मोबाइल टावर पर चढ़ने का फैसला किया। यह आरोप छात्रा के हैं और पुलिस मामले की जांच कर रही है।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस, प्रशासन और बचाव दल मौके पर पहुंच गया। अधिकारियों ने पहले आसपास के क्षेत्र को सुरक्षित कराया ताकि किसी प्रकार की अप्रिय घटना न हो। इसके बाद छात्रा से लगातार बातचीत की गई और उसे सुरक्षित नीचे उतरने के लिए समझाया गया। कई घंटों तक चली बातचीत के दौरान अधिकारियों ने उसे भरोसा दिलाया कि मामले में कानूनी प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई की जाएगी और जांच में तेजी लाई जाएगी।
करीब तीन घंटे तक चले प्रयासों के बाद पुलिस अधिकारियों ने छात्रा को लिखित रूप में आश्वासन दिया कि उसके द्वारा दर्ज कराए गए मामले में नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी और आरोपी की गिरफ्तारी के लिए प्रभावी प्रयास किए जाएंगे। लिखित आश्वासन मिलने के बाद छात्रा टावर से नीचे उतरने के लिए तैयार हुई। उसके सुरक्षित नीचे आते ही मौके पर मौजूद अधिकारियों और स्थानीय लोगों ने राहत की सांस ली। इस दौरान किसी प्रकार की दुर्घटना या चोट की सूचना नहीं मिली।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि संबंधित मुकदमे की जांच पहले से जारी है और आरोपी की तलाश के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उनका कहना है कि उपलब्ध साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी मामले में गिरफ्तारी और अन्य कार्रवाई कानून के निर्धारित प्रावधानों के अनुसार ही की जाती है।
यह घटना महिलाओं से जुड़े गंभीर मामलों में समयबद्ध कार्रवाई और पीड़ितों के विश्वास को बनाए रखने की आवश्यकता को एक बार फिर सामने लाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में त्वरित जांच, संवेदनशील पुलिसिंग और नियमित संवाद बेहद महत्वपूर्ण होते हैं, ताकि पीड़ितों को न्याय पाने के लिए जोखिम भरे कदम उठाने की नौबत न आए। वहीं कानून व्यवस्था से जुड़े जानकारों का कहना है कि किसी भी आपराधिक मामले में निष्पक्ष जांच और पर्याप्त साक्ष्यों के आधार पर ही आगे की कानूनी कार्रवाई की जाती है।
फिलहाल छात्रा सुरक्षित है और प्रशासन ने उसे हर संभव सहायता उपलब्ध कराने का भरोसा दिया है। दूसरी ओर पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और आरोपी की तलाश के लिए कार्रवाई की जा रही है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि जांच एजेंसियां आगे क्या कदम उठाती हैं और पीड़िता की शिकायत पर कानूनी प्रक्रिया किस गति से आगे बढ़ती है। यह घटनाक्रम न केवल न्याय की मांग को लेकर एक छात्रा के विरोध का प्रतीक बन गया, बल्कि महिलाओं से जुड़े मामलों में त्वरित और प्रभावी कार्रवाई की आवश्यकता पर भी गंभीर चर्चा छेड़ गया है।