ब्राजील चुनाव से पहले बढ़ा अमेरिका-ब्राजील तनाव, ट्रंप प्रशासन के दो वरिष्ठ अधिकारियों को नहीं मिला वीजा

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ब्रासीलिया। अक्टूबर 2026 में होने वाले ब्राजील के राष्ट्रपति चुनाव से पहले अमेरिका और ब्राजील के बीच कूटनीतिक तनाव और गहरा गया है। ब्राजील सरकार ने ट्रंप प्रशासन के दो वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारियों को वीजा देने से इनकार कर दिया है। ब्राजील का आरोप है कि प्रस्तावित अमेरिकी दौरे का उद्देश्य चुनाव प्रक्रिया और देश की इलेक्ट्रॉनिक मतदान प्रणाली पर सवाल खड़े करना था, जिसे उसने अपनी लोकतांत्रिक व्यवस्था में संभावित विदेशी दखल के रूप में देखा। दूसरी ओर, अमेरिकी विदेश विभाग ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह यात्रा नियमित राजनयिक कार्यक्रम का हिस्सा थी।

ब्राजील के विदेश मंत्रालय के अनुसार, जिन अधिकारियों को वीजा नहीं दिया गया, उनमें अमेरिकी विदेश विभाग के असिस्टेंट सेक्रेटरी राइली एम. बार्न्स और डिप्टी असिस्टेंट सेक्रेटरी सैमुअल सैमसन शामिल हैं। दोनों अधिकारियों की ब्रासीलिया यात्रा प्रस्तावित थी, जहां वे चुनावी प्रक्रिया, लोकतांत्रिक संस्थाओं और अन्य सार्वजनिक मुद्दों पर विभिन्न पक्षों से मुलाकात करने वाले थे। हालांकि ब्राजील सरकार को आशंका थी कि यह यात्रा आगामी चुनावों से पहले चुनावी प्रणाली की विश्वसनीयता पर संदेह पैदा कर सकती है।

ब्राजील में इस वर्ष होने वाले राष्ट्रपति चुनाव में मौजूदा राष्ट्रपति लुइज़ इनासियो लूला दा सिल्वा का मुकाबला दक्षिणपंथी नेता और पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो के बेटे फ्लावियो बोल्सोनारो से होने की संभावना है। हाल के महीनों में बोल्सोनारो समर्थकों की ओर से इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग सिस्टम पर सवाल उठाए गए हैं, हालांकि ब्राजील की चुनावी संस्थाओं ने इन दावों को निराधार बताया है। इसी पृष्ठभूमि में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल की प्रस्तावित यात्रा को लेकर संवेदनशीलता और बढ़ गई।

ब्राजील सरकार का कहना है कि चुनाव देश का आंतरिक लोकतांत्रिक विषय है और किसी भी विदेशी सरकार या संस्था को इसमें हस्तक्षेप करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। राष्ट्रपति लूला दा सिल्वा पहले भी सार्वजनिक रूप से यह कह चुके हैं कि ब्राजील अपनी संप्रभुता और लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता से किसी प्रकार का समझौता नहीं करेगा। अधिकारियों का मानना है कि वीजा अस्वीकार करने का निर्णय इसी नीति के अनुरूप लिया गया।

उधर, अमेरिकी विदेश विभाग ने बयान जारी कर कहा कि प्रस्तावित दौरे का उद्देश्य चुनावों में हस्तक्षेप करना नहीं था। विभाग के अनुसार, यह यात्रा लोकतंत्र, धार्मिक स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता जैसे मुद्दों पर नियमित संवाद का हिस्सा थी। अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि उनकी यात्रा को गलत तरीके से राजनीतिक रंग दिया गया है।

विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब अमेरिका और ब्राजील के संबंध पहले से ही कई मुद्दों पर तनावपूर्ण बने हुए हैं। व्यापार, पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो से जुड़े कानूनी मामलों और दोनों देशों के राजनीतिक मतभेदों ने हाल के महीनों में रिश्तों को प्रभावित किया है। ऐसे में वीजा विवाद ने दोनों देशों के बीच कूटनीतिक दूरी को और बढ़ा दिया है।

अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का कहना है कि चुनावी प्रक्रिया में विदेशी हस्तक्षेप का मुद्दा दुनिया के कई लोकतांत्रिक देशों के लिए संवेदनशील विषय बन चुका है। ब्राजील ने अपने फैसले के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की है कि वह चुनावों की निष्पक्षता और संप्रभुता को लेकर किसी भी तरह की आशंका को गंभीरता से लेता है। वहीं अमेरिका का कहना है कि उसका उद्देश्य केवल लोकतांत्रिक संवाद को बढ़ावा देना था। आने वाले दिनों में यह विवाद दोनों देशों के कूटनीतिक संबंधों और ब्राजील के चुनावी माहौल पर कितना असर डालता है, इस पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर बनी रहेगी।

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