Powder Row: 10 साल की कानूनी जंग, 76000 केस और 5.5 अरब डॉलर का समझौता, जानिए जॉनसन विवाद की पूरी कहानी

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क्या टैलकम पाउडर से कैंसर होता है? 10 साल की अदालती लड़ाई के बाद जॉनसन एंड जॉनसन ने इससे जुड़े मामले में 5.5 अरब रुपये का ऐतिहासिक समझौता किया है। आइए विस्तार से समझते हैं पूरी कहानी।

A Decade-Long Battle, 76,000 Lawsuits, and a Rs 5.5 Billion Deal: The Inside Story
इलाहाबाद हाईकोर्ट – फोटो : India Views

विस्तार

एक सफेद खुशबुदार पाउडर पिछले कई दशकों से दुनिया भर के घरों में शिशुओं की नाजुक त्वचा की देखभाल और सुरक्षा का सबसे भरोसेमंद प्रतीक रहा है। लेकिन इसे बनाने वाली कंपनी एक दिन दुनिया की सबसे बड़ी और सबसे लंबी अदालती लड़ाइयों में से एक के केंद्र में आ गई । अब इस मामले को निपटाने के लिए उसे एक भारी-भरकम समझौता करना पड़ा है। कंपनी के उत्पादों पर गर्भाशय कैंसर होने के गंभीर आरोप लगे थे। आखिरकार, एक दशक से अधिक समय से चल रहे इस विवाद को खत्म करने के लिए कंपनी ने 5.5 अरब डॉलर के एक बड़े समझौते की घोषणा की है। हम बात कर रहे हैं वैश्विक फार्मा और एफएमसीजी मार्केट की दिग्गज कंपनी जॉनसन एंड जॉनसन की।

न्यूयॉर्क में सोमवार को घोषित हुए इस भारी-भरकम समझौते ने पूरे वैश्विक कॉरपोरेट जगत का ध्यान खींचा है। आसान बोलचाल की भाषा में इस पूरे मामले के हर पहलू को सिलसिलेवार ढंग से समझते हैं कि आखिर यह पूरा विवाद क्या था और इस ऐतिहासिक समझौते के मायने क्या हैं।

दशकों पुरानी यह कानूनी लड़ाई किस बात को लेकर थी?

इस पूरे विवाद की जड़ में कंपनी का सबसे लोकप्रिय उत्पाद- बेबी पाउडर और अन्य टैल्क उत्पाद हैं। पिछले एक दशक से कंपनी अमेरिका और दुनिया भर में हजारों मुकदमों का सामना कर रही थी। इन मुकदमों में वादियों (शिकायतकर्ताओं) का आरोप था कि कंपनी के टैलकम पाउडर उत्पादों के इस्तेमाल के कारण महिलाओं को डिम्बग्रंथि (ओवेरियन) का कैंसर हुआ। वादियों का दावा था कि टैलकम पाउडर में कैंसरकारी तत्व मौजूद थे, जिससे उनके स्वास्थ्य को अपूरणीय क्षति हुई। हालांकि, कंपनी शुरू से ही इन दावों को पूरी तरह से खारिज करती रही है।

इस 5.5 अरब डॉलर के समझौते में कौन-कौन से मामले शामिल हैं?

कंपनी द्वारा घोषित इस हालिया समझौते के तहत कानूनी दावों के एक बहुत बड़े हिस्से को सुलझा लिया गया है:

    • 76,000 मुकदमों का निपटारा: यह समझौता न्यू जर्सी की संघीय अदालत और विभिन्न राज्य अदालतों में लंबित लगभग 76,000 दावों को कवर करता है।
  • बचे हुए सभी मुकदमों का अंत: यह समझौता कंपनी के खिलाफ वर्तमान में बचे हुए लगभग सभी टैल्क से जुड़े दावों का प्रतिनिधित्व करता है।
  • पूर्व में निपटाए गए मामले: इससे पहले कंपनी ने अपने टैल्क उत्पादों में एस्बेस्टस और मेसोथेलियोमा के आरोपों वाले अधिकांश मामलों को अलग से निपटाया था।
  • कंपनी का पक्ष: जे एंड जे की लीगल टीम के उपाध्यक्ष एरिक हास ने कैंसर से जुड़े सभी दावों को पूरी तरह से ‘निराधार’ बताया है। उनका कहना है कि कंपनी को पूरा विश्वास था कि वह आगे की अदालती लड़ाई में भी जीत हासिल करती, लेकिन इस विवाद को हमेशा के लिए खत्म करने के लिए वे समझौता करने को तैयार हुए हैं।

क्या कंपनी को इस समझौते के लिए तय राशि से भी अधिक भुगतान करना पड़ सकता है?

हां इस समझौते की वित्तीय संरचना ऐसी है कि भविष्य में भुगतान की जाने वाली कुल राशि बढ़ सकती है:

  • भुगतान का टाइमलाइन: समझौते के तहत जे एंड जे को 2027 में तीन अरब डॉलर का भुगतान करने की उम्मीद है, जिसके बाद 2028 और उसके आगे भी भुगतान किए जाएंगे।
  • सात अरब डॉलर से अधिक का अनुमान: टैल्क दावों वाले लगभग 2,500 ग्राहकों का प्रतिनिधित्व करने वाले प्रसिद्ध वकील क्रिस सीगर के अनुसार, इस समझौते में भाग लेने वाले लोगों की वास्तविक संख्या के आधार पर अंतिम राशि बढ़ सकती है। सीगर का अनुमान है कि जे एंड जे को अंततः 7 अरब डॉलर या उससे अधिक का भुगतान करना पड़ सकता है।
  • दावे की सीमा पर कोई कैप नहीं: यह समझौता योग्य डिम्बग्रंथि कैंसर दावों के लिए एक विशिष्ट मूल्य तो तय करता है, लेकिन यह जे एंड जे द्वारा किए जाने वाले कुल भुगतान पर कोई अधिकतम सीमा (कैप) नहीं लगाता है।
  • 95% की मंजूरी जरूरी: इस समझौते को पूरी तरह से लागू और अंतिम रूप देने के लिए डिम्बग्रंथि कैंसर के कम से कम 95 फीसदी दावेदारों की लिखित स्वीकृति मिलना अनिवार्य है।

 

अदालतों में लगातार मिल रही जीत के बाद भी कंपनी ने यह समझौता क्यों किया?

यह समझौता तब सामने आया है जब जे एंड जे ने अदालतों में व्यक्तिगत मुकदमों की एक श्रृंखला जीती थी और वादी के वकीलों को मुकदमेबाजी से अयोग्य ठहराने में भी सफलता पाई थी। पिछले ही सप्ताह एक अमेरिकी संघीय न्यायाधीश ने भी इस बात पर गहरा संदेह व्यक्त किया था कि क्या व्यक्तिगत वादी अदालत में यह ठोस रूप से साबित कर सकते हैं कि टैल्क उत्पादों ने ही विशेष रूप से उनके कैंसर का कारण बना।

इसके बावजूद कंपनी ने समझौता करने का फैसला किया, इसके दो प्रमुख कारण हैं।

    • मुख्य व्यवसाय पर ध्यान केंद्रित करना: मुकदमेबाजी को पीछे छोड़कर कंपनी अब अपना पूरा ध्यान जीवन रक्षक दवाएं  और अत्याधुनिक चिकित्सा उपकरण  विकसित करने पर केंद्रित करना चाहती है।
  • बाजार से दूरी: कंपनी ने पहले ही वर्ष 2020 में अमेरिका में टैल्क-आधारित बेबी पाउडर बेचना बंद कर दिया था। ऐसे में इस कानूनी लड़ाई को खींचने का कोई व्यावसायिक लाभ नहीं था।

 

यह समझौता कंपनी के पिछले विफल दिवालियापन के प्रयासों से कैसे अलग है?

यह समझौता मार्च 2025 में कानूनी लड़ाई के दोबारा शुरू होने के बाद हुआ है। इससे पहले जे एंड जे ने मुकदमों से बचने के लिए एक बहुत ही चर्चित कॉरपोरेट रणनीति अपनाई थी, जिसे टेक्सास टू स्टेप कहा जाता है।

  • क्या थी रणनीति?: इसके तहत कंपनी ने अपनी एक शेल-कंपनी (सहायक इकाई) बनाई और उसके माध्यम से तीन बार दिवालियापन की याचिकाएं दायर कीं, ताकि मुकदमों को टाला जा सके। हालांकि, अदालतों ने कंपनी को दिवालिया घोषित करने जुड़े इन प्रयासों को खारिज कर दिया था।
  • नया समझौता क्यों बेहतर है?: पिछले दिवालियापन प्रस्तावों के विपरीत, यह नया समझौता केवल वर्तमान में लंबित दावों पर ही लागू होता है और इसमें भविष्य के मुकदमों को शामिल नहीं किया गया है। भविष्य के दावों को अलग रखने से वर्तमान वादियों के लिए अधिक पैसा उपलब्ध हो पाया है और भुगतान की गति भी तेज हो गई है। अब सभी योग्य दावों का भुगतान एक दशक तक खिंचने के बजाय अगले 18 महीनों के भीतर पूरा कर लिया जाएगा।

जॉनसन एंड जॉनसन का यह 5.5 अरब डॉलर का समझौता कॉर्पोरेट इतिहास में प्रोडक्ट लायबिलिटी (उत्पाद दायित्व) के सबसे बड़े और सबसे लंबे मामलों में से एक का अंत माना जा सकता है। हालांकि जे एंड जे अपने उत्पादों को सुरक्षित और कैंसर-मुक्त बताती रही है, लेकिन 76,000 दावों को निपटाने का यह कदम यह साबित करता है कि बड़ी कंपनियों के लिए साख बचाना और मुकदमों के अंतहीन खर्च से बचना कितना महत्वपूर्ण हो जाता है। इस समझौते से मौजूदा पीड़ित महिलाओं को राहत और त्वरित वित्तीय सहायता तो मिलेगी ही, साथ ही जे एंड जे को भी अपने नए अनुसंधान और जीवन रक्षक दवाओं के विकास पर ध्यान केंद्रित करने का मार्ग प्रशस्त होगा।

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