नेपाल हिंसा के बाद सरकार का बड़ा फैसला, मदरसों की जांच के आदेश; मृतकों के परिजनों से समझौता

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काठमांडू। नेपाल के सुनसरी जिले में हाल ही में हुई सांप्रदायिक हिंसा के बाद सरकार ने कई अहम कदम उठाए हैं। हिंसा के बाद राज्य सरकार और मृतकों के परिजनों के बीच एक समझौता हुआ है। इसके साथ ही सरकार ने क्षेत्र के मदरसों और कुछ अन्य धार्मिक संस्थानों की जांच कराने के निर्देश भी दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि जांच का उद्देश्य हिंसा की पृष्ठभूमि, अफवाहों और किसी भी संभावित उकसावे की निष्पक्ष जांच करना है। अब तक किसी भी मदरसे की भूमिका को आधिकारिक रूप से दोषी नहीं ठहराया गया है।

रविवार को सुनसरी जिले के देवांगंज क्षेत्र में दो समुदायों के धार्मिक आयोजनों के दौरान विवाद शुरू हुआ, जो देखते ही देखते हिंसक झड़प में बदल गया। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए बल प्रयोग किया, जिसमें गोलीबारी भी हुई। इस घटना में लोगों की मौत हुई और कई नागरिकों के साथ-साथ सुरक्षाकर्मी भी घायल हुए। हिंसा के बाद प्रशासन ने प्रभावित इलाकों में कर्फ्यू लागू कर दिया और अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए।

लगातार बढ़ते तनाव के बीच नेपाल सरकार और मृतकों के परिजनों के बीच वार्ता हुई। समझौते के तहत सरकार ने मृतकों के परिवारों को आर्थिक सहायता देने, उन्हें शहीद घोषित करने की प्रक्रिया शुरू करने तथा घटना की निष्पक्ष जांच कराने का आश्वासन दिया है। इसके बाद परिजनों ने अपना विरोध प्रदर्शन वापस लेने पर सहमति जताई।

सरकार ने हिंसा की जांच के लिए एक उच्चस्तरीय समिति का भी गठन किया है। समिति को पुलिस कार्रवाई, हिंसा की परिस्थितियों और प्रशासनिक निर्णयों की समीक्षा कर निर्धारित समय में रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है। इसके साथ ही स्थानीय प्रशासन को क्षेत्र के मदरसों और अन्य धार्मिक संस्थानों के दस्तावेजों तथा गतिविधियों की जांच करने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई केवल जांच प्रक्रिया का हिस्सा है और इसका उद्देश्य किसी समुदाय को निशाना बनाना नहीं है। जांच पूरी होने से पहले किसी संस्था की भूमिका पर निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।

नेपाल के प्रधानमंत्री ने लोगों से शांति और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने की अपील की है। उन्होंने कहा कि अफवाहों से बचना और कानून-व्यवस्था बनाए रखना सभी नागरिकों की जिम्मेदारी है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि हिंसा फैलाने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी, चाहे वह किसी भी समुदाय से संबंधित हो।

संसद में भी इस घटना को लेकर तीखी बहस हुई। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ने निष्पक्ष जांच की मांग की है। कई सांसदों ने पुलिस द्वारा बल प्रयोग और प्रशासन की तैयारियों पर सवाल उठाए, जबकि अन्य सदस्यों ने धार्मिक तनाव को राजनीतिक रूप देने से बचने की अपील की। सभी दलों ने शांति बहाल करने और दोषियों की पहचान कर कार्रवाई करने पर जोर दिया।

फिलहाल सुनसरी और आसपास के संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। प्रशासन हालात सामान्य बनाने की कोशिश कर रहा है, जबकि जांच समिति पूरे घटनाक्रम की पड़ताल में जुटी है। सरकार का कहना है कि रिपोर्ट आने के बाद यदि किसी व्यक्ति, संगठन या संस्था की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। वहीं स्थानीय प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर प्रसारित अपुष्ट सूचनाओं से बचें और केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करें।

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