
उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के बिहार सीमा से सटे छोटे से गांव भोपतपुरा में बुधवार को अचानक जश्न का माहौल बन गया। गांव के लोगों के लिए यह खबर गर्व और खुशी से भर देने वाली थी कि उनके गांव से निकले पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का पहला मुख्य कार्यकारी अधिकारी यानी CEO नियुक्त किया गया है। जैसे ही यह खबर गांव पहुंची, लोगों ने एक-दूसरे को बधाई दी, मिठाइयां बांटीं और खुशी में आतिशबाजी की। गांव में जगह-जगह जय श्रीराम के नारे गूंजने लगे।
जितेंद्र मिश्रा के लिए यह नियुक्ति उनके करीब चार दशक लंबे सैन्य करियर के बाद एक नई और महत्वपूर्ण जिम्मेदारी की शुरुआत है। भारतीय वायुसेना में फाइटर पायलट के रूप में करियर शुरू करने वाले मिश्रा एयर मार्शल के पद तक पहुंचे और कई महत्वपूर्ण सैन्य जिम्मेदारियां निभाईं। अब उन्हें देश और दुनिया के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र अयोध्या के राम मंदिर के प्रशासन और संचालन की जिम्मेदारी मिली है।
उनकी नियुक्ति 2 सितंबर 2026 को अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक में की गई। ट्रस्ट ने उन्हें मंदिर का पहला CEO नियुक्त किया है। यह जिम्मेदारी ऐसे समय मिली है जब राम मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है और मंदिर परिसर तथा उससे जुड़ी व्यवस्थाओं का दायरा भी तेजी से विस्तार कर रहा है।
भोपतपुरा में खुशी की लहर
जितेंद्र मिश्रा के CEO बनने की खबर सामने आते ही उनके पैतृक गांव भोपतपुरा में उत्सव जैसा माहौल हो गया। देवरिया जिले के बनकटा क्षेत्र में स्थित यह गांव बिहार की सीमा से सटा हुआ है। गांव के लोगों के लिए यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि एक छोटे से ग्रामीण परिवेश से निकलकर जितेंद्र मिश्रा भारतीय वायुसेना के शीर्ष पद तक पहुंचे और अब उन्हें राम मंदिर ट्रस्ट जैसी महत्वपूर्ण संस्था की जिम्मेदारी मिली है।
ग्रामीणों ने उनकी नियुक्ति को पूरे देवरिया जिले के लिए गौरव की बात बताया। लोगों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर बधाई दी और खुशी में पटाखे भी जलाए। गांव में जय श्रीराम के नारों के बीच लोगों ने कहा कि भोपतपुरा के लिए इससे बड़ी खुशी की बात नहीं हो सकती कि यहां का बेटा अब अयोध्या में राम मंदिर की व्यवस्था संभालने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाएगा।
गांव से जुड़े लोगों का कहना है कि जितेंद्र मिश्रा का परिवार आज भी भोपतपुरा से जुड़ा हुआ है। हालांकि उनके जीवन का बड़ा हिस्सा दिल्ली और सैन्य सेवा के दौरान देश के अलग-अलग हिस्सों में बीता, लेकिन पैतृक गांव से उनका रिश्ता बना रहा।
फाइटर पायलट से एयर मार्शल तक का सफर
जितेंद्र मिश्रा ने 6 दिसंबर 1986 को भारतीय वायुसेना में फाइटर पायलट के रूप में कमीशन प्राप्त किया था। इसके बाद करीब चार दशक तक उन्होंने वायुसेना में विभिन्न महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं।
अपने लंबे सैन्य करियर के दौरान उन्होंने 18 से अधिक प्रकार के विमानों पर उड़ान भरी और 3,000 घंटे से अधिक का उड़ान अनुभव हासिल किया। वह केवल एक फाइटर पायलट ही नहीं रहे, बल्कि कमांडिंग और रणनीतिक जिम्मेदारियों वाले कई महत्वपूर्ण पदों पर भी काम किया।
उनके करियर में फाइटर स्क्वाड्रन की कमान, चीफ टेस्ट पायलट, फ्रंटलाइन एयरबेस के एयर ऑफिसर कमांडिंग और एकीकृत रक्षा स्टाफ में उप प्रमुख जैसी जिम्मेदारियां शामिल रहीं। बाद में उन्होंने भारतीय वायुसेना की पश्चिमी वायु कमान के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ का पद भी संभाला।
इस पद पर रहते हुए उन्होंने देश की पश्चिमी सीमा से जुड़े महत्वपूर्ण सैन्य अभियानों और रणनीतिक जिम्मेदारियों का नेतृत्व किया। उनके पास बड़े सैन्य संगठनों के प्रबंधन और अलग-अलग एजेंसियों के बीच समन्वय का लंबा अनुभव रहा है।
कारगिल युद्ध से जुड़ा रहा करियर
जितेंद्र मिश्रा का सैन्य करियर कई महत्वपूर्ण अभियानों से जुड़ा रहा है। 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान भी उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने मिराज विमानों के जरिए लेजर-गाइडेड बमों की तैनाती से संबंधित अभियानों में भूमिका निभाई थी।
इसके बाद भी वह लगातार भारतीय वायुसेना में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालते रहे। लंबे सैन्य अनुभव के कारण उन्हें ऑपरेशनल प्लानिंग, रणनीतिक निर्णय और बड़े स्तर पर सैन्य संसाधनों के प्रबंधन की गहरी समझ हासिल हुई।
उनकी सेवाओं को विभिन्न सैन्य सम्मानों से भी सम्मानित किया गया। उन्हें अति विशिष्ट सेवा पदक और सर्वोत्तम युद्ध सेवा पदक जैसे सम्मान मिल चुके हैं।
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी निभाई अहम भूमिका
जितेंद्र मिश्रा की नियुक्ति के बाद उनके सैन्य करियर का एक और महत्वपूर्ण पहलू चर्चा में है। मई 2025 में हुए ऑपरेशन सिंदूर के दौरान वह पश्चिमी वायु कमान के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ थे।
इस दौरान पश्चिमी वायु कमान के तहत होने वाले हवाई अभियानों की योजना और संचालन में उनकी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी थी। ऑपरेशन से जुड़े सैन्य समन्वय और भारतीय वायु क्षेत्र की सुरक्षा से जुड़े कार्य भी उनकी जिम्मेदारियों में शामिल थे।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद उनकी सैन्य भूमिका एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आई। उनकी सेवाओं के लिए उन्हें सर्वोत्तम युद्ध सेवा पदक से सम्मानित किए जाने की जानकारी भी सामने आई है।
अब सैन्य सेवा से सेवानिवृत्ति के कुछ महीनों बाद उनके करियर का नया अध्याय शुरू हुआ है।
अप्रैल 2026 में हुए थे रिटायर
जितेंद्र मिश्रा ने करीब चार दशक तक भारतीय वायुसेना में सेवा देने के बाद 30 अप्रैल 2026 को सेवानिवृत्ति ली थी। सेना से रिटायर होने के कुछ ही महीनों बाद उन्हें राम मंदिर ट्रस्ट के पहले CEO के रूप में चुना गया है।
उनकी नियुक्ति से पहले इस पद के लिए बड़ी संख्या में आवेदन प्राप्त हुए थे। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, CEO पद के लिए 5,585 आवेदन आए थे। चयन प्रक्रिया के बाद उम्मीदवारों की छंटनी और साक्षात्कार किए गए तथा अंतिम पैनल में तीन नाम रखे गए। इनमें एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा, मेजर जनरल संजय प्रताप सिंह और श्रुति भारद्वाज शामिल थे। इसके बाद ट्रस्ट ने जितेंद्र मिश्रा के नाम पर मुहर लगाई।
इतनी बड़ी संख्या में आवेदनों के बीच चयन होना भी उनकी नियुक्ति को खास बनाता है।
ट्रस्ट ने पहली बार नियुक्त किया CEO
राम मंदिर निर्माण के बाद मंदिर के संचालन का दायरा लगातार बढ़ रहा है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु अयोध्या पहुंच रहे हैं और मंदिर परिसर में व्यवस्थाओं को अधिक संगठित तथा पेशेवर तरीके से संचालित करने की जरूरत महसूस की जा रही है।
इसी उद्देश्य से ट्रस्ट ने पहली बार CEO का पद बनाया और इस पद पर जितेंद्र मिश्रा की नियुक्ति की। उनकी जिम्मेदारी केवल प्रशासनिक कामकाज तक सीमित नहीं होगी। मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा, कर्मचारियों का प्रबंधन, दर्शन व्यवस्था और अलग-अलग सरकारी तथा निजी एजेंसियों के साथ समन्वय भी उनकी भूमिका का हिस्सा होगा।
मंदिर के लगातार विकसित होते स्वरूप को देखते हुए आने वाले समय में प्रबंधन संबंधी चुनौतियां भी बढ़ सकती हैं। ऐसे में बड़े संस्थानों और संवेदनशील ऑपरेशनल व्यवस्थाओं को संभालने का मिश्रा का अनुभव उपयोगी माना जा रहा है।
सैन्य अनुशासन अब मंदिर प्रबंधन में आएगा काम
जितेंद्र मिश्रा ने अपने सैन्य करियर में अनुशासन, नेतृत्व और संकट की परिस्थितियों में निर्णय लेने का व्यापक अनुभव हासिल किया है। राम मंदिर ट्रस्ट में उनकी नई भूमिका सैन्य सेवा से बिल्कुल अलग क्षेत्र की है, लेकिन दोनों में बड़े स्तर पर संगठन और समन्वय की जरूरत है।
अयोध्या में हर दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। त्योहारों और विशेष अवसरों पर यह संख्या और बढ़ जाती है। ऐसे में भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा, कर्मचारियों की तैनाती, आपातकालीन व्यवस्थाओं और विभिन्न एजेंसियों के बीच तालमेल की चुनौती हमेशा बनी रहती है।
एक पूर्व वरिष्ठ सैन्य अधिकारी के रूप में मिश्रा को बड़े संगठनों के संचालन और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय का अनुभव है। यही अनुभव अब राम मंदिर की व्यवस्थाओं को व्यवस्थित करने में इस्तेमाल किया जा सकता है।
देश-विदेश के प्रतिष्ठित संस्थानों से प्रशिक्षण
जितेंद्र मिश्रा ने अपने सैन्य करियर के दौरान भारत और विदेशों के प्रतिष्ठित रक्षा संस्थानों से प्रशिक्षण प्राप्त किया। उन्होंने नेशनल डिफेंस अकादमी और एयर फोर्स टेस्ट पायलट्स स्कूल से प्रशिक्षण लिया।
इसके अलावा उन्होंने अमेरिका के एयर कमांड एंड स्टाफ कॉलेज तथा ब्रिटेन के रॉयल कॉलेज ऑफ डिफेंस स्टडीज में भी उच्च स्तरीय सैन्य और रणनीतिक शिक्षा हासिल की। इन संस्थानों से प्राप्त प्रशिक्षण ने उनके रणनीतिक और नेतृत्व कौशल को और मजबूत किया।
उनके करियर में तकनीकी विशेषज्ञता के साथ-साथ प्रशासनिक और संगठनात्मक जिम्मेदारियों का भी व्यापक अनुभव रहा है। यही वजह है कि राम मंदिर ट्रस्ट ने इतने महत्वपूर्ण पद के लिए उन्हें चुना है।
5585 आवेदनों के बीच हुआ चयन
राम मंदिर ट्रस्ट के CEO पद के लिए करीब 5,585 आवेदन आने की जानकारी सामने आई है। इतनी बड़ी संख्या में उम्मीदवारों के बीच चयन प्रक्रिया आसान नहीं थी।
चयन समिति ने आवेदनों की जांच के बाद योग्य उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट किया और साक्षात्कार की प्रक्रिया पूरी की। अंतिम चरण में तीन नामों का पैनल ट्रस्ट के सामने रखा गया। इसके बाद ट्रस्ट की बैठक में जितेंद्र मिश्रा के नाम को मंजूरी दी गई।
यह नियुक्ति उनके अनुभव और योग्यता के साथ-साथ ट्रस्ट की उस जरूरत को भी दिखाती है जिसमें मंदिर के प्रशासन को बड़े और पेशेवर संगठन की तरह संचालित करने की आवश्यकता है।
परिवार का गांव से अब भी जुड़ाव
जितेंद्र मिश्रा का परिवार भले ही लंबे समय से दिल्ली में रहा हो, लेकिन उनके पैतृक गांव से संपर्क बना हुआ है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, गांव में उनके करीबी रिश्तेदार रहते हैं।
उनके पिता नथुनी मिश्रा दिल्ली के एक कॉलेज में लेक्चरर रहे थे। परिवार में शिक्षा और पेशेवर उपलब्धियों का भी लंबा इतिहास बताया जाता है। उनके भाई और बहन भी अपने-अपने क्षेत्रों में महत्वपूर्ण पदों पर रहे हैं।
गांव के लोगों के लिए जितेंद्र मिश्रा की सफलता केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है। वे इसे गांव और पूरे देवरिया जिले की प्रतिष्ठा से जोड़कर देख रहे हैं।
भोपतपुरा से अयोध्या तक का सफर
भोपतपुरा जैसे छोटे गांव से निकलकर भारतीय वायुसेना के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचना अपने आप में लंबा सफर है। अब उसी सफर में एक और महत्वपूर्ण पड़ाव जुड़ गया है।
जितेंद्र मिश्रा ने जहां लगभग चार दशक देश की सुरक्षा के लिए काम किया, वहीं अब उन्हें धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण संस्था के संचालन की जिम्मेदारी मिली है।
उनके सामने अब युद्ध क्षेत्र या सैन्य कमान जैसी चुनौतियां नहीं होंगी, बल्कि लाखों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े मंदिर के रोजमर्रा के संचालन को व्यवस्थित करना होगा। श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के साथ-साथ मंदिर परिसर से जुड़ी प्रशासनिक व्यवस्थाओं को प्रभावी ढंग से चलाना उनकी प्राथमिक जिम्मेदारियों में शामिल होगी।
गांव के लोगों को क्यों है गर्व?
भोपतपुरा के ग्रामीणों के लिए जितेंद्र मिश्रा की नियुक्ति इसलिए भी खास है क्योंकि यह उनके गांव की पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर सामने लाती है। गांव के लोग बताते हैं कि उन्होंने जितेंद्र मिश्रा को बचपन से लेकर आगे बढ़ते हुए देखा है और उनकी उपलब्धियों पर पहले भी गर्व किया है।
भारतीय वायुसेना में एयर मार्शल जैसे शीर्ष पद तक पहुंचना और अब राम मंदिर ट्रस्ट का पहला CEO बनना उनके करियर की दो अलग-अलग लेकिन महत्वपूर्ण उपलब्धियां हैं।
उनकी नियुक्ति की खबर मिलते ही गांव में मिठाई बांटी गई और लोगों ने खुशी मनाई। कई स्थानों पर आतिशबाजी की गई। ग्रामीणों ने इसे भगवान राम की नगरी अयोध्या से अपने गांव के सीधे जुड़ाव के रूप में भी देखा।
राम मंदिर के लिए बड़ी जिम्मेदारी
राम मंदिर अब केवल एक मंदिर परिसर तक सीमित नहीं है। अयोध्या का पूरा क्षेत्र तेजी से विकसित हो रहा है और देश-विदेश से श्रद्धालुओं का आगमन बढ़ रहा है। ऐसे में मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था भी लगातार बड़ी होती जा रही है।
CEO के रूप में जितेंद्र मिश्रा को इस बढ़ते संगठन को व्यवस्थित तरीके से चलाने की जिम्मेदारी मिली है। उन्हें मंदिर की विभिन्न व्यवस्थाओं के बीच तालमेल बनाना होगा और यह सुनिश्चित करना होगा कि श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलें।
सुरक्षा भी इस भूमिका का महत्वपूर्ण हिस्सा होगी। मंदिर और आसपास के क्षेत्र में बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी के कारण सुरक्षा एजेंसियों के साथ बेहतर समन्वय आवश्यक होगा।
इसके अलावा कर्मचारियों की व्यवस्था, तकनीकी सुविधाओं का इस्तेमाल, प्रशासनिक प्रक्रियाओं का सुधार और विभिन्न परियोजनाओं की निगरानी भी उनके कार्यक्षेत्र का हिस्सा हो सकती है।
सैन्य अनुभव और नई भूमिका
जितेंद्र मिश्रा की नियुक्ति का सबसे दिलचस्प पहलू यही है कि वह सीधे सैन्य नेतृत्व से मंदिर प्रशासन की भूमिका में आए हैं। लेकिन उनके समर्थकों और जानकारों का मानना है कि नेतृत्व, अनुशासन, संकट प्रबंधन और बड़े स्तर पर संचालन का अनुभव इस नई जिम्मेदारी में उपयोगी साबित होगा।
वायुसेना में उन्होंने अत्यंत संवेदनशील परिस्थितियों में निर्णय लिए हैं। अब उन्हें अलग तरह की चुनौती का सामना करना होगा, जहां करोड़ों लोगों की धार्मिक भावनाओं और श्रद्धा से जुड़ी व्यवस्था को संभालना होगा।
राम मंदिर ट्रस्ट को उम्मीद है कि उनका प्रशासनिक और संगठनात्मक अनुभव मंदिर की संचालन प्रणाली को मजबूत करने में मदद करेगा।
अब शुरू होगा नया अध्याय
2 सितंबर 2026 को हुई ट्रस्ट की बैठक के साथ जितेंद्र मिश्रा के जीवन का एक नया अध्याय शुरू हो गया है। एक ओर उनका सैन्य करियर समाप्त हुआ है, तो दूसरी ओर सार्वजनिक जीवन में एक नई जिम्मेदारी उनके सामने आई है।
देवरिया के भोपतपुरा से शुरू हुआ उनका सफर भारतीय वायुसेना के फाइटर पायलट से एयर मार्शल और अब राम मंदिर ट्रस्ट के पहले CEO तक पहुंचा है। यह सफर उनके गांव के लोगों के लिए प्रेरणा का विषय बन गया है।
फिलहाल भोपतपुरा में उनकी नियुक्ति को लेकर खुशी का माहौल है और लोग लगातार एक-दूसरे को बधाई दे रहे हैं। गांव में गूंजते जय श्रीराम के नारे और बांटी जा रही मिठाइयां इस बात की तस्वीर पेश कर रही हैं कि स्थानीय लोगों के लिए यह नियुक्ति कितनी बड़ी उपलब्धि है।
राम मंदिर के लिए भी यह नियुक्ति एक नए प्रशासनिक दौर की शुरुआत है। अब जितेंद्र मिश्रा के सामने चुनौती होगी कि वह अपने सैन्य अनुभव, अनुशासन और नेतृत्व क्षमता का इस्तेमाल अयोध्या में मंदिर की बढ़ती व्यवस्थाओं को प्रभावी ढंग से संचालित करने में करें।
इस तरह बिहार की सीमा से सटे देवरिया के छोटे से गांव भोपतपुरा का नाम अब अयोध्या के राम मंदिर से जुड़ गया है। जिस गांव से एक युवक ने भारतीय वायुसेना में फाइटर पायलट के रूप में अपने करियर की शुरुआत की थी, उसी गांव का बेटा आज देश के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों में से एक के प्रशासन की जिम्मेदारी संभालने जा रहा है। गांव के लिए यह सिर्फ एक नियुक्ति नहीं, बल्कि वर्षों की मेहनत और उपलब्धियों पर गर्व करने का अवसर है।