
फिल्म इंडस्ट्री में अक्सर किसी कलाकार की एक फिल्म उसकी पूरी जिंदगी बदल देती है। कभी कोई छोटा कलाकार अचानक बड़े पर्दे का सितारा बन जाता है, तो कभी किसी अनजान चेहरे को एक किरदार ऐसी पहचान दे देता है जिसकी उसने खुद भी कल्पना नहीं की होती। अभिनेता शोभिनव सत्या के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ है। नीम करोली बाबा के जीवन से प्रेरित फिल्म ‘हनुमान अंश’ में महाराज जी का किरदार निभाकर शोभिनव अचानक चर्चा में आ गए हैं।
कम बजट में बनी इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर जिस तरह की सफलता हासिल की, उसने फिल्म इंडस्ट्री को भी हैरान कर दिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक करीब 2 करोड़ रुपये की लागत में बनी फिल्म ने 100 करोड़ रुपये से अधिक की कमाई का आंकड़ा पार कर लिया है। फिल्म की शुरुआत हालांकि बेहद धीमी रही थी। रिलीज के शुरुआती दिनों में इसके शो सीमित थे और कमाई भी लाखों में रही, लेकिन बाद में दर्शकों के बीच फिल्म की चर्चा बढ़ती गई और इसकी कमाई ने रफ्तार पकड़ ली।
इस सफलता का सबसे बड़ा चेहरा बने शोभिनव सत्या, जिन्होंने नीम करोली बाबा का किरदार निभाया। दिलचस्प बात यह है कि वह इस भूमिका के लिए पहली पसंद भी नहीं थे। वह फिल्म में असिस्टेंट डायरेक्टर के तौर पर काम कर रहे थे। शूटिंग शुरू होने के समय मूल अभिनेता के उपलब्ध न रहने के बाद शोभिनव को यह जिम्मेदारी मिली और उन्होंने पर्दे पर महाराज जी की भूमिका निभाई।
लेकिन इस कामयाबी के बीच शोभिनव की एक बात ने सबसे ज्यादा लोगों का ध्यान खींचा है। फिल्म देखने के बाद कुछ दर्शक उन्हें असल में नीम करोली बाबा से जोड़कर देखने लगे और उनके पैर छूने लगे। शोभिनव का कहना है कि ऐसी स्थिति उन्हें असहज करती है। वह खुद को बाबा का अंश या बाबा नहीं मानते, बल्कि एक भक्त और माध्यम मानते हैं।
अचानक बदल गई शोभिनव सत्या की जिंदगी
शोभिनव सत्या का फिल्मी सफर किसी स्टार किड की तरह नहीं रहा। उन्होंने अभिनय की शिक्षा ली, थिएटर और कैमरे के पीछे काम किया और लंबे समय तक अपने मौके का इंतजार किया। फिल्म इंडस्ट्री में आने के बाद उन्हें सीधे बड़े स्टार की तरह लॉन्च नहीं किया गया।
रिपोर्टों के अनुसार शोभिनव ने FTII पुणे में भी अभिनय से जुड़ा एक कोर्स किया है और वह पेशेवर रूप से एक्टिंग टीचर के तौर पर भी काम कर चुके हैं। फिल्म ‘हनुमान अंश’ में आने से पहले वह असिस्टेंट डायरेक्टर के तौर पर काम कर रहे थे।
यानी जिस कलाकार को आज लोग पर्दे पर देखकर पहचान रहे हैं, वह कुछ समय पहले तक फिल्म निर्माण की दूसरी जिम्मेदारियों में व्यस्त था।
फिल्म के लिए उन्हें मुख्य भूमिका मिलना भी किसी सामान्य कास्टिंग प्रक्रिया का हिस्सा नहीं था। रिपोर्ट्स के मुताबिक मूल अभिनेता के पहले ही दिन बीमार पड़ जाने के बाद टीम को तुरंत विकल्प तलाशना पड़ा। शोभिनव उस समय प्रोजेक्ट से जुड़े हुए थे और उन्हें कहानी तथा किरदार की आध्यात्मिक पृष्ठभूमि की अच्छी समझ थी। इसी वजह से निर्देशक ने उन्हें भूमिका के लिए चुना।
खुद भी डर गए थे इतना बड़ा किरदार मिलने पर
नीम करोली बाबा का किरदार निभाना शोभिनव के लिए आसान नहीं था। उन्होंने खुद बताया है कि शुरुआत में वह इस भूमिका को लेकर काफी डरे हुए थे।
उनके मन में यह सवाल था कि क्या वह इस किरदार के साथ न्याय कर पाएंगे। यह डर इसलिए भी था क्योंकि वह खुद नीम करोली बाबा में आस्था रखते हैं। उनके लिए यह केवल एक फिल्मी किरदार नहीं था, बल्कि एक ऐसे आध्यात्मिक व्यक्तित्व की भूमिका थी जिनके प्रति वह व्यक्तिगत रूप से सम्मान रखते हैं।
उन्हें डर था कि अगर अभिनय में कोई कमी रह गई तो लोग सवाल उठा सकते हैं कि ऐसे महान संत की भूमिका किस कलाकार को दे दी गई। बाद में निर्देशक ने उन्हें भरोसा दिलाया कि उन्हें केवल अपने अभिनय पर ध्यान देना है और बाकी चीजों को फिल्म की टीम संभाल लेगी।
शोभिनव ने इसके बाद पूरी गंभीरता से किरदार की तैयारी की और फिल्म में नीम करोली बाबा की भूमिका निभाई।
फिल्म हिट हुई तो दर्शकों का व्यवहार भी बदल गया
‘हनुमान अंश’ के सफल होने के बाद शोभिनव को जिस तरह का सम्मान मिलने लगा, वह उनके लिए नया अनुभव है। दर्शकों का एक वर्ग उन्हें फिल्म में निभाए गए किरदार से इतना जोड़ने लगा कि कुछ लोग उनके पैर छूने लगे।
आमतौर पर अभिनेता अपने प्रशंसकों से मिलने और उनके प्यार का आनंद लेते हैं, लेकिन शोभिनव इस तरह की प्रतिक्रिया को अलग नजरिए से देखते हैं। उनके लिए बाबा और उनका किरदार अलग चीजें हैं।
उन्होंने कहा कि जब लोग उनके पैर छूते हैं तो उन्हें काफी असहज महसूस होता है। उनके मुताबिक ऐसा करना उनके लिए सही नहीं है और उन्होंने इसे बेहद कड़े शब्दों में ‘पाप’ तक कहा है। वह लोगों से कहते हैं कि उनके पैर छूने के बजाय बाबा की मूर्ति के चरण स्पर्श करें।
‘मैं बाबा का अंश नहीं हूं’
शोभिनव ने एक बातचीत में उन लोगों की धारणा पर भी प्रतिक्रिया दी जो उन्हें नीम करोली बाबा का ‘अंश’ कह रहे हैं।
उनका कहना है कि वह न तो बाबा का अंश हैं और न ही खुद को बाबा का दास मानते हैं। वह खुद को उनका भक्त मानते हैं। उनके मुताबिक उन्हें यह महसूस होता है कि भगवान और हनुमान जी ने उन्हें केवल एक माध्यम बनाया ताकि फिल्म के जरिए लोगों के भीतर मौजूद भक्ति की भावना सामने आ सके।
उनका यह बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि फिल्म की लोकप्रियता के बाद उनके और नीम करोली बाबा के बीच तुलना बढ़ गई है।
शोभिनव इस तुलना को अपने लिए सम्मान जरूर मानते हैं, लेकिन वह यह स्पष्ट रखना चाहते हैं कि पर्दे पर निभाया गया किरदार और वास्तविक आध्यात्मिक व्यक्तित्व एक ही चीज नहीं हैं।
‘मेरे पैर मत छुओ’
शोभिनव ने लोगों से यह भी अपील की है कि अगर वे उन्हें सम्मान देना चाहते हैं तो उनके पैर छूने के बजाय नीम करोली बाबा की मूर्ति के चरण स्पर्श करें।
उनका कहना है कि उन्होंने बाबा की भूमिका निभाई है और यह उनके लिए ईश्वर की कृपा से मिला अवसर था। इसलिए वह उस सम्मान को अपने नाम से जोड़ने के बजाय बाबा की ओर मोड़ना चाहते हैं।
उनका यह रवैया उनके निजी जीवनशैली से भी जुड़ा हुआ दिखाई देता है। एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि वह शराब और सिगरेट का सेवन नहीं करते और सात्विक जीवन जीने की कोशिश करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वह ऐसी चीजें नहीं करेंगे जो उनके मूल स्वभाव का हिस्सा नहीं हैं।
सात्विक जीवनशैली क्यों है महत्वपूर्ण?
शोभिनव के बारे में सामने आई जानकारी में उनकी सात्विक जीवनशैली का बार-बार उल्लेख हुआ है। निर्देशक ने भी उनके चयन के पीछे उनके अनुशासन और जीवनशैली को महत्वपूर्ण कारणों में बताया है। रिपोर्टों के अनुसार वह शराब और धूम्रपान से दूर रहते हैं और अपने काम के प्रति अनुशासित हैं।
यह बात ‘हनुमान अंश’ के किरदार से भी जुड़ती है, क्योंकि फिल्म में जिस आध्यात्मिक व्यक्तित्व को वह निभा रहे थे, उसके लिए केवल बाहरी रूप बदलना पर्याप्त नहीं था। किरदार की मानसिकता, संवाद बोलने का तरीका और आध्यात्मिक भाव को समझना भी जरूरी था।
शोभिनव की निजी जीवनशैली और उनके किरदार के बीच यह समानता निर्देशक के लिए भी फायदेमंद रही।
दिलचस्प बात—ब्लॉकबस्टर के बाद भी नई फिल्म नहीं
शोभिनव की कहानी का सबसे दिलचस्प हिस्सा यही है कि एक ऐसी फिल्म जिसने बॉक्स ऑफिस पर बड़ी सफलता हासिल की, उसके मुख्य अभिनेता के पास फिलहाल फिल्मों की लंबी कतार नहीं है।
बॉलीवुड में आम तौर पर किसी फिल्म की बड़ी सफलता के बाद अभिनेता को कई प्रोजेक्ट्स के ऑफर मिलने लगते हैं। खासकर जब कोई नया कलाकार किसी बड़े किरदार के जरिए दर्शकों के बीच अपनी पहचान बना लेता है। लेकिन शोभिनव का मामला थोड़ा अलग है।
उन्होंने खुद संकेत दिया है कि वह इस समय लगातार फिल्मों की घोषणा या ऑफर के पीछे भागने की कोशिश नहीं कर रहे हैं। उनके लिए यह सफलता अपने आप में एक बड़ा अनुभव है और वह आगे का रास्ता सहज तरीके से तय करना चाहते हैं।
यह भी संभव है कि फिल्म की सफलता के बाद उन्हें नए ऑफर मिलने शुरू हों, लेकिन फिलहाल आधिकारिक रूप से उनकी अगली बड़ी फिल्म को लेकर कोई स्पष्ट घोषणा सामने नहीं आई है।
एक फिल्म ने बदल दी पहचान
‘हनुमान अंश’ से पहले शोभिनव सत्या का नाम फिल्म इंडस्ट्री के आम दर्शकों के लिए बहुत जाना-पहचाना नहीं था। वह लंबे समय तक कैमरे के पीछे और अभिनय प्रशिक्षण से जुड़े काम करते रहे।
लेकिन महाराज जी की भूमिका ने उन्हें सीधे दर्शकों के बीच पहुंचा दिया।
फिल्म की सफलता के साथ उनका चेहरा सोशल मीडिया और मनोरंजन खबरों में दिखाई देने लगा। लोग उनकी एक्टिंग, लुक और किरदार की चर्चा करने लगे।
इससे यह भी साबित होता है कि किसी अभिनेता के करियर को आगे बढ़ाने के लिए हमेशा बड़ा स्टारडम या फिल्मी परिवार जरूरी नहीं होता। कभी-कभी एक सही भूमिका कलाकार को वह पहचान दे देती है जिसका वह लंबे समय से इंतजार कर रहा होता है।
फिल्म की शुरुआत बेहद धीमी थी
‘हनुमान अंश’ की सफलता इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर शुरुआत में कोई बड़ा संकेत नहीं दिया था।
रिपोर्टों के मुताबिक फिल्म की लागत लगभग 2 करोड़ रुपये थी और रिलीज के शुरुआती दिनों में इसकी कमाई बेहद कम रही। एक समय ऐसा लग रहा था कि फिल्म थिएटर में ज्यादा समय नहीं टिक पाएगी।
लेकिन तीसरे सप्ताह के आसपास फिल्म की चर्चा बढ़ने लगी। दर्शकों ने एक-दूसरे को फिल्म देखने के लिए प्रेरित करना शुरू किया और धीरे-धीरे सिनेमाघरों में भीड़ बढ़ने लगी।
यही माउथ पब्लिसिटी आगे चलकर फिल्म की सबसे बड़ी ताकत बनी।
बिना बड़े स्टार के फिल्म ने किया कमाल
फिल्म में कोई पारंपरिक अर्थों में बड़ा बॉलीवुड सुपरस्टार नहीं था। इसके बावजूद कहानी और आध्यात्मिक विषय ने दर्शकों को जोड़ लिया।
नीम करोली बाबा के जीवन और उनके आध्यात्मिक प्रभाव पर आधारित कहानी ने उन दर्शकों तक भी पहुंच बनाई जो इस तरह की फिल्मों में रुचि रखते हैं।
रिपोर्ट्स के अनुसार फिल्म को सीमित प्रचार के बावजूद दर्शकों का समर्थन मिला और इसकी कमाई लगातार बढ़ती गई। यही वजह है कि इसे साल की अप्रत्याशित सफलता वाली फिल्मों में गिना जा रहा है।
शोभिनव के लिए सफलता का मतलब क्या है?
शोभिनव की बातों से लगता है कि वह इस सफलता को केवल व्यक्तिगत स्टारडम के रूप में नहीं देखना चाहते।
वह बार-बार फिल्म के आध्यात्मिक पक्ष और नीम करोली बाबा के प्रति अपनी श्रद्धा की बात करते हैं। उन्हें लगता है कि उन्हें यह भूमिका किसी विशेष कारण से मिली और वह इस अवसर को अपनी व्यक्तिगत उपलब्धि से ज्यादा एक जिम्मेदारी के रूप में देखते हैं।
इसी वजह से जब दर्शक उनके पैर छूते हैं तो वह इसे सहजता से स्वीकार नहीं कर पाते।
उनका मानना है कि लोगों की श्रद्धा सही जगह पर जानी चाहिए और वह खुद उस श्रद्धा के अधिकारी नहीं हैं।
परिवार भी भावुक हुआ
शोभिनव की इस सफलता से उनका परिवार भी काफी भावुक हुआ है। रिपोर्टों के अनुसार जब उनके परिवार ने फिल्म देखी तो उनकी आंखों में आंसू आ गए थे।
उनके परिवार के लिए यह इसलिए भी खास था क्योंकि उन्होंने शोभिनव का संघर्ष करीब से देखा है। लंबे समय तक अभिनय और फिल्म निर्माण से जुड़े रहने के बाद उन्हें एक ऐसी भूमिका मिली जिसने उनका करियर बदल दिया।
परिवार के सदस्यों ने उनके साथ मजाक भी किया कि फिल्म देखकर निकले आंसू बाबा के लिए हैं, शोभिनव के लिए नहीं। यह टिप्पणी उनके परिवार के सहज और हल्के-फुल्के अंदाज को भी दिखाती है।
आगे किस तरह के किरदार करेंगे शोभिनव?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि ‘हनुमान अंश’ के बाद शोभिनव किस तरह के किरदार चुनेंगे।
किसी अभिनेता के लिए एक बेहद चर्चित आध्यात्मिक किरदार निभाने के बाद अगली भूमिका चुनना आसान नहीं होता। दर्शक अक्सर कलाकार को उसी किरदार से जोड़ लेते हैं।
लेकिन शोभिनव का मानना है कि आज के समय में कलाकारों को एक ही छवि में सीमित नहीं किया जाता। डिजिटल प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया के कारण दर्शक अलग-अलग भूमिकाओं में कलाकारों को स्वीकार करने लगे हैं।
इसलिए संभव है कि आने वाले समय में वह आध्यात्मिक किरदार से बिल्कुल अलग भूमिका में नजर आएं।
सफलता के बीच जमीन से जुड़े रहने की कोशिश
शोभिनव की कहानी का सबसे खास पहलू शायद यही है कि अचानक मिली लोकप्रियता के बावजूद वह खुद को किसी बड़े स्टार की तरह पेश नहीं कर रहे हैं।
वह अपने बारे में ज्यादा चर्चा करने के बजाय उस किरदार और आध्यात्मिक व्यक्तित्व की बात करते हैं जिसे उन्होंने पर्दे पर निभाया।
लोगों का पैर छूना उन्हें इसलिए भी असहज करता है क्योंकि उन्हें लगता है कि सम्मान व्यक्ति को नहीं बल्कि उस आध्यात्मिक विरासत को मिलना चाहिए, जिससे फिल्म प्रेरित है।
यही वजह है कि उनकी सफलता के साथ-साथ उनकी सादगी और जीवनशैली भी चर्चा में है।
क्या ‘हनुमान अंश’ शोभिनव के करियर की शुरुआत है?
अगर फिल्म की सफलता को देखा जाए तो ‘हनुमान अंश’ निश्चित रूप से शोभिनव सत्या के करियर में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। लेकिन किसी कलाकार के लिए एक फिल्म की सफलता और लंबे करियर के बीच काफी अंतर होता है।
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि वह आगे किस तरह के प्रोजेक्ट चुनते हैं और क्या उन्हें बड़े बैनर या अलग-अलग तरह की फिल्मों से प्रस्ताव मिलते हैं।
फिलहाल उनकी सबसे बड़ी पहचान नीम करोली बाबा के किरदार के रूप में बन चुकी है। उन्होंने एक ऐसा किरदार निभाया जिसे दर्शकों ने केवल अभिनय के तौर पर नहीं देखा, बल्कि उससे भावनात्मक और आध्यात्मिक रूप से भी जुड़ गए।
फिलहाल शोभिनव के लिए सबसे बड़ी चुनौती
‘हनुमान अंश’ के बाद शोभिनव के सामने सबसे बड़ी चुनौती शायद अपनी अगली पहचान बनाने की होगी। दर्शकों ने उन्हें एक आध्यात्मिक गुरु की भूमिका में स्वीकार किया है। अब अगर वह पूरी तरह अलग किरदार निभाते हैं तो दर्शकों की प्रतिक्रिया कैसी होगी, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।
लेकिन उनके अब तक के सफर को देखें तो उन्होंने लंबे समय तक संघर्ष किया है और उन्हें अभिनय के साथ-साथ फिल्म निर्माण का अनुभव भी है। इसलिए संभव है कि वह जल्दबाजी में कोई प्रोजेक्ट चुनने के बजाय अपने लिए सही भूमिका का इंतजार करें।
एक तरफ उनकी फिल्म रिकॉर्ड स्तर की सफलता हासिल कर रही है और दूसरी तरफ वह खुद सुर्खियों से दूरी बनाए रखने की कोशिश करते दिख रहे हैं। यही विरोधाभास उन्हें इस समय चर्चा का दिलचस्प चेहरा बना रहा है।
‘हनुमान अंश’ ने उन्हें अचानक देशभर में पहचान दिलाई, लेकिन शोभिनव सत्या के लिए यह सफलता केवल स्टार बनने का मौका नहीं बल्कि एक जिम्मेदारी भी है। वह लगातार यह स्पष्ट कर रहे हैं कि लोग उन्हें उस संत के रूप में न देखें, जिसका किरदार उन्होंने पर्दे पर निभाया है।
लोगों का उनके पैर छूना उन्हें अच्छा नहीं लगता और वह इसे अपने लिए गलत मानते हैं। वह चाहते हैं कि श्रद्धा का सम्मान हो, लेकिन उसका केंद्र वही आध्यात्मिक व्यक्तित्व रहे, जिसकी कहानी फिल्म में दिखाई गई है।
अब देखना यह है कि 100 करोड़ से ज्यादा की कमाई करने वाली ‘हनुमान अंश’ की सफलता शोभिनव सत्या के करियर को किस दिशा में ले जाती है। फिलहाल एक बात साफ है—जिस कलाकार को कुछ समय पहले तक बहुत कम लोग जानते थे, वह एक अप्रत्याशित ब्लॉकबस्टर के बाद मनोरंजन जगत में अचानक चर्चा का बड़ा नाम बन चुका है।