ब्रिक्स समिट से पहले नोएडा एयरपोर्ट पर पहली बार उतरे रूसी सैन्य विमान, पुतिन की यात्रा से पहले बढ़ी हलचल

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भारत में होने वाले 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर गतिविधियां अचानक तेज हो गई हैं। मंगलवार सुबह रूसी सेना के सैन्य परिवहन विमान के यहां उतरने के बाद एयरपोर्ट चर्चा में आ गया। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक रूसी सैन्य विमानों की यह लैंडिंग नोएडा एयरपोर्ट के लिए खास है, क्योंकि पहली बार किसी विदेशी सेना के सैन्य विमान ने यहां लैंडिंग की है।

रूसी विमानों के यहां पहुंचने को राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की प्रस्तावित भारत यात्रा और दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स सम्मेलन की तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है। 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में आयोजित होना है और इसमें कई देशों के राष्ट्राध्यक्षों के शामिल होने की उम्मीद है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच भी द्विपक्षीय बैठक प्रस्तावित है। भारत सरकार के मुताबिक प्रधानमंत्री मोदी ने अगस्त के अंत में पुतिन से मुलाकात के दौरान उन्हें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए भारत आने का निमंत्रण दिया था।

नोएडा एयरपोर्ट पर पहली बार विदेशी सैन्य विमान

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के लिए रूसी सैन्य विमान की लैंडिंग कई मायनों में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। रिपोर्टों के मुताबिक मंगलवार सुबह करीब 5:30 बजे रूसी सेना का IL-76 सैन्य परिवहन विमान एयरपोर्ट पर पहुंचा।

कुछ रिपोर्टों में नोएडा एयरपोर्ट पर रूसी सेना के तीन सैन्य विमानों के पहुंचने की जानकारी दी गई है। इनमें IL-76 भी शामिल बताया गया है। हालांकि अलग-अलग रिपोर्टों में विमानों की संख्या को लेकर अंतर दिखाई देता है, इसलिए उपलब्ध जानकारी के आधार पर इतना स्पष्ट है कि रूसी सैन्य परिवहन विमान यहां पहुंचे हैं और एयरपोर्ट पर रूसी अधिकारियों की गतिविधियां देखी गई हैं।

IL-76 रूस का बड़ा सैन्य परिवहन विमान है, जिसका इस्तेमाल सैनिकों, उपकरणों और अन्य जरूरी सामान को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने के लिए किया जाता है।

रूसी सैन्य विमान के नोएडा एयरपोर्ट पर उतरने के बाद एयरपोर्ट परिसर में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी गतिविधियां बढ़ गईं। रूसी टीम और भारतीय सुरक्षा एजेंसियों की ओर से विमानों की निगरानी की जा रही है।

रूसी एडवांस टीम के पहुंचने की जानकारी

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार इन विमानों के जरिए रूस की एडवांस टीम के भारत पहुंचने की जानकारी सामने आई है। किसी राष्ट्राध्यक्ष की यात्रा से पहले एडवांस टीम का संबंधित देश में पहुंचना सामान्य सुरक्षा और व्यवस्थागत प्रक्रिया का हिस्सा होता है।

एडवांस टीम आमतौर पर यात्रा के दौरान सुरक्षा, रूट, ठहरने की जगह, एयरपोर्ट से आने-जाने की व्यवस्था और स्थानीय अधिकारियों के साथ समन्वय जैसे मुद्दों पर काम करती है।

ऐसे में रूसी सैन्य विमान का नोएडा एयरपोर्ट पर पहुंचना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि रूस की टीम ने राष्ट्रपति पुतिन की प्रस्तावित भारत यात्रा से पहले अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं।

हालांकि केवल इन विमानों की लैंडिंग के आधार पर यह निश्चित रूप से कहना संभव नहीं है कि पुतिन का मुख्य विमान भी नोएडा एयरपोर्ट पर ही उतरेगा।

क्या नोएडा एयरपोर्ट पर उतरेंगे पुतिन?

रूसी सैन्य विमानों के नोएडा पहुंचने के बाद सबसे ज्यादा चर्चा इसी बात की हो रही है कि क्या राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का विमान भी इसी एयरपोर्ट पर उतरेगा।

कुछ रिपोर्टों में ऐसी संभावना जताई गई है। इसके पीछे तर्क यह है कि विदेशी सैन्य विमान और एडवांस टीम पहले ही नोएडा पहुंच चुकी है, इसलिए संभव है कि रूसी पक्ष ने इस एयरपोर्ट को राष्ट्रपति की यात्रा के लिए भी विकल्प के तौर पर तैयार किया हो।

लेकिन फिलहाल इसे अंतिम निर्णय के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। राष्ट्रपति के विमान की लैंडिंग से जुड़ी अंतिम व्यवस्था सुरक्षा और प्रोटोकॉल से जुड़े अधिकारियों के निर्णय पर निर्भर करेगी।

दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान बड़ी संख्या में VVIP और विशेष विमानों के आने की उम्मीद है। ऐसे में सभी विमानों को एक ही एयरपोर्ट पर संभालना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। इसी वजह से नोएडा एयरपोर्ट समेत अन्य हवाई अड्डों को भी विशेष उड़ानों के लिए इस्तेमाल करने की योजना पर काम किया जा रहा है।

दिल्ली में आएंगे करीब 35 विशेष विमान

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान दिल्ली में हवाई यातायात सामान्य दिनों की तुलना में काफी अधिक रहने वाला है। रिपोर्टों के मुताबिक सम्मेलन के लिए करीब 35 विशेष विमान, VVIP उड़ानें और विभिन्न देशों के प्रतिनिधिमंडलों को लेकर आने वाले चार्टर विमान दिल्ली पहुंच सकते हैं।

इसी वजह से अधिकारियों ने मल्टी-एयरपोर्ट रणनीति पर काम शुरू किया है। इसका उद्देश्य यह है कि राजधानी में आने वाले विशेष विमानों को अलग-अलग एयरपोर्ट पर संभाला जा सके और किसी एक एयरपोर्ट पर अत्यधिक दबाव न पड़े।

11 सितंबर को विशेष विमानों की आवाजाही सबसे ज्यादा रहने की संभावना जताई गई है। ऐसे में नोएडा एयरपोर्ट का इस्तेमाल रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हो सकता है।

12 और 13 सितंबर को ब्रिक्स समिट

इस साल ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी भारत कर रहा है। 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित किया जाना है।

सम्मेलन में सदस्य देशों के शीर्ष नेता वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा करेंगे। खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा, सार्वजनिक स्वास्थ्य, आपदा प्रबंधन, महत्वपूर्ण सप्लाई चेन और वैश्विक आर्थिक सहयोग जैसे विषयों पर भी चर्चा होने की उम्मीद है।

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की यात्रा इस सम्मेलन के दौरान भारत-रूस संबंधों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

मोदी-पुतिन की मुलाकात पर भी नजर

राष्ट्रपति पुतिन की भारत यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी द्विपक्षीय बैठक भी प्रस्तावित है। रिपोर्टों के अनुसार दोनों नेताओं की मुलाकात 11 सितंबर को होने की उम्मीद है।

इस बातचीत में भारत-रूस के बीच रक्षा, ऊर्जा, व्यापार और रणनीतिक सहयोग से जुड़े मुद्दे महत्वपूर्ण हो सकते हैं। रूस की ओर से भारत को अपने पांचवीं पीढ़ी के Su-57 लड़ाकू विमान और उससे जुड़ी तकनीक की पेशकश का मुद्दा भी चर्चा में है।

भारत और रूस के बीच रक्षा सहयोग लंबे समय से दोनों देशों के रणनीतिक संबंधों का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। इसलिए पुतिन की यात्रा के दौरान रक्षा क्षेत्र से जुड़े नए प्रस्तावों पर दुनिया की नजर रहेगी।

नोएडा एयरपोर्ट क्यों महत्वपूर्ण हो गया?

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को भारत के नए बड़े विमानन केंद्रों में विकसित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य दिल्ली-एनसीआर के बढ़ते हवाई यातायात का दबाव कम करना भी है।

एयरपोर्ट का औपचारिक उद्घाटन मार्च 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किया गया था और जून से यहां घरेलू उड़ानें शुरू हुई थीं। मौजूदा समय में एयरपोर्ट से कई भारतीय शहरों के लिए उड़ानें संचालित की जा रही हैं।

ऐसे में किसी विदेशी सेना के विमान की लैंडिंग एयरपोर्ट के लिए एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम मानी जा रही है।

हालांकि किसी विदेशी सैन्य विमान का यहां उतरना यह जरूरी नहीं दर्शाता कि एयरपोर्ट की नियमित अंतरराष्ट्रीय उड़ान सेवाएं भी तुरंत शुरू होने वाली हैं। दोनों चीजें अलग प्रक्रियाएं हैं।

IL-76 विमान क्यों खास है?

रूसी IL-76 को मुख्य रूप से भारी सैन्य परिवहन के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इसका डिजाइन बड़ी मात्रा में सैनिकों, सैन्य सामान और दूसरे उपकरणों को लंबी दूरी तक ले जाने के लिए किया गया है।

किसी VVIP यात्रा से पहले ऐसे परिवहन विमान का पहुंचना कई बार एडवांस टीम, संचार उपकरण, सुरक्षा सामग्री और अन्य आवश्यक संसाधनों को पहले से पहुंचाने की तैयारी का हिस्सा होता है।

यही वजह है कि नोएडा एयरपोर्ट पर IL-76 की मौजूदगी को पुतिन की यात्रा की तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है।

हालांकि यह कहना अभी उचित नहीं होगा कि विमान में क्या-क्या सामान था या उसका पूरा मिशन क्या था, क्योंकि इस संबंध में आधिकारिक तौर पर विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।

सुरक्षा एजेंसियां हुईं सक्रिय

रूसी सैन्य विमान के पहुंचने के बाद एयरपोर्ट पर सुरक्षा एजेंसियों की सक्रियता बढ़ गई है। रूसी अधिकारियों की टीम और भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय की प्रक्रिया चल रही है।

VVIP यात्रा के दौरान सुरक्षा को लेकर कई स्तरों पर तैयारी की जाती है। इसमें एयरपोर्ट की सुरक्षा, रनवे की सुरक्षा, विमान के आसपास का सुरक्षा घेरा, आने-जाने के रूट और स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय शामिल होता है।

नोएडा एयरपोर्ट से दिल्ली तक आने-जाने के संभावित मार्गों को लेकर भी सुरक्षा एजेंसियां पहले से तैयारी कर सकती हैं।

पुतिन के दौरे से पहले बढ़ी गतिविधियां

राष्ट्रपति पुतिन की भारत यात्रा को लेकर पहले से ही कूटनीतिक और सुरक्षा स्तर पर तैयारियां चल रही हैं। प्रधानमंत्री मोदी और पुतिन ने 31 अगस्त को बिश्केक में SCO शिखर सम्मेलन के दौरान मुलाकात की थी। इस बातचीत में दोनों नेताओं ने भारत-रूस के बीच राजनीतिक, आर्थिक, रक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष और अन्य क्षेत्रों में सहयोग की समीक्षा की थी।

उसी बैठक के दौरान मोदी ने पुतिन को 12-13 सितंबर को भारत में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया था।

अब रूसी सैन्य विमान के भारत पहुंचने के बाद पुतिन की यात्रा को लेकर तैयारियां और अधिक स्पष्ट दिखाई देने लगी हैं।

भारत-रूस रिश्तों के लिए भी अहम यात्रा

पुतिन की भारत यात्रा केवल ब्रिक्स सम्मेलन तक सीमित नहीं होगी। भारत और रूस के बीच द्विपक्षीय संबंधों के कई अहम मुद्दे इस यात्रा के दौरान चर्चा में आ सकते हैं।

रक्षा सहयोग के अलावा ऊर्जा, व्यापार, परमाणु ऊर्जा और नई तकनीक से जुड़े क्षेत्रों में भी दोनों देशों के बीच बातचीत होने की संभावना है।

रूसी पक्ष भारत के साथ रक्षा तकनीक के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की इच्छा जाहिर कर चुका है। Su-57 को लेकर संभावित बातचीत इसी व्यापक रक्षा साझेदारी का हिस्सा मानी जा रही है।

क्या रूसी विमान की लैंडिंग कोई असाधारण घटना है?

विदेशी सैन्य विमान का किसी दूसरे देश में उतरना अपने आप में असामान्य नहीं है। उच्चस्तरीय राजकीय यात्राओं के दौरान सैन्य परिवहन विमान अक्सर एडवांस टीम और आवश्यक संसाधनों को पहले पहुंचाने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं।

लेकिन नोएडा एयरपोर्ट के संदर्भ में यह घटना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह एयरपोर्ट अभी नया है और यहां विदेशी सैन्य विमान की लैंडिंग पहली बार हुई है।

इसके अलावा यह घटनाक्रम भारत में होने वाले एक बड़े अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन और रूसी राष्ट्रपति की प्रस्तावित यात्रा से ठीक पहले हुआ है। इसलिए इसकी चर्चा स्वाभाविक रूप से अधिक हो रही है।

नोएडा एयरपोर्ट के लिए बड़ा टेस्ट

ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान यदि नोएडा एयरपोर्ट का इस्तेमाल VVIP या विशेष विमानों के लिए किया जाता है, तो यह नए एयरपोर्ट की परिचालन क्षमता और सुरक्षा व्यवस्था के लिए भी एक महत्वपूर्ण परीक्षा होगी।

एक नए एयरपोर्ट को सामान्य घरेलू उड़ानों के अलावा हाई-प्रोफाइल अंतरराष्ट्रीय मेहमानों की आवाजाही संभालने के लिए अलग स्तर की तैयारी करनी होती है।

रनवे संचालन, ग्राउंड हैंडलिंग, सुरक्षा, एयर ट्रैफिक मैनेजमेंट और VVIP प्रोटोकॉल—सभी व्यवस्थाओं का समन्वय जरूरी होगा।

फिलहाल तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं

रूसी सैन्य विमानों के नोएडा पहुंचने से पुतिन की यात्रा की तैयारियों को लेकर हलचल जरूर बढ़ गई है, लेकिन अभी यह आधिकारिक रूप से स्पष्ट नहीं है कि राष्ट्रपति का विमान किस एयरपोर्ट पर उतरेगा।

इसी तरह उपलब्ध रिपोर्टों में नोएडा पहुंचने वाले रूसी सैन्य विमानों की संख्या को लेकर भी अंतर दिखाई देता है। इसलिए निश्चित संख्या बताने के बजाय यह कहना अधिक उचित है कि रूसी सैन्य परिवहन विमान नोएडा एयरपोर्ट पर पहुंचे हैं और वहां रूसी एडवांस टीम की गतिविधियां देखी गई हैं।

आने वाले दिनों में जब VVIP उड़ानों का आधिकारिक कार्यक्रम और सुरक्षा प्रोटोकॉल सामने आएगा, तब यह अधिक स्पष्ट हो सकता है कि पुतिन और दूसरे राष्ट्राध्यक्ष किन एयरपोर्ट का इस्तेमाल करेंगे।

फिलहाल नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर रूसी सैन्य विमान की लैंडिंग ने इस नए एयरपोर्ट को अंतरराष्ट्रीय स्तर की एक बड़ी कूटनीतिक गतिविधि के केंद्र में ला दिया है। ब्रिक्स सम्मेलन शुरू होने में अब कुछ ही दिन बाकी हैं और अगले कुछ दिनों में एयरपोर्ट पर वीवीआईपी विमानों की आवाजाही और सुरक्षा तैयारियां और तेज होने की संभावना है।

12 और 13 सितंबर को होने वाला ब्रिक्स सम्मेलन भारत के लिए एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक आयोजन है। ऐसे में नोएडा एयरपोर्ट पर रूसी सैन्य विमान की शुरुआती मौजूदगी यह जरूर दिखाती है कि बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजन से पहले मेजबान देश और विदेशी प्रतिनिधिमंडल अपनी तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुट गए हैं।

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