सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ का रूस दौरा खत्म, आर्टिलरी आधुनिकीकरण और सैन्य सहयोग पर हुई अहम चर्चा

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भारतीय थल सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ का रूस का तीन दिवसीय आधिकारिक दौरा 18 सितंबर 2026 को समाप्त हो गया। 16 से 18 सितंबर तक चले इस दौरे का उद्देश्य भारत और रूस के बीच लंबे समय से चले आ रहे रक्षा संबंधों और दोनों सेनाओं के बीच सैन्य सहयोग को आगे बढ़ाना था। यात्रा के दौरान जनरल सेठ ने रूस के वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों से मुलाकात की और प्रशिक्षण, क्षमता विकास, सैन्य पेशेवर आदान-प्रदान तथा आर्टिलरी के आधुनिकीकरण जैसे मुद्दों पर चर्चा की।

यह दौरा ऐसे समय हुआ है जब भारत अपनी सेना में मौजूद रूसी मूल की सैन्य प्रणालियों के रखरखाव और आधुनिकीकरण के साथ-साथ रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता बढ़ाने पर भी काम कर रहा है। दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग अब केवल हथियारों की खरीद तक सीमित नहीं है, बल्कि संयुक्त उत्पादन, तकनीकी सहयोग, प्रशिक्षण और सैन्य संस्थानों के बीच आदान-प्रदान तक फैला हुआ है।

रूसी उप रक्षा मंत्री से मुलाकात

रूस यात्रा के दौरान जनरल धीरज सेठ ने रूसी रक्षा मंत्रालय में उप रक्षा मंत्री जनरल यूनुस-बेक येवकुरोव से मुलाकात की। दोनों पक्षों के बीच संयुक्त क्षमता विकास, पेशेवर सैन्य आदान-प्रदान और भारत-रूस सेनाओं के बीच संपर्क को और मजबूत करने के तरीकों पर बातचीत हुई। भारतीय सेना के अनुसार, बैठक का फोकस दोनों देशों के सैन्य सहयोग को अलग-अलग क्षेत्रों में आगे बढ़ाने पर रहा।

जनरल सेठ ने रूस में भारत के राजदूत विनय कुमार से भी मुलाकात की। दोनों के बीच भारत-रूस द्विपक्षीय सहयोग और रक्षा संबंधों को मजबूत करने के उपायों पर चर्चा हुई।

इससे पहले जनरल सेठ ने मॉस्को में रूसी थल सेना के मुख्यालय का दौरा किया था। वहां दोनों पक्षों ने बदलते सैन्य परिदृश्य पर अपने विचार साझा किए और प्रशिक्षण, क्षमता विकास तथा पेशेवर अनुभव के आदान-प्रदान को बढ़ाने के तरीकों पर बातचीत की।

आर्टिलरी आधुनिकीकरण पर खास फोकस

रूस यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव सेंट पीटर्सबर्ग स्थित मिखाइलोव्स्काया मिलिट्री आर्टिलरी अकादमी रहा। जनरल धीरज सेठ ने अकादमी का दौरा किया और उसके नेतृत्व तथा फैकल्टी के साथ बातचीत की।

बैठक में आर्टिलरी प्रशिक्षण की पद्धतियों, सैन्य शिक्षा और आर्टिलरी के आधुनिकीकरण से जुड़े विषयों पर विचारों का आदान-प्रदान हुआ। यह चर्चा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि भारतीय सेना अपनी आर्टिलरी क्षमताओं को आधुनिक बनाने और उन्हें बदलती युद्ध परिस्थितियों के अनुरूप विकसित करने पर लगातार जोर दे रही है।

आर्टिलरी आधुनिक युद्ध में लंबी दूरी से फायर सपोर्ट देने की महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। ऐसे में इसके प्रशिक्षण, तकनीकी क्षमता और संचालन संबंधी प्रक्रियाओं में बदलाव सेना की समग्र क्षमता का हिस्सा होते हैं। रूस की सैन्य अकादमी में हुई बातचीत को इसी व्यापक संदर्भ में देखा जा रहा है।

प्रशिक्षण और पेशेवर सैन्य अनुभव साझा करने पर जोर

भारत और रूस के बीच रक्षा सहयोग का एक महत्वपूर्ण हिस्सा दोनों सेनाओं के बीच प्रशिक्षण और पेशेवर आदान-प्रदान भी है। जनरल सेठ की यात्रा के दौरान इस क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई।

रूसी थल सेना के मुख्यालय में हुई बातचीत में दोनों पक्षों ने समकालीन सैन्य विकास पर अपने अनुभव साझा किए। इसके साथ ही प्रशिक्षण कार्यक्रमों, क्षमता निर्माण और दोनों सेनाओं के बीच पेशेवर संपर्क को मजबूत करने के उपायों पर भी चर्चा हुई।

इस तरह का सैन्य आदान-प्रदान केवल उपकरणों की जानकारी तक सीमित नहीं होता। इसमें प्रशिक्षण के तरीके, सैन्य शिक्षा, संचालन से जुड़े अनुभव और बदलती तकनीक के अनुरूप सेना को तैयार करने जैसे पहलू भी शामिल होते हैं।

रूसी मूल के हथियारों के रखरखाव का मुद्दा भी महत्वपूर्ण

भारत की सैन्य सूची में लंबे समय से बड़ी संख्या में रूसी मूल के प्लेटफॉर्म और प्रणालियां शामिल रही हैं। इनमें टी-90 और टी-72 जैसे टैंक तथा अन्य सैन्य उपकरण शामिल हैं। इसलिए इन प्रणालियों के लिए स्पेयर पार्ट्स, रखरखाव और अपग्रेड से जुड़ी आपूर्ति भारत के लिए महत्वपूर्ण विषय बनी हुई है।

जनरल सेठ की यात्रा से पहले जारी रिपोर्टों में भी रूसी मूल के सैन्य उपकरणों के लिए सपोर्ट और स्पेयर पार्ट्स की उपलब्धता को भारत-रूस रक्षा बातचीत का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया गया था। भारत एक तरफ इन प्रणालियों की परिचालन जरूरतों को पूरा करने की कोशिश करता है, वहीं दूसरी तरफ महत्वपूर्ण कलपुर्जों और तकनीक के घरेलू उत्पादन को बढ़ाने पर भी काम कर रहा है।

यह बदलाव भारत की व्यापक रक्षा औद्योगिक नीति से भी जुड़ा है, जिसमें पुराने प्लेटफॉर्म को बनाए रखने के साथ-साथ उनके आधुनिकीकरण और स्वदेशीकरण पर जोर दिया जा रहा है।

भारत-रूस रक्षा संबंध सिर्फ खरीद तक सीमित नहीं

भारत और रूस के बीच रक्षा सहयोग कई दशकों पुराना है। समय के साथ दोनों देशों के बीच संबंध हथियारों की खरीद और आपूर्ति से आगे बढ़कर संयुक्त उत्पादन और तकनीकी सहयोग तक पहुंचे हैं।

ब्रह्मोस मिसाइल परियोजना इसका एक प्रमुख उदाहरण है, जिसमें दोनों देशों के बीच संयुक्त विकास और उत्पादन से जुड़ा सहयोग रहा है। दोनों सेनाओं के बीच नियमित सैन्य अभ्यास और संस्थागत संपर्क भी इस रक्षा साझेदारी का हिस्सा हैं।

स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट यानी SIPRI के आंकड़ों के अनुसार, 2021 से 2025 के बीच भारत के हथियार आयात में रूस की हिस्सेदारी 40 प्रतिशत रही और इस अवधि में रूस भारत का सबसे बड़ा हथियार आपूर्तिकर्ता था। यह आंकड़ा इस बात को दर्शाता है कि भारतीय रक्षा क्षेत्र में रूसी मूल की प्रणालियों का महत्व अभी भी काफी है।

हालांकि, भारत के रक्षा आयात का स्रोत समय के साथ विविध हुआ है और देश घरेलू रक्षा उत्पादन तथा विभिन्न अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों को भी बढ़ा रहा है।

मॉस्को में गार्ड ऑफ ऑनर और श्रद्धांजलि

जनरल धीरज सेठ को मॉस्को में औपचारिक गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। उन्होंने टॉम्ब ऑफ द अननोन सोल्जर पर जाकर शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि भी दी।

यह स्मारक द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान मारे गए सोवियत सैनिकों की स्मृति से जुड़ा है। भारतीय सेना प्रमुख की ओर से यहां श्रद्धांजलि देना यात्रा के औपचारिक कार्यक्रम का हिस्सा था।

इस दौरान रूसी सैन्य अधिकारियों के साथ उनकी बैठकों में दोनों सेनाओं के बीच लंबे समय से चल रहे संस्थागत संबंधों को आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई।

सेंट पीटर्सबर्ग में खास सैन्य कार्यक्रम

मिखाइलोव्स्काया मिलिट्री आर्टिलरी अकादमी के दौरे के अलावा सेंट पीटर्सबर्ग में जनरल सेठ को एक विशेष औपचारिक सम्मान भी दिया गया। उन्हें ऐतिहासिक पीटर एंड पॉल फोर्ट्रेस में पारंपरिक तोप दागने का अवसर मिला। यह कार्यक्रम उनकी रूस यात्रा के सैन्य और सांस्कृतिक पहलुओं का हिस्सा था।

हालांकि, इस कार्यक्रम का मुख्य आधिकारिक महत्व अकादमी में हुई बातचीत और आर्टिलरी प्रशिक्षण तथा आधुनिकीकरण से जुड़े विषयों पर केंद्रित रहा।

भारत-रूस संबंधों के लिए यात्रा का महत्व

जनरल धीरज सेठ की रूस यात्रा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की 11 सितंबर को नई दिल्ली में हुई मुलाकात के कुछ दिनों बाद हुई। दोनों नेताओं ने BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान भारत-रूस संबंधों के विभिन्न क्षेत्रों की समीक्षा की थी, जिसमें रक्षा सहयोग भी शामिल था।

ऐसे समय में सेना प्रमुख का मॉस्को दौरा दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय सैन्य संपर्क को बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण संस्थागत पहल के रूप में देखा जा रहा है।

रक्षा संबंधों के अलावा भारत और रूस के बीच ऊर्जा, अंतरिक्ष, व्यापार और अन्य क्षेत्रों में भी सहयोग है। लेकिन सेना प्रमुख की यात्रा का मुख्य फोकस सैन्य और रक्षा सहयोग ही रहा।

थल सेना स्तर पर सहयोग बढ़ाने पर सहमति

रूस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच थल सेना सहयोग को अलग-अलग क्षेत्रों में आगे बढ़ाने पर सहमति बनी। रूसी रक्षा मंत्रालय के अनुसार, सैन्य सहयोग और दोनों देशों की सशस्त्र सेनाओं की क्षमता बढ़ाने वाले प्रोजेक्ट्स पर चर्चा हुई।

दोनों पक्षों ने पेशेवर सैन्य सहयोग, प्रशिक्षण और क्षमता विकास को आगे बढ़ाने पर जोर दिया। इसके साथ ही समकालीन सैन्य परिस्थितियों और बदलती युद्ध तकनीक से जुड़े अनुभव साझा करने की प्रक्रिया को मजबूत करने की बात भी सामने आई।

आगे किन क्षेत्रों में बढ़ सकता है सहयोग?

जनरल धीरज सेठ की यात्रा के दौरान हुई चर्चाओं से यह संकेत मिलता है कि भारत और रूस के बीच सैन्य सहयोग आने वाले समय में कई स्तरों पर आगे बढ़ सकता है। इनमें सैन्य प्रशिक्षण, आर्टिलरी आधुनिकीकरण, पेशेवर सैन्य शिक्षा, क्षमता विकास और रूसी मूल के उपकरणों के रखरखाव से जुड़े विषय शामिल हैं।

भारत के लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती यह भी है कि रूसी मूल के पुराने प्लेटफॉर्म की परिचालन क्षमता को बनाए रखते हुए धीरे-धीरे स्वदेशी तकनीक और उत्पादन को बढ़ाया जाए। ऐसे में रूस के साथ मौजूदा प्रणालियों के रखरखाव और आधुनिकीकरण पर सहयोग के साथ घरेलू रक्षा उद्योग को विकसित करना समानांतर प्रक्रिया रहेगी।

तीन दिवसीय दौरे का निष्कर्ष

18 सितंबर को समाप्त हुई इस तीन दिवसीय यात्रा में जनरल धीरज सेठ ने मॉस्को और सेंट पीटर्सबर्ग में रूसी सैन्य नेतृत्व तथा प्रमुख सैन्य संस्थानों के साथ बातचीत की। यात्रा के दौरान प्रशिक्षण, सैन्य क्षमता विकास, पेशेवर आदान-प्रदान और आर्टिलरी आधुनिकीकरण प्रमुख विषय रहे।

भारत और रूस के बीच रक्षा सहयोग की प्रकृति पिछले कुछ दशकों में बदली है। जहां पहले हथियारों और सैन्य उपकरणों की खरीद इसका प्रमुख आधार थी, वहीं अब संयुक्त उत्पादन, तकनीकी सहयोग, प्रशिक्षण और संस्थागत सैन्य संपर्क भी महत्वपूर्ण हिस्से बन चुके हैं।

जनरल धीरज सेठ की रूस यात्रा इसी व्यापक रक्षा संबंध के सैन्य स्तर वाले हिस्से को आगे बढ़ाने पर केंद्रित रही। यात्रा के दौरान हुई चर्चाओं और तय किए गए सहयोग क्षेत्रों का वास्तविक प्रभाव आने वाले समय में प्रशिक्षण कार्यक्रमों, क्षमता विकास परियोजनाओं, आर्टिलरी आधुनिकीकरण और रूसी मूल के उपकरणों के सपोर्ट से जुड़ी गतिविधियों में दिखाई देगा।

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