
दिल्ली के रियल एस्टेट प्रोफेशनल और अडानी रियल्टी से जुड़े 31 वर्षीय युवराज सिंह मनचंदा की हत्या की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, मामले में नए और गंभीर तथ्य सामने आ रहे हैं। युवराज की हत्या के आरोप में उनकी पूर्व सहकर्मी अन्या वत्स और उसके साथी संयम सचदेवा को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस की जांच में हत्या के पीछे आर्थिक विवाद का एंगल सामने आया है। अब इस जांच के बीच एक अलग पुरानी FIR भी सामने आई है, जिसमें अन्या वत्स पर फर्जी सरकारी पहचान और प्रभावशाली अधिकारियों से कथित संपर्क का दावा करके करोड़ों रुपये की ठगी करने के आरोप लगाए गए हैं। इन आरोपों की पुलिस जांच कर रही है और इस पुरानी FIR का युवराज हत्याकांड से सीधा संबंध है या नहीं, यह अभी स्थापित होना बाकी है।
पूर्व RAW प्रमुख को ‘अंकल’ बताने का आरोप
सामने आई 16 अगस्त 2026 की FIR में शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि अन्या वत्स ने पूर्व RAW प्रमुख सामंत गोयल को अपना ‘अंकल’ बताया था। शिकायत में यह भी आरोप है कि उसने अनिल गुप्ता नाम के एक व्यक्ति को अपना स्थानीय अभिभावक बताया और सरकारी एजेंसियों में कथित संपर्कों का हवाला देकर शिकायतकर्ता को भरोसा दिलाया कि उसके खिलाफ चल रही कार्रवाई को प्रभावित या समाप्त कराया जा सकता है।
FIR के अनुसार, अन्या ने कथित तौर पर खुद को गृह मंत्रालय, राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी NIA, प्रवर्तन निदेशालय यानी ED और RAW जैसे संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंच रखने वाली व्यक्ति के तौर पर पेश किया। इन दावों का इस्तेमाल शिकायतकर्ता को कथित तौर पर यह विश्वास दिलाने के लिए किया गया कि सरकारी जांच या कार्रवाई को खत्म कराया जा सकता है।
यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि ये सभी बातें शिकायत में लगाए गए आरोप हैं। किसी व्यक्ति का किसी अधिकारी को रिश्तेदार बताना या किसी सरकारी एजेंसी से संपर्क होने का दावा करना अपने आप में उस दावे को सत्य साबित नहीं करता। पुलिस अब इन दावों और उनसे जुड़े दस्तावेजों की जांच कर रही है।
फर्जी सरकारी नोटिस भेजने का भी आरोप
पुरानी FIR में शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि WhatsApp के जरिए उसे कुछ ऐसे सरकारी नोटिस भेजे गए, जिन्हें देखकर उसे लगा कि उसके खिलाफ ED या दूसरी सरकारी एजेंसियों की कार्रवाई चल रही है।
शिकायत के मुताबिक, इन कथित नोटिसों के बाद सरकारी पेनल्टी, सेटलमेंट फीस और अन्य भुगतान के नाम पर पैसे मांगे गए। शिकायतकर्ता का आरोप है कि अक्टूबर 2024 से अगस्त 2025 के बीच करीब 1.25 करोड़ रुपये अन्या वत्स के HDFC बैंक खाते में ट्रांसफर कराए गए।
शिकायत में 29 नवंबर 2024 की एक कथित घटना का भी उल्लेख है। आरोप है कि उस समय शिकायतकर्ता को बताया गया कि सभी मामले खत्म हो चुके हैं, लेकिन इसके बाद लगभग 96.89 लाख रुपये की एक और रकम मांगी गई। इसके अलावा करीब एक लाख रुपये अलग से लेने का भी आरोप लगाया गया है।
बाद में 4 अगस्त 2025 को कथित तौर पर शिकायतकर्ता को बताया गया कि सरकारी एजेंसियों को उसकी ओर से 13.85 करोड़ रुपये दिए जा चुके हैं। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि इसके बाद उससे और रकम की मांग की गई और कुल 26 करोड़ रुपये तक की देनदारी बताए जाने की बात कही गई।
रकम मांगने के लिए धमकी देने का दावा
पुरानी FIR में शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि रकम वापस मांगने या भुगतान को लेकर उसे धमकी भरे संदेश भेजे गए। शिकायत के मुताबिक, उसे और उसके परिवार को परिणाम भुगतने की चेतावनी दिए जाने का भी आरोप है।
इस मामले में अन्या वत्स के साथ संयम सचदेवा का नाम भी दर्ज है। शिकायतकर्ता ने दोनों पर कथित तौर पर एक ऐसे नेटवर्क का हिस्सा होने का आरोप लगाया है, जिसमें सरकारी अधिकारियों और एजेंसियों की पहचान का इस्तेमाल करके आर्थिक लेन-देन को वास्तविक सरकारी कार्रवाई जैसा दिखाने की कोशिश की गई।
हालांकि, इन आरोपों की अंतिम पुष्टि अदालत या जांच के निष्कर्षों से ही होगी। अभी FIR में दर्ज आरोपों को सिद्ध तथ्य के रूप में नहीं देखा जा सकता।
युवराज हत्याकांड में भी आर्थिक विवाद का एंगल
पुरानी FIR इसलिए महत्वपूर्ण हो गई है क्योंकि युवराज सिंह मनचंदा की हत्या की जांच में भी आर्थिक विवाद सामने आया है। पुलिस के मुताबिक, युवराज और अन्या वत्स पहले एक ही रियल एस्टेट कंपनी में काम कर चुके थे। दोनों के बीच पुराने पेशेवर और आर्थिक संबंध थे।
पुलिस की जांच के अनुसार, अन्या को 2022 में कथित वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों के बाद कंपनी से हटा दिया गया था। युवराज उस समय तक कंपनी छोड़ चुके थे। युवराज के परिवार ने हालांकि उनके किसी वित्तीय गड़बड़ी में शामिल होने की बात से इनकार किया है।
जांचकर्ताओं के अनुसार, युवराज के बाद में दूसरी नौकरी हासिल कर लेने के बावजूद अन्या के साथ आर्थिक विवाद बना रहा। इसी विवाद को हत्या के संभावित मकसद के रूप में देखा जा रहा है।
6 सितंबर को क्या हुआ था?
पुलिस की अब तक की जांच के मुताबिक, 6 सितंबर की शाम युवराज अपनी बहनों के साथ दिल्ली के लाजपत नगर में थे। वह अपनी शादी की खरीदारी कर रहे थे और अक्टूबर में उनकी शादी होने वाली थी।
करीब चार बजे के आसपास उन्हें एक फोन आया। इसके बाद उन्होंने परिवार को बताया कि उन्हें गुरुग्राम में एक जरूरी मीटिंग के लिए जाना है। पुलिस के मुताबिक, यह मुलाकात उनकी पूर्व सहकर्मी अन्या वत्स से जुड़ी थी।
युवराज गुरुग्राम पहुंचे। जांच में सामने आया है कि वह अन्या की कार में बैठे और इसके बाद दोनों के बीच कथित आर्थिक विवाद को लेकर बहस हुई। पुलिस का आरोप है कि विवाद के दौरान युवराज को गोली मारी गई। पुलिस के अनुसार, युवराज को दो गोलियां लगीं।
अन्या वत्स ने पूछताछ में युवराज को गोली मारने की बात कथित तौर पर स्वीकार की है। हालांकि, पुलिस इस बयान की पुष्टि अन्य सबूतों से कर रही है। किसी आरोपी का पुलिस पूछताछ में दिया गया कथित बयान अपने आप में अदालत में अपराध सिद्ध करने के लिए पर्याप्त नहीं होता।
हत्या के बाद शव को कार में रखने का आरोप
पुलिस जांच के अनुसार, हत्या के बाद युवराज के शव को कुछ समय तक कार में रखा गया। शुरुआती पुलिस जानकारी में करीब पांच से सात घंटे तक शव कार में रहने की बात सामने आई थी। बाद की रिपोर्टों में आरोपियों के बयानों में अंतर सामने आया है और जांचकर्ता इस समय पूरी टाइमलाइन को CCTV, डिजिटल डेटा और अन्य साक्ष्यों से मिलाने की कोशिश कर रहे हैं।
इसके बाद शव को गुरुग्राम के सेक्टर 70 इलाके के पास एक नाले में फेंके जाने का आरोप है। पुलिस के अनुसार, इसके बाद अन्या और संयम उत्तराखंड चले गए।
गुरुग्राम में 10 सितंबर को एक अज्ञात शव नाले से बरामद हुआ था। बाद में दिल्ली पुलिस द्वारा परिवार को तस्वीरें दिखाए जाने पर शव की पहचान युवराज सिंह मनचंदा के रूप में की गई।
युवराज के फोन से भेजे जाते रहे मैसेज
इस हत्याकांड में एक और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया है। पुलिस को संदेह है कि युवराज की हत्या के बाद उनके मोबाइल फोन का इस्तेमाल करके परिवार और दोस्तों को संदेश भेजे गए।
रिपोर्टों के मुताबिक, इन संदेशों का उद्देश्य परिवार को यह विश्वास दिलाना था कि युवराज जीवित हैं और काम के सिलसिले में व्यस्त हैं। एक संदेश में कथित तौर पर बेंगलुरु जाने की बात कही गई। दूसरे संदेशों में परिवार से कुछ समय तक परेशान न करने की बात कही गई।
इन संदेशों की वजह से परिवार को तुरंत यह अंदाजा नहीं हुआ कि युवराज के साथ कोई गंभीर घटना हो चुकी है। बाद में जब उनके फोन से संपर्क नहीं हो पाया और कॉल बार-बार कटने लगीं, तब परिवार का संदेह बढ़ा।
11 सितंबर को दर्ज हुई गुमशुदगी की रिपोर्ट
युवराज के घर नहीं लौटने और फोन बंद मिलने के बाद उनकी बहन ने 11 सितंबर को दिल्ली के लाजपत नगर पुलिस स्टेशन में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई।
पुलिस ने जांच के दौरान युवराज के कॉल रिकॉर्ड और इंटरनेट डेटा की जांच की। इसमें उनकी आखिरी बातचीत अन्या वत्स से होने की जानकारी सामने आई। इसके बाद जांचकर्ताओं ने अन्या की गतिविधियों पर ध्यान केंद्रित किया।
पुलिस के मुताबिक, अन्या का पुराना मोबाइल बंद था, लेकिन एक नए नंबर की गतिविधि का पता चला। तकनीकी निगरानी के जरिए पुलिस को उसकी लोकेशन उत्तराखंड में मिली। इसके बाद पुलिस टीम वहां पहुंची और अन्या वत्स तथा संयम सचदेवा को गिरफ्तार किया। दोनों को अदालत में पेश किया गया, जहां उन्हें पुलिस हिरासत में भेजा गया।
अन्या के खिलाफ पहले से भी मामले
युवराज हत्याकांड की जांच के दौरान पुलिस को अन्या वत्स के खिलाफ पहले से दर्ज मामलों की जानकारी भी मिली है। रिपोर्टों के अनुसार, उस पर ठगी से जुड़े दो मामले दर्ज हैं। इनमें से एक मामला दिल्ली के संसद मार्ग थाने में सरकारी अधिकारी बनकर कथित तौर पर ठगी करने से संबंधित बताया गया है। दूसरा मामला ग्रेटर नोएडा में दर्ज होने की जानकारी सामने आई है।
एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार, अन्या के खिलाफ कुल तीन FIR का रिकॉर्ड जांच में सामने आया है। पुलिस इन मामलों और वर्तमान हत्या की जांच के बीच संभावित संबंधों को भी देख रही है।
संयम सचदेवा के खिलाफ भी पहले एक घरेलू हिंसा से संबंधित मामला दर्ज होने की जानकारी पुलिस ने दी है। रिपोर्टों के अनुसार, संयम की पहले से शादी है और अन्या के साथ उसका एक बच्चा भी है।
करोड़ों के लेन-देन की जांच
युवराज हत्याकांड में आर्थिक विवाद की रकम को लेकर भी अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं। पुलिस सूत्रों के अनुसार, पूछताछ के दौरान आरोपियों ने पहले लगभग पांच लाख रुपये के विवाद का जिक्र किया, जबकि बाद में यह रकम बढ़कर करीब 25 लाख रुपये बताई गई।
जांचकर्ता अब यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि वास्तव में विवाद की रकम कितनी थी और क्या इसका संबंध युवराज तथा अन्या के पुराने पेशेवर संबंधों या रियल एस्टेट कारोबार से था। बैंक खातों, लेन-देन, कॉल रिकॉर्ड और डिजिटल डिवाइस की जांच इस मामले में महत्वपूर्ण हो सकती है।
इसी वजह से अगस्त में दर्ज हुई पुरानी FIR भी जांच के दायरे में आई है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि उसमें लगाए गए करोड़ों रुपये की ठगी के आरोप और युवराज से जुड़े आर्थिक विवाद के बीच कोई वास्तविक संबंध है या दोनों अलग-अलग मामले हैं।
जांच में अभी कई सवाल बाकी
युवराज हत्याकांड में पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन जांच अभी पूरी नहीं हुई है। जांचकर्ताओं को हत्या की पूरी टाइमलाइन, आर्थिक विवाद की वास्तविक रकम और हत्या के बाद घटनाओं के क्रम को अलग-अलग डिजिटल तथा भौतिक साक्ष्यों से जोड़ना है।
शव को कितनी देर कार में रखा गया, उसे किस समय नाले में फेंका गया, आरोपियों के अलग-अलग बयानों में अंतर क्यों है और युवराज के फोन से भेजे गए संदेश किसने और किस उद्देश्य से भेजे, इन सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।
इसके अलावा पुलिस यह भी देख रही है कि अगस्त में दर्ज हुई कथित धोखाधड़ी की FIR में लगाए गए आरोपों और युवराज की हत्या के पीछे बताए जा रहे आर्थिक विवाद के बीच कोई प्रत्यक्ष कड़ी है या नहीं। अभी तक उपलब्ध जानकारी के आधार पर दोनों मामलों के बीच संबंध की जांच चल रही है, लेकिन इसे स्थापित तथ्य के रूप में कहना जल्दबाजी होगी।
शादी से पहले खत्म हुई युवराज की जिंदगी
युवराज सिंह मनचंदा की हत्या ऐसे समय हुई जब वह अपने जीवन के एक महत्वपूर्ण पड़ाव की तैयारी कर रहे थे। परिवार के अनुसार, उनकी अक्टूबर में शादी होने वाली थी और हत्या वाले दिन भी वह अपनी बहनों के साथ शादी के लिए खरीदारी कर रहे थे।
परिवार को शुरुआत में उनके मोबाइल से संदेश मिलते रहे, जिससे उन्हें उम्मीद रही कि वह काम के सिलसिले में बाहर हैं और जल्द वापस लौटेंगे। बाद में जब गुमशुदगी की जांच शुरू हुई और गुरुग्राम से बरामद शव की पहचान युवराज के रूप में हुई, तो परिवार के सामने घटनाक्रम की पूरी तस्वीर सामने आई।
फिलहाल पुलिस हत्या, आर्थिक विवाद, कथित फर्जी सरकारी पहचान के इस्तेमाल और पुरानी FIR से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही है। अन्या वत्स और संयम सचदेवा के खिलाफ लगे आरोपों का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया में होगा। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि युवराज की हत्या के पीछे आर्थिक विवाद की वास्तविक प्रकृति क्या थी और पुरानी धोखाधड़ी वाली FIR का इस मामले से कोई सीधा संबंध था या नहीं।