सऊदी अरब पर फिर मिसाइल और ड्रोन अटैक का दावा, 6 बैलेस्टिक मिसाइलें इंटरसेप्ट, हूतियों ने जजान में हमले की जिम्मेदारी ली

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सऊदी अरब और यमन के हूती विद्रोहियों के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है। गुरुवार, 24 सितंबर 2026 को सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने दावा किया कि यमन की ओर से सऊदी अरब की तरफ दागी गई छह बैलेस्टिक मिसाइलों को उसकी एयर डिफेंस प्रणाली ने हवा में ही इंटरसेप्ट कर नष्ट कर दिया। सऊदी गठबंधन के प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्की अल-मलिकी के मुताबिक इन मिसाइलों के जरिए ताइफ और लाल सागर के महत्वपूर्ण बंदरगाह यानबू को निशाना बनाने की कोशिश की गई थी।

इसी घटनाक्रम के कुछ समय बाद हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सरी ने दावा किया कि संगठन ने सऊदी अरब के दक्षिण-पश्चिमी जजान इलाके में सैन्य ठिकानों पर दर्जनों बैलेस्टिक मिसाइलों और ड्रोन से हमला किया। हूती पक्ष ने कहा कि उसने कमांड और कंट्रोल सेंटर, ऑपरेशन रूम, हथियारों के डिपो, मिसाइल लॉन्च साइट और सैन्य कैंपों को निशाना बनाया। हालांकि हूतियों द्वारा किए गए नुकसान और बड़ी संख्या में हताहतों के दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

इस तरह गुरुवार को सामने आई घटनाओं में दोनों पक्षों के दावे अलग-अलग हैं। सऊदी पक्ष ने छह बैलेस्टिक मिसाइलों को इंटरसेप्ट करने की जानकारी दी है, जबकि हूती संगठन ने जजान में एक अलग हमले की बात कही है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार सऊदी अधिकारियों ने इन मिसाइलों के इंटरसेप्शन के बाद जमीन पर हुए नुकसान या किसी संभावित हताहत की तत्काल पुष्टि नहीं की।

छह बैलेस्टिक मिसाइलों को हवा में ही रोकने का दावा

सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन के प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्की अल-मलिकी ने बताया कि सऊदी एयर डिफेंस ने हूती समूह की ओर से लॉन्च की गई छह बैलेस्टिक मिसाइलों को इंटरसेप्ट कर दिया। उनके मुताबिक मिसाइलों को ताइफ और यानबू की दिशा में जाते हुए रोका गया।

सऊदी अधिकारियों ने इस कार्रवाई को देश के महत्वपूर्ण शहरों और ठिकानों को संभावित हमले से बचाने की कोशिश के तौर पर पेश किया है। गठबंधन ने यह भी कहा कि हूतियों की ओर से बढ़ते हमलों और कथित उल्लंघनों से सख्ती से निपटा जाएगा।

हालांकि शुरुआती जानकारी में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि इंटरसेप्ट की गई मिसाइलों के मलबे से किसी क्षेत्र में नुकसान हुआ या नहीं। इसी तरह तत्काल तौर पर किसी नागरिक या सैन्यकर्मी के घायल होने की आधिकारिक पुष्टि भी सामने नहीं आई थी।

यानबू क्यों है इतना महत्वपूर्ण?

इस घटनाक्रम में यानबू का नाम खास तौर पर महत्वपूर्ण है। लाल सागर के किनारे स्थित यानबू सऊदी अरब का प्रमुख औद्योगिक और तेल निर्यात केंद्र है। यहां महत्वपूर्ण तेल रिफाइनिंग और निर्यात से जुड़ा बुनियादी ढांचा मौजूद है।

Reuters के अनुसार यानबू का महत्व उस समय और बढ़ जाता है जब फारस की खाड़ी और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते तेल परिवहन में व्यवधान पैदा हो। ऐसी स्थिति में सऊदी अरब के लिए लाल सागर की ओर स्थित बुनियादी ढांचा वैकल्पिक निर्यात मार्ग के रूप में महत्वपूर्ण हो सकता है।

गुरुवार के हमले के दौरान यानबू क्षेत्र में एक बैलेस्टिक मिसाइल और एक ड्रोन को भी इंटरसेप्ट किए जाने की जानकारी Reuters ने ग्रीक सुरक्षा सूत्रों के हवाले से दी। रिपोर्ट के अनुसार सऊदी अरब में तैनात ग्रीक सैन्यकर्मियों द्वारा संचालित Patriot एयर डिफेंस सिस्टम ने दोनों को मार गिराया। हालांकि उस मिसाइल और ड्रोन की उत्पत्ति के बारे में तत्काल स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई थी।

ताइफ भी बनी निशाने की दिशा

ताइफ सऊदी अरब का एक महत्वपूर्ण शहर है और मक्का क्षेत्र से भी जुड़ा हुआ है। सऊदी गठबंधन के मुताबिक छह बैलेस्टिक मिसाइलों में से कुछ ताइफ की दिशा में जा रही थीं।

घटना के दौरान सऊदी नागरिक सुरक्षा विभाग ने कई इलाकों के लिए संभावित खतरे की चेतावनी जारी की। इसमें मक्का, ताइफ, यानबू, जेद्दा और उत्तर-पश्चिमी तबुक क्षेत्र शामिल थे। बाद में अधिकारियों ने बताया कि खतरा टल गया है।

तबुक का नाम इस घटनाक्रम में इसलिए भी ध्यान खींचता है क्योंकि यह क्षेत्र जॉर्डन की सीमा के करीब है। Reuters के अनुसार मौजूदा तनाव के दौरान इस इलाके के लिए चेतावनी जारी होना एक नई बात थी।

हूतियों का अलग दावा

सऊदी गठबंधन के छह मिसाइलों को इंटरसेप्ट करने के दावे के बाद हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सरी ने जजान में सैन्य ठिकानों पर बड़े हमले का दावा किया।

हूती पक्ष के अनुसार उसके हमले में दर्जनों बैलेस्टिक मिसाइल और ड्रोन इस्तेमाल किए गए। उसने जजान के अल-तुवाल इलाके में ऑपरेशन रूम, कमांड और कंट्रोल सेंटर तथा हथियारों के भंडार को निशाना बनाने का दावा किया। इसके अलावा अल-दगारीर कैंप में मिसाइल लॉन्च साइट और अन्य सऊदी सैन्य ठिकानों को भी लक्ष्य बनाने की बात कही गई।

हूती प्रवक्ता ने दावा किया कि हमलों में बड़ी संख्या में सऊदी, यमनी और सूडानी कर्मी मारे गए या घायल हुए और कई हथियार भंडारों में आग लग गई। लेकिन सऊदी अधिकारियों ने इन दावों की पुष्टि नहीं की है। इसलिए इन आंकड़ों को फिलहाल हूती पक्ष का दावा ही माना जा रहा है।

सऊदी अरब की तरफ से क्या कहा गया?

सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने हूतियों के हमले को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। प्रवक्ता तुर्की अल-मलिकी ने कहा कि हूती समूह की ओर से बढ़ती गतिविधियों और कथित उल्लंघनों से सख्ती से निपटा जाएगा।

सऊदी पक्ष ने फिलहाल मुख्य रूप से अपनी एयर डिफेंस कार्रवाई पर जोर दिया है। उसके अनुसार छह बैलेस्टिक मिसाइलों को नष्ट कर दिया गया और ताइफ तथा यानबू को निशाना बनाने की कोशिश नाकाम कर दी गई।

यह भी महत्वपूर्ण है कि सऊदी बयान में इंटरसेप्शन के बाद जमीन पर किसी बड़े नुकसान की जानकारी तत्काल नहीं दी गई थी। इसलिए सोशल मीडिया पर सामने आने वाले किसी भी अतिरिक्त नुकसान या हताहत के दावे को आधिकारिक पुष्टि के बिना तथ्य मानना उचित नहीं होगा।

मक्का और जेद्दा में भी जारी हुई चेतावनी

हमले के बीच सऊदी नागरिक सुरक्षा अधिकारियों ने कई इलाकों में संभावित खतरे की चेतावनी जारी की। इसमें मक्का का नाम भी शामिल था।

मक्का दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण इस्लामिक धार्मिक स्थलों में से एक है। पिछले सप्ताह भी सऊदी अरब ने दावा किया था कि हूतियों की ओर से मक्का की दिशा में ड्रोन भेजा गया था। हूती नेता अब्दुल मलिक अल-हूती ने उस दावे को खारिज करते हुए इसे झूठ बताया था।

गुरुवार की चेतावनी के बाद सऊदी अधिकारियों ने बाद में कहा कि खतरा समाप्त हो गया है। मक्का, ताइफ, जेद्दा, यानबू और तबुक के कुछ हिस्सों में जारी सुरक्षा अलर्ट ने क्षेत्र में बढ़ते तनाव की गंभीरता को सामने रखा।

हूतियों और सऊदी अरब के बीच तनाव क्यों बढ़ रहा है?

यमन में हूती आंदोलन और सऊदी अरब के बीच संघर्ष कई वर्षों से चला आ रहा है। हूतियों ने 2014 में यमन की राजधानी सना पर नियंत्रण स्थापित किया था। इसके बाद मार्च 2015 में सऊदी अरब ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमनी सरकार के समर्थन में सैन्य गठबंधन का नेतृत्व शुरू किया।

हाल के वर्षों में संघर्ष की तीव्रता में कमी आई थी और 2022 के बाद कई मोर्चों पर अपेक्षाकृत शांति की स्थिति बनी रही। लेकिन 2026 में क्षेत्रीय घटनाक्रमों के बीच फिर से तनाव बढ़ा है।

Reuters के अनुसार हालिया हफ्तों में यमन के कई पुराने युद्ध मोर्चों पर फिर से लड़ाई तेज हुई है। हूती लड़ाकों ने यमन के पश्चिमी तट के बड़े हिस्से पर नियंत्रण बढ़ाने की कोशिश की है और लाल सागर के दक्षिणी छोर पर स्थित रणनीतिक बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य तक अपनी स्थिति मजबूत की है।

बाब-अल-मंदेब का महत्व

बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है। यह वैश्विक समुद्री व्यापार के लिए महत्वपूर्ण मार्गों में से एक है।

यदि इस इलाके में संघर्ष बढ़ता है, तो इसका असर केवल यमन और सऊदी अरब तक सीमित नहीं रह सकता। तेल और अन्य सामान ले जाने वाले जहाजों के लिए सुरक्षा व्यवस्था महत्वपूर्ण हो जाती है। इसी वजह से क्षेत्र में किसी भी बड़े सैन्य घटनाक्रम पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नजर रखी जाती है।

Reuters ने बताया कि हूतियों ने जुलाई में सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकाबंदी की घोषणा की थी। इसके बाद सऊदी अरब से जुड़े जहाजों और ठिकानों के खिलाफ मिसाइल तथा ड्रोन हमलों के दावे सामने आए हैं।

यमन में भी जारी है संघर्ष

सऊदी अरब पर मिसाइल और ड्रोन हमले के दावों के बीच यमन के अंदर भी लड़ाई जारी है। गुरुवार को सऊदी समर्थित यमनी सरकारी बलों ने बताया कि उन्होंने ताइज प्रांत में हूती लड़ाकों के हमलों को पीछे धकेला।

ताइज यमन का एक महत्वपूर्ण शहर है और वहां तक पहुंचने वाले सड़क मार्गों का सैन्य और मानवीय दोनों दृष्टि से महत्व है। सरकारी बलों और हूतियों के बीच इन मार्गों पर नियंत्रण को लेकर संघर्ष की स्थिति बनी हुई है।

Reuters के अनुसार हालिया लड़ाई में 700 से ज्यादा लोगों के मारे जाने और हजारों के घायल होने की जानकारी संयुक्त राष्ट्र के हवाले से दी गई है। करीब 1.30 लाख लोग देश के भीतर विस्थापित हुए हैं, जबकि 3,000 से ज्यादा लोग नावों के जरिए लाल सागर पार कर अफ्रीका पहुंचे हैं।

तेल बाजार पर भी पड़ सकता है असर

सऊदी अरब दुनिया के प्रमुख तेल उत्पादकों में शामिल है और यानबू जैसे बंदरगाहों तथा पाइपलाइन नेटवर्क का वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में महत्व है।

यदि लाल सागर क्षेत्र में सैन्य तनाव लंबे समय तक बना रहता है या महत्वपूर्ण तेल ढांचे को नुकसान पहुंचता है, तो ऊर्जा बाजार पर दबाव बढ़ सकता है। हालांकि गुरुवार के हमले में यानबू या ताइफ में किसी बड़े नुकसान की तत्काल पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए फिलहाल किसी बड़े तेल आपूर्ति व्यवधान की बात करना जल्दबाजी होगी।

यानबू का महत्व इस वजह से भी बढ़ जाता है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में किसी तरह की रुकावट होने पर सऊदी अरब के लिए लाल सागर की दिशा में मौजूद तेल ढांचा वैकल्पिक मार्ग प्रदान कर सकता है।

हमले के दावों में अंतर

गुरुवार की घटनाओं में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सऊदी और हूती पक्ष ने अलग-अलग तस्वीर पेश की है।

सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन का कहना है कि छह बैलेस्टिक मिसाइलों को इंटरसेप्ट कर दिया गया और ताइफ तथा यानबू पर हमले की कोशिश विफल रही। वहीं हूती प्रवक्ता ने जजान में दर्जनों मिसाइल और ड्रोन से सैन्य ठिकानों पर हमला करने का दावा किया है।

हूती पक्ष ने बड़े पैमाने पर नुकसान और हताहतों का दावा किया, लेकिन उसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। दूसरी तरफ सऊदी पक्ष ने छह मिसाइलों को नष्ट किए जाने की जानकारी दी है, लेकिन जमीन पर नुकसान की पूरी तस्वीर तत्काल उपलब्ध नहीं थी।

इसलिए इस घटनाक्रम की पूरी तस्वीर सामने आने में कुछ समय लग सकता है।

आगे क्या होगा?

सऊदी अरब और हूतियों के बीच बढ़ता तनाव ऐसे समय सामने आया है जब यमन में संघर्ष के कई मोर्चे फिर सक्रिय हो रहे हैं। लाल सागर और बाब-अल-मंदेब क्षेत्र में हूती गतिविधियां बढ़ने से समुद्री सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ी है।

गुरुवार को सऊदी एयर डिफेंस द्वारा छह बैलेस्टिक मिसाइलों को इंटरसेप्ट किए जाने का दावा और जजान में बड़े मिसाइल-ड्रोन हमले की हूती घोषणा दोनों ही क्षेत्र में तनाव की गंभीरता को दिखाते हैं। हालांकि इन दोनों घटनाओं के बीच सीधा संबंध और वास्तविक नुकसान का स्तर स्वतंत्र रूप से पूरी तरह स्पष्ट नहीं हुआ है।

फिलहाल सऊदी अधिकारियों ने खतरा टलने की घोषणा की है और हूतियों को कड़े जवाब की चेतावनी दी है। दूसरी तरफ हूती संगठन ने जजान में सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि दोनों पक्षों के बीच सैन्य गतिविधियां आगे किस दिशा में बढ़ती हैं और क्या इसका असर यमन के अंदर चल रही लड़ाई, लाल सागर की समुद्री सुरक्षा तथा क्षेत्रीय ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ता है।

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