
उत्तर भारत से लेकर मध्य और पूर्वी भारत तक मौसम ने एक बार फिर करवट ली है। बंगाल की खाड़ी से बने मौसम सिस्टम के प्रभाव से उत्तर प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, ओडिशा, मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों में भारी बारिश का दौर जारी है। उत्तर प्रदेश में पिछले करीब 40 से 48 घंटे से लगातार बारिश के कारण कई जिलों में जलभराव और बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। बारिश से जुड़ी अलग-अलग घटनाओं में 13 लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है। वहीं छत्तीसगढ़ में लगातार बारिश के कारण नदियां और नाले उफान पर हैं और कई प्रमुख सड़कों पर आवागमन प्रभावित हुआ है। बिहार में भी कई जिलों के लिए भारी बारिश और गरज-चमक का अलर्ट जारी किया गया है।
हालांकि इस पूरे मौसम सिस्टम को लेकर एक जरूरी बात समझना भी महत्वपूर्ण है। कई रिपोर्टों और सोशल मीडिया पोस्ट में इसे ‘चक्रवात अर्नब’ कहा जा रहा है, लेकिन भारतीय मौसम विभाग की 26 सितंबर की जानकारी के मुताबिक संबंधित सिस्टम दक्षिण छत्तीसगढ़ और आसपास के क्षेत्र में बने डिप्रेशन के रूप में आगे बढ़ रहा था और धीरे-धीरे कमजोर होकर कम दबाव वाले क्षेत्र में बदलने की दिशा में था। यानी भारी बारिश का असर वास्तविक है, लेकिन इसे आधिकारिक तौर पर चक्रवाती तूफान मानने को लेकर रिपोर्टों और मौसम विभाग की स्थिति में अंतर रहा है।
उत्तर प्रदेश में 13 लोगों की मौत
उत्तर प्रदेश इस समय सबसे ज्यादा प्रभावित राज्यों में शामिल है। प्रदेश के कई हिस्सों में लगातार बारिश के कारण सड़कें जलमग्न हैं, निचले इलाकों में पानी जमा हो गया है और नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। बारिश के दौरान पेड़ गिरने, मकानों को नुकसान पहुंचने और अन्य हादसों की खबरें भी सामने आई हैं। अलग-अलग बारिश संबंधी घटनाओं में 13 लोगों की मौत की जानकारी रिपोर्टों में दी गई है।
हालांकि इन सभी मौतों को सीधे किसी एक मौसम सिस्टम से जोड़ना उचित नहीं होगा। अलग-अलग घटनाओं के कारण स्थानीय परिस्थितियों पर निर्भर हैं और प्रशासन की रिपोर्ट के आधार पर तस्वीर स्पष्ट होती है। फिलहाल लगातार बारिश के कारण प्रदेश के कई जिलों में प्रशासन को अतिरिक्त सतर्कता बरतनी पड़ रही है।
भारतीय मौसम विभाग ने 26 सितंबर को पूर्वी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश दोनों के लिए अत्यधिक भारी बारिश की चेतावनी जारी की थी। 27 सितंबर को भी पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बहुत भारी और पूर्वी उत्तर प्रदेश में भारी बारिश का पूर्वानुमान था। इसके बाद 28 सितंबर से इन क्षेत्रों के लिए कोई चेतावनी नहीं दी गई थी।
चित्रकूट में मंदाकिनी नदी खतरे के निशान के ऊपर
लगातार बारिश का सीधा असर उत्तर प्रदेश की नदियों पर दिखाई दे रहा है। चित्रकूट में मंदाकिनी नदी का जलस्तर बढ़कर खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गया। नदी का खतरे का स्तर 126.500 मीटर बताया गया है। जलस्तर बढ़ने के बाद प्रशासन ने रामघाट और आसपास के संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी है।
रामघाट क्षेत्र में PAC की टीम को मोटरबोट के साथ तैनात किया गया है। नदी और घाट के आसपास रहने वाले लोगों को सावधानी बरतने तथा पानी के करीब नहीं जाने की सलाह दी जा रही है। नदी का पानी आसपास के कुछ मठों और मंदिरों तक पहुंचने की जानकारी भी सामने आई है।
प्रशासन की प्राथमिकता इस समय नदी के जलस्तर पर लगातार नजर रखना और किसी भी आपात स्थिति में लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाना है। ऐसे इलाकों में लोगों को नदी के तेज बहाव को पार करने या जलमग्न रास्तों से गुजरने से बचने की सलाह दी गई है।
श्रावस्ती में राप्ती का जलस्तर बढ़ा
श्रावस्ती में भी राप्ती नदी के बढ़ते जलस्तर ने चिंता बढ़ा दी है। लगातार बारिश और आसपास के क्षेत्रों से आने वाले पानी के कारण नदी का जलस्तर बढ़ रहा है। इससे नदी किनारे बसे इलाकों में बाढ़ और कटाव का खतरा पैदा हुआ है।
कई जगहों पर प्रशासन और राहत एजेंसियों को अलर्ट पर रखा गया है। संवेदनशील इलाकों में लोगों को नदी और नालों से दूर रहने की सलाह दी गई है। निचले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को जलस्तर बढ़ने की स्थिति में सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए तैयार रहने को कहा जा रहा है।
अयोध्या में फसलों पर बारिश की मार
बारिश और तेज हवाओं का असर सिर्फ जनजीवन पर ही नहीं बल्कि खेती पर भी पड़ा है। अयोध्या में तेज हवाओं और लगातार बारिश के कारण खेतों में खड़ी धान की फसल कई जगह गिर गई है। गन्ने की फसल को भी नुकसान पहुंचने की जानकारी सामने आई है।
किसानों के लिए यह नुकसान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि धान समेत कई फसलें इस समय पकने और कटाई के चरण में पहुंच रही हैं। लगातार बारिश से खेतों में पानी भरने और तेज हवाओं से फसल गिरने पर उत्पादन प्रभावित हो सकता है।
किसानों की चिंता इसलिए भी बढ़ी है क्योंकि अगर बारिश लंबे समय तक जारी रहती है तो खेतों से अतिरिक्त पानी निकालना मुश्किल हो सकता है। कृषि विभाग और स्थानीय प्रशासन की ओर से किसानों को मौसम की स्थिति के अनुसार सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है।
बस्ती में मकान पर गिरा विशाल पेड़
बस्ती जिले में तेज आंधी और बारिश के दौरान एक विशाल पीपल का पेड़ एक पक्के मकान पर गिर गया। पेड़ की चपेट में पास में बना टीनशेड वाला मकान भी आ गया। हादसे में दो बच्चों के मामूली रूप से घायल होने की जानकारी सामने आई है।
इस घटना ने एक बार फिर तेज हवाओं के दौरान पुराने और कमजोर पेड़ों से पैदा होने वाले खतरे को सामने ला दिया है। बारिश और आंधी के दौरान प्रशासन की ओर से लोगों को पेड़ों और बिजली के खंभों से दूरी बनाए रखने की सलाह दी जा रही है।
स्कूलों पर भी पड़ा असर
लगातार बारिश और जलभराव को देखते हुए उत्तर प्रदेश के कई जिलों में स्कूल बंद रखने का फैसला किया गया। कुछ क्षेत्रों में विश्वविद्यालय और कॉलेजों को भी बंद रखा गया। स्थानीय प्रशासन ने मौसम और सड़क की स्थिति को देखते हुए अलग-अलग जिलों में आवश्यकतानुसार निर्णय लिए।
स्कूल बंद करने का उद्देश्य बच्चों को जलभराव, तेज हवाओं और बिजली गिरने जैसे संभावित जोखिमों से बचाना है। ग्रामीण इलाकों में स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है क्योंकि कई जगह स्कूलों तक पहुंचने वाले रास्तों पर पानी भर गया है।
छत्तीसगढ़ में नदियां और नाले उफान पर
छत्तीसगढ़ में पिछले कई दिनों से हो रही भारी बारिश ने बस्तर संभाग और आसपास के क्षेत्रों में हालात बिगाड़ दिए हैं। लगातार बारिश के कारण अधिकांश नदी-नाले उफान पर आ गए हैं। कई सड़कें पानी में डूब गई हैं और कुछ जगहों पर एक जिले से दूसरे जिले तक संपर्क प्रभावित हुआ है।
धमतरी जिले में गंगरेल बांध का जलस्तर तेजी से बढ़ा। बांध के 98 प्रतिशत से अधिक भरने के बाद उसके सभी 14 गेट खोलने पड़े। जलाशय से पानी छोड़े जाने के बाद निचले इलाकों में प्रशासन की निगरानी बढ़ाई गई।
लगातार बारिश के कारण अन्य जलाशयों पर भी दबाव बढ़ा। प्रशासन ने नदी किनारे और निचले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं।
बस्तर में भारी बारिश से सड़कें प्रभावित
बस्तर क्षेत्र में लगातार बारिश के कारण कई मार्गों पर पानी भरने की खबर है। जगदलपुर और आसपास के क्षेत्रों में निचले हिस्सों में जलभराव हुआ। कई सड़कों पर पानी आने से वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई।
कुछ मार्गों पर पानी का बहाव इतना तेज रहा कि प्रशासन को लोगों को ऐसे रास्तों से गुजरने से रोकना पड़ा। नदी और नालों के ऊपर बने पुलों तथा रपटों पर पानी बढ़ने की स्थिति में दुर्घटना का खतरा भी बढ़ जाता है।
कांकेर सहित कई इलाकों में नदी और नालों का जलस्तर बढ़ने के बाद लोगों को तेज बहाव वाले स्थानों से दूर रहने की सलाह दी गई है।
गंगरेल बांध के गेट खोलने पड़े
धमतरी में गंगरेल बांध का जलस्तर बढ़ने के कारण सभी 14 गेट खोलना पड़ा। भारी बारिश के दौरान बांधों का जलस्तर तेजी से बढ़ने पर अतिरिक्त पानी को नियंत्रित तरीके से बाहर निकालना जरूरी होता है।
प्रशासन की चुनौती यह है कि बांध से पानी छोड़ने के साथ-साथ निचले इलाकों में जलस्तर पर भी नजर रखी जाए। नदी किनारे रहने वाले लोगों को पहले से चेतावनी देना और संभावित बाढ़ वाले क्षेत्रों में राहत दल तैयार रखना इसी प्रक्रिया का हिस्सा है।
बिहार में भी बारिश और आंधी का अलर्ट
बिहार में भी मौसम का असर व्यापक है। भारतीय मौसम विभाग ने 26 सितंबर को राज्य के लिए भारी बारिश तथा गरज-चमक और तेज हवाओं से जुड़ी चेतावनी जारी की। 27 सितंबर से बिहार के लिए कोई विशेष वर्षा चेतावनी नहीं दी गई थी, जिससे संकेत मिलता है कि राज्य में मुख्य असर 26 सितंबर के दौरान रहने की संभावना थी।
बिहार के पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, सिवान, अरवल, औरंगाबाद, जहानाबाद, पटना, भोजपुर, रोहतास, नवादा, सीतामढ़ी, वैशाली, दरभंगा, मधुबनी, मधेपुरा, सहरसा, सुपौल, कटिहार, पूर्णिया और बेगूसराय समेत कई जिलों में बारिश और आंधी की संभावना बताई गई है।
उत्तर बिहार में नदियों के बढ़ते जलस्तर को लेकर विशेष सावधानी की जरूरत है। सुपौल में कई गांवों के प्रभावित होने की रिपोर्ट सामने आई है। हालांकि बाढ़ प्रभावित गांवों और नुकसान के आंकड़े स्थानीय परिस्थितियों के साथ बदल सकते हैं, इसलिए अंतिम प्रशासनिक आंकड़ों को ही निर्णायक माना जाना चाहिए।
पटना समेत कई जिलों में मौसम खराब
पटना और आसपास के जिलों में भी बारिश और गरज-चमक का असर देखने को मिल सकता है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार राज्य में तेज हवाओं के साथ बारिश की संभावना बनी हुई थी। लोगों को विशेष रूप से आंधी के दौरान खुले स्थानों से बचने की सलाह दी गई है।
बारिश के दौरान शहरों में ट्रैफिक की समस्या बढ़ सकती है। निचले इलाकों में जलभराव, बिजली आपूर्ति में व्यवधान और पेड़ गिरने जैसी स्थानीय समस्याएं सामने आ सकती हैं।
उत्तराखंड में भूस्खलन का खतरा
भारी बारिश का असर पहाड़ी राज्यों में अलग रूप में दिखाई दे रहा है। उत्तराखंड में बारिश के साथ भूस्खलन का खतरा बढ़ा है। कुछ पहाड़ी क्षेत्रों में सड़कें प्रभावित होने और वाहनों के फंसने की खबरें सामने आई हैं।
पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार बारिश के दौरान कमजोर ढलानों और भूस्खलन वाले क्षेत्रों से गुजरना जोखिमपूर्ण हो सकता है। इसलिए प्रशासन ने यात्रियों को मौसम और सड़क की स्थिति की जानकारी लेने के बाद ही यात्रा करने की सलाह दी है।
दिल्ली और उत्तर भारत के अन्य हिस्सों में भी बारिश
दिल्ली में भी 26 सितंबर को बारिश और गरज-चमक का पूर्वानुमान था। मौसम विभाग के अनुसार राजधानी में हल्की से मध्यम बारिश के साथ तेज हवाएं चल सकती हैं। उत्तर भारत के दूसरे राज्यों में भी मौसम में बदलाव का असर दिखाई दिया।
हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के कुछ हिस्सों में भी बारिश की संभावना बनी रही। पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश के साथ भूस्खलन का खतरा और मैदानी इलाकों में जलभराव की स्थिति चिंता का विषय रही।
14 राज्यों में अलर्ट का क्या मतलब है?
मौसम विभाग के अलग-अलग पूर्वानुमानों में इस मौसम सिस्टम के प्रभाव से कई राज्यों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई। उत्तर प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, झारखंड, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश समेत कई क्षेत्रों में मौसम का असर देखा गया।
इन राज्यों में चेतावनी की तीव्रता एक जैसी नहीं थी। कुछ इलाकों में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना थी, जबकि अन्य स्थानों पर गरज-चमक और तेज हवाओं का अलर्ट जारी किया गया था।
इसलिए ‘14 राज्यों में अलर्ट’ का अर्थ यह नहीं है कि सभी 14 राज्यों में एक जैसी स्थिति है। मौसम की चेतावनी जिला और क्षेत्र के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।
बंगाल की खाड़ी से शुरू हुआ सिस्टम कैसे पहुंचा उत्तर भारत तक?
मौसम की इस पूरी स्थिति की शुरुआत बंगाल की खाड़ी में बने सिस्टम से हुई। सिस्टम के मजबूत होने के साथ ओडिशा, आंध्र प्रदेश और छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्सों में भारी बारिश हुई। इसके बाद यह सिस्टम उत्तर और उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ा।
IMD के अनुसार 25 सितंबर की शाम तक डिप्रेशन उत्तर छत्तीसगढ़ और उससे लगे पूर्वोत्तर मध्य प्रदेश के ऊपर था। इसके बाद इसके उत्तर-उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ते हुए दक्षिण-पूर्वी उत्तर प्रदेश की ओर जाने और फिर कमजोर होने का अनुमान था।
यही वजह है कि एक ओर छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में बारिश जारी रही, वहीं दूसरी ओर उत्तर प्रदेश और आसपास के क्षेत्रों में भी बारिश की तीव्रता बढ़ी।
26 सितंबर के बाद कब मिलेगी राहत?
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक उत्तर प्रदेश में 26 सितंबर के बाद बारिश की तीव्रता कम होने की संभावना थी। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए 27 सितंबर तक बहुत भारी बारिश और पूर्वी उत्तर प्रदेश के लिए भारी बारिश की चेतावनी दी गई थी। 28 सितंबर से दोनों क्षेत्रों के लिए कोई चेतावनी नहीं थी।
बिहार के लिए भी 26 सितंबर को भारी बारिश की चेतावनी थी, जबकि 27 सितंबर से कोई विशेष चेतावनी नहीं थी। इसका मतलब यह है कि बिहार में भी मुख्य बारिश का दौर धीरे-धीरे कमजोर पड़ सकता है।
हालांकि मौसम में स्थानीय स्तर पर बदलाव संभव है। इसलिए किसी इलाके में चेतावनी समाप्त होने का अर्थ यह नहीं कि अचानक होने वाली बारिश या गरज-चमक की हर संभावना खत्म हो गई है।
किसानों के लिए बड़ी चुनौती
बारिश के इस दौर का असर किसानों पर भी पड़ा है। धान और दूसरी खरीफ फसलें कई इलाकों में पकने के चरण में हैं। ऐसे समय तेज हवा और लगातार बारिश से फसल गिर सकती है। खेतों में पानी भरने से कटाई में भी देरी हो सकती है।
उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ से फसलों के प्रभावित होने की खबरें सामने आई हैं। अयोध्या में धान और गन्ने की फसल पर तेज हवाओं और बारिश का असर बताया गया है। छत्तीसगढ़ के कई हिस्सों में भी तेज हवाओं के कारण धान की फसल गिरने की जानकारी सामने आई।
प्रशासन ने बढ़ाई निगरानी
बारिश और बाढ़ की स्थिति को देखते हुए कई राज्यों में प्रशासन ने नदी किनारे और निचले इलाकों में निगरानी बढ़ा दी है। जहां जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है, वहां राहत और बचाव दलों को तैयार रखा गया है।
नदी के तेज बहाव वाले इलाकों में लोगों को जाने से रोकने, मोटरबोट तैनात करने और जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की तैयारी की जा रही है। स्कूलों को बंद करना भी इसी एहतियाती रणनीति का हिस्सा है।
लोगों को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
भारी बारिश और तेज हवाओं के दौरान लोगों को नदी, नाले, बांध और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहना चाहिए। पानी में डूबी सड़क पर वाहन लेकर निकलने से बचना जरूरी है, क्योंकि सड़क के नीचे की स्थिति दिखाई नहीं देती।
आंधी के दौरान पेड़, बिजली के खंभे, पुराने मकान और कमजोर ढांचे संभावित खतरा बन सकते हैं। बिजली गिरने की स्थिति में खुले मैदान में खड़े रहने से बचना चाहिए।
पहाड़ी क्षेत्रों में यात्रा करने वालों को भूस्खलन की चेतावनी वाले क्षेत्रों में जाने से बचना चाहिए। मौसम विभाग और स्थानीय प्रशासन की ओर से जारी आधिकारिक अपडेट को प्राथमिकता देना सबसे सुरक्षित तरीका है।
फिलहाल बारिश का दौर जारी
बंगाल की खाड़ी से बने मौसम सिस्टम का असर अब कमजोर पड़ रहा है, लेकिन इसके कारण पैदा हुई नमी और मौसम की अस्थिरता से कई राज्यों में बारिश जारी है। उत्तर प्रदेश में भारी बारिश के कारण मौतें, जलभराव और नदी के बढ़ते जलस्तर ने प्रशासन की चिंता बढ़ाई है। छत्तीसगढ़ में नदियों और नालों के उफान से कई मार्ग प्रभावित हुए हैं, जबकि बिहार में भी भारी बारिश और गरज-चमक को लेकर चेतावनी जारी की गई है।
सबसे अहम बात यह है कि ‘अर्नब’ नाम को लेकर चल रही चर्चाओं से अलग मौसम विभाग की वास्तविक चेतावनी पर ध्यान दिया जाए। IMD के अनुसार संबंधित सिस्टम डिप्रेशन से कमजोर होकर कम दबाव वाले क्षेत्र में बदलने की ओर था, लेकिन उसके प्रभाव से 26 और 27 सितंबर तक कई राज्यों में भारी बारिश की स्थिति बनी रह सकती थी।
अगले एक-दो दिनों में बारिश की तीव्रता में कमी आने की उम्मीद है, लेकिन नदियों का जलस्तर, जलभराव और मिट्टी की स्थिति बारिश रुकने के तुरंत बाद सामान्य नहीं होती। इसलिए बाढ़ प्रभावित और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए प्रशासन की चेतावनियों का पालन करना जरूरी रहेगा। फिलहाल उत्तर प्रदेश, बिहार और छत्तीसगढ़ समेत प्रभावित राज्यों में राहत, बचाव और निगरानी का काम जारी है।