‘EC को क्यों निशाना बना रहे राहुल गांधी… वजह उन्हें खुद नहीं पता’, BJP नेता नारायणस्वामी ने कसा तंज

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कर्नाटक विधान परिषद में विपक्ष के नेता और बीजेपी नेता चलवाड़ी नारायणस्वामी ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर लगाए जा रहे आरोपों को लेकर निशाना साधा है। नारायणस्वामी ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी चुनाव आयोग को लगातार निशाना बना रहे हैं, लेकिन SIR यानी Special Intensive Revision को इसके पीछे की वजह बताने के बावजूद उनकी आपत्तियों का आधार स्पष्ट नहीं है। ये नारायणस्वामी के राजनीतिक आरोप हैं, जबकि राहुल गांधी और कांग्रेस ने चुनाव प्रक्रिया तथा मतदाता सूची को लेकर अलग-अलग सवाल उठाए हैं।

नारायणस्वामी ने यह बयान ऐसे समय दिया है जब चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेदों और SIR की प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक बहस तेज है। इससे एक दिन पहले चुनाव आयोग ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दोनों चुनाव आयुक्तों की बैठक के बाद कहा था कि SIR से जुड़े फैसले आयोग की सर्वसम्मति से लिए गए थे। आयोग ने यह भी कहा था कि किसी प्रस्ताव पर आंतरिक स्तर पर अलग-अलग टिप्पणियां या सुझाव आना सामान्य संस्थागत प्रक्रिया का हिस्सा है।

नारायणस्वामी ने राहुल गांधी पर क्या आरोप लगाया?

चलवाड़ी नारायणस्वामी ने कहा कि राहुल गांधी चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त को लगातार निशाना बना रहे हैं। उनके मुताबिक, राहुल गांधी इसके लिए SIR को वजह बताते हैं, लेकिन यह प्रक्रिया केवल किसी एक राज्य तक सीमित नहीं है।

नारायणस्वामी ने दावा किया कि SIR के माध्यम से मतदाता सूची की समीक्षा की जा रही है और उनका कहना है कि ऐसी प्रक्रिया का इस्तेमाल पहले भी किया गया है। उन्होंने केरल के मंत्री रमेश चेन्निथला के एक कथित बयान का हवाला देते हुए कहा कि वहां भी SIR के जरिए फर्जी मतदाताओं को हटाने की बात सामने आई थी। हालांकि यह नारायणस्वामी द्वारा किया गया राजनीतिक दावा है और इसे स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

बीजेपी नेता का सवाल था कि यदि मतदाता सूची की समीक्षा का उद्देश्य गलत या अपात्र नामों को हटाना है, तो राहुल गांधी इस प्रक्रिया का विरोध क्यों कर रहे हैं।

यहां यह भी महत्वपूर्ण है कि SIR को लेकर कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों की आपत्तियां केवल प्रक्रिया के उद्देश्य तक सीमित नहीं हैं। विपक्ष ने मतदाता सूची में नाम हटाने, दस्तावेजों की मांग और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता जैसे मुद्दों पर सवाल उठाए हैं।

चुनाव आयोग ने SIR पर क्या कहा?

SIR को लेकर चल रही बहस के बीच चुनाव आयोग ने 23 सितंबर को कहा था कि आयोग के सदस्य किसी फैसले को अंतिम रूप देने से पहले सवाल, सुझाव या टिप्पणियां दे सकते हैं। ECI के मुताबिक, यह किसी भी बहु-सदस्यीय संस्थान में सामान्य विचार-विमर्श का हिस्सा है।

26 सितंबर को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी की बैठक के बाद आयोग ने फिर स्पष्ट किया कि SIR से संबंधित फैसले तीनों आयुक्तों की सहमति से लिए गए थे। यह बयान उन मीडिया रिपोर्टों के बाद आया जिनमें दोनों चुनाव आयुक्तों की ओर से कुछ प्रक्रियाओं को लेकर कथित लिखित आपत्तियों का उल्लेख किया गया था।

इस तरह मौजूदा विवाद में दो अलग-अलग बातें सामने आ रही हैं। मीडिया रिपोर्टों में कुछ आंतरिक आपत्तियों का जिक्र है, जबकि चुनाव आयोग का आधिकारिक पक्ष यह है कि अंतिम निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए।

SIR क्या है और इसे लेकर विवाद क्यों है?

SIR यानी Special Intensive Revision मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण की प्रक्रिया है। इसका उद्देश्य मतदाता सूची की व्यापक समीक्षा करना है ताकि पात्र मतदाताओं को शामिल किया जा सके और ऐसे नामों की पहचान की जा सके जो निर्धारित नियमों के तहत सूची में नहीं होने चाहिए।

इस प्रक्रिया में मतदाताओं के विवरण का सत्यापन किया जा सकता है और पात्रता से संबंधित दस्तावेजों की जांच की जा सकती है। यही वजह है कि SIR का सीधा संबंध नागरिकों के मतदान अधिकार से है।

विपक्षी दलों का तर्क है कि अगर किसी पात्र मतदाता का नाम पर्याप्त प्रक्रिया के बिना सूची से हटता है तो उसके मतदान के अधिकार पर असर पड़ सकता है। दूसरी तरफ चुनाव आयोग का कहना है कि मतदाता सूची को सटीक और अद्यतन रखना चुनावी प्रक्रिया का आवश्यक हिस्सा है।

यही अंतर SIR को लेकर राजनीतिक बहस का प्रमुख आधार बना हुआ है।

आयोग में कथित मतभेदों का मुद्दा

SIR पर राजनीतिक विवाद उस समय और बढ़ गया जब एक मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले करीब 10 महीनों में कुछ चुनावी फैसलों और प्रक्रियाओं पर कम से कम 14 बार आपत्तियां दर्ज की थीं। रिपोर्ट में SIR से जुड़े फैसलों, मतदाता सूची और चुनावी डेटा से संबंधित प्रक्रियाओं का उल्लेख किया गया।

इन रिपोर्टों के सामने आने के बाद विपक्षी नेताओं ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। राहुल गांधी ने भी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ गंभीर राजनीतिक आरोप लगाए और आयोग की भूमिका को लेकर सवाल उठाए।

इसके जवाब में चुनाव आयोग ने कहा कि आंतरिक टिप्पणियों और अंतिम फैसलों के बीच अंतर समझना जरूरी है। आयोग के अनुसार, किसी सदस्य द्वारा किसी प्रस्ताव पर सवाल उठाना या सुझाव देना अपने आप में अंतिम फैसले से असहमति नहीं माना जा सकता।

26 सितंबर की बैठक के बाद आयोग ने विशेष रूप से SIR से जुड़े फैसलों को सर्वसम्मति से लिया गया बताया।

नारायणस्वामी ने CEC ज्ञानेश कुमार का भी बचाव किया

नारायणस्वामी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर भी राहुल गांधी के आरोपों पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि CEC अपना संवैधानिक काम कर रहे हैं और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े फैसले निर्धारित व्यवस्था के अनुसार लिए जा रहे हैं।

उनका आरोप था कि राहुल गांधी बीजेपी और केंद्र सरकार पर राजनीतिक हमला करने के लिए चुनाव आयोग और CEC को निशाना बना रहे हैं। यह नारायणस्वामी का राजनीतिक आकलन है, जिसे स्वतंत्र तथ्य के रूप में नहीं रखा जा सकता।

बीजेपी के अन्य नेताओं ने भी हालिया दिनों में राहुल गांधी और कांग्रेस पर चुनाव आयोग के खिलाफ बेबुनियाद आरोप लगाने का आरोप लगाया है। बीजेपी सांसद रविशंकर प्रसाद ने 26 सितंबर को चुनाव आयोग के बयान का हवाला देते हुए कहा था कि SIR से संबंधित निर्णय CEC और दोनों चुनाव आयुक्तों की सहमति से लिए गए।

दूसरी तरफ कांग्रेस और विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग की प्रक्रियाओं को लेकर सवाल उठाना जारी रखा है। इसलिए यह विवाद फिलहाल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच बना हुआ है।

नारायणस्वामी ने राहुल गांधी के परिवार का भी जिक्र किया

अपने बयान में नारायणस्वामी ने राहुल गांधी के परिवार और चुनाव आयोग के पुराने मामलों का भी उल्लेख किया। उन्होंने राहुल गांधी से उनकी मां सोनिया गांधी के पुराने मतदाता सूची से जुड़े मामले पर स्पष्टीकरण देने की मांग की।

यह नारायणस्वामी द्वारा उठाया गया राजनीतिक आरोप है। ऐसे आरोपों को लेकर किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले संबंधित आधिकारिक रिकॉर्ड और दस्तावेजों को देखना जरूरी है।

नारायणस्वामी ने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टीएन शेषन का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग और राजनीतिक सत्ता के बीच तनाव का इतिहास पुराना है और शेषन के कार्यकाल से जुड़े उदाहरण भी इस बहस में देखे जा सकते हैं।

कांग्रेस और बीजेपी के बीच बढ़ रही राजनीतिक बयानबाजी

चुनाव आयोग को लेकर विवाद अब केवल SIR की तकनीकी या प्रशासनिक प्रक्रिया तक सीमित नहीं रहा है। यह राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का विषय बन चुका है।

राहुल गांधी और कांग्रेस ने चुनावी प्रक्रिया तथा मतदाता सूची से जुड़े कई सवाल उठाए हैं। कांग्रेस की ओर से चुनाव आयोग की विश्वसनीयता और आंतरिक निर्णय प्रक्रिया को लेकर चिंता जताई गई है।

बीजेपी ने इन आरोपों को खारिज किया है और चुनाव आयोग के हालिया बयान को अपने पक्ष के समर्थन के तौर पर पेश किया है। रविशंकर प्रसाद ने कहा कि विपक्ष को चुनाव जीतने के लिए राजनीतिक और संगठनात्मक स्तर पर काम करना चाहिए, न कि चुनाव आयोग पर बेबुनियाद आरोप लगाने चाहिए।

इस बीच JD(S) नेता और केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने भी चुनाव आयोग से कथित आंतरिक मतभेदों को लेकर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की थी। उन्होंने कहा था कि आयोग को तथ्यों को सार्वजनिक कर संस्था की विश्वसनीयता बनाए रखनी चाहिए।

कर्नाटक की गारंटी योजनाओं पर भी कांग्रेस को घेरा

नारायणस्वामी ने केवल चुनाव आयोग के मुद्दे पर ही राहुल गांधी और कांग्रेस को निशाना नहीं बनाया। उन्होंने कर्नाटक की कांग्रेस सरकार की गारंटी योजनाओं पर भी सवाल उठाए।

उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस सरकार के कुछ मंत्री निजी बातचीत में इन योजनाओं को राज्य पर आर्थिक बोझ बता रहे हैं। उन्होंने विधानसभा में सूखे की स्थिति पर हुई चर्चा का भी उल्लेख किया और कहा कि कुछ MLC ने गारंटी योजनाओं को रोकने की बात कही थी। यह भी नारायणस्वामी का दावा है।

बीजेपी नेता ने कर्नाटक में किसानों को मुआवजा देने का मुद्दा भी उठाया। उनके मुताबिक, राज्य में फसल नुकसान को देखते हुए बीजेपी ने किसानों के लिए ₹25,000 प्रति एकड़ मुआवजे की मांग की है।

उन्होंने कहा कि अगर राज्य सरकार किसानों के लिए ₹25,000 प्रति एकड़ सहायता की घोषणा करती है, तो बीजेपी केंद्र के सामने राज्य की समस्याएं रखने के लिए दिल्ली जाने वाले प्रतिनिधिमंडल में शामिल होगी।

चुनाव आयोग विवाद में अब आगे क्या?

फिलहाल SIR को लेकर चुनाव आयोग और राजनीतिक दलों के बीच बहस जारी है। चुनाव आयोग का आधिकारिक पक्ष यह है कि SIR से संबंधित फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं और आंतरिक टिप्पणियां सामान्य संस्थागत प्रक्रिया का हिस्सा हैं।

वहीं विपक्षी दलों ने आयोग की प्रक्रिया और मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर सवाल उठाए हैं। मीडिया रिपोर्टों में आयोग के भीतर कुछ सदस्यों द्वारा आपत्तियां दर्ज किए जाने की बात भी सामने आई है।

ऐसे में इस विवाद में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि चुनाव आयोग के आधिकारिक बयान और राजनीतिक दलों के आरोपों को अलग-अलग देखा जाए। आयोग ने अंतिम SIR फैसलों को सर्वसम्मत बताया है, जबकि विपक्षी नेताओं ने आंतरिक प्रक्रियाओं और मतदाता सूची को लेकर सवाल उठाए हैं।

चलवाड़ी नारायणस्वामी का ताजा बयान इसी राजनीतिक टकराव का हिस्सा है। उन्होंने राहुल गांधी के चुनाव आयोग पर लगातार सवाल उठाने के पीछे की वजह पर सवाल खड़े किए हैं और SIR को लेकर कांग्रेस के रुख पर निशाना साधा है। दूसरी ओर, राहुल गांधी और कांग्रेस की ओर से चुनावी प्रक्रिया को लेकर उठाए गए सवालों पर राजनीतिक बहस आगे भी जारी रहने की संभावना है।
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